नयी दिल्ली/कोलकाता/चेन्नई/मुंबई. वामपंथी दलों ने बुधवार को कहा कि गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्रियों को हटाने का प्रावधान करने वाले नए विधेयक लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर सीधा ”हमला” हैं और उन्होंने इसका ”पूरी ताकत से” विरोध करने का संकल्प लिया.
इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) महासचिव एमए बेबी ने ‘एक्स’ पर कहा, ”मोदी सरकार द्वारा प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को 30 दिनों की हिरासत में रखने के बाद पद से हटाने के तीन विधेयक उसके नव-फासीवादी चरित्र को उजागर करते हैं. हमारे लोकतंत्र पर यह सीधा हमला है और माकपा डटकर इसका विरोध करेगी. हम सभी लोकतांत्रिक ताकतों से इस दमनकारी कदम के खिलाफ एकजुट होने का आग्रह करते हैं.” उन्होंने कहा, ”उच्च पदों पर अपराध से निपटने के नाम पर पेश किए गए ये विधेयक वास्तव में सरकार के असली इरादे को उजागर करते हैं क्योंकि आरएसएस-नियंत्रित मोदी सरकार का इतिहास निर्वाचित राज्य सरकारों को कमजोर करने का रहा है. ‘एसआईआर’ के साथ ही ये हमारे लोकतंत्र को कुचलने की एक जबरदस्त कोशिश का प्रतीक हैं. सभी लोकतांत्रिक ताकतों को इसका विरोध करना चाहिए.” माकपा के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने इन विधेयकों को ”दमनकारी” बताया.
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा कथित तौर पर ‘जनहित, कल्याण और सुशासन’ के नाम पर लाया गया नया विधेयक वास्तव में दमनकारी है और इसका उद्देश्य विपक्ष शासित राज्य सरकारों को अस्थिर करना है, साथ ही भारत की संघीय संरचना को कमजोर करना है.” ब्रिटास ने कहा, ”बदले की राजनीति के इस दौर में, जहां विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, इन प्रावधानों का दुरुपयोग गुप्त राजनीतिक मंशाओं के लिए किया जाएगा.” माकपा नेता ने कहा कि विधेयक में ”संवैधानिक नैतिकता” का उल्लेख इसकी भावना के विपरीत है, क्योंकि यह उस स्थापित सिद्धांत से अलग है कि अयोग्यता और सजा अदालतों द्वारा दोषसिद्धि से जुड़ी होनी चाहिए, न कि केवल आरोपों या गिरफ्तारी से.
उन्होंने कहा, ”यह सिद्धांत जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपीए) की धारा 8 में स्पष्ट रूप से निहित है. आज के घातक राजनीतिक माहौल में, जहां व्यक्तियों पर आसानी से आरोप लगाए जा सकते हैं, उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है और लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है, इस कानून का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने और लोकतांत्रिक मानदंडों को कमजोर करने के लिए किया जाएगा.” भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राज्यसभा सदस्य पी.संदोष कुमार ने कहा कि तीनों विधेयक ”प्रतिशोध की राजनीति के द्वार” खोल देंगे.
कुमार ने कहा, ”ये विधेयक बदले की राजनीति के द्वार खोलने का एक हथियार हैं. भाजपा, जो राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग करती है, अब निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने की खुली छूट पा लेगी. किसी भी मुख्यमंत्री या मंत्री को गिरफ्तार किया जा सकता है और तुरंत हटाया जा सकता है, जिससे सत्तारूढ. दल यह तय कर सकेगा कि राज्यों में कौन शासन करेगा. यह संघवाद और राजनीति में समान अवसर को समाप्त करता है.” भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि ये विधेयक संघवाद के ”अंत की शुरुआत” होंगे.
उन्होंने कहा, ”निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से लेकर ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रणाली के लिए लगातार दबाव बनाने तक, चुनाव प्रणाली में सुनियोजित छेड़छाड़ को देखते हुए यह संशोधन भारत में संघवाद और संसदीय लोकतंत्र के अंत की शुरुआत साबित होंगे.”
भट्टाचार्य ने एक बयान में कहा, ”भाजपा की राजनीति और नीतियों का विरोध करने वाली हर राज्य सरकार अब स्थायी रूप से अस्थिर और नि्क्रिरय हो जाएगी. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)का हर सहयोगी भाजपा के साथ आने के लिए बेचैन रहेगा.” उन्होंने कहा, ”ईडी, सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो), आयकर, एनआईए (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) जैसी केंद्रीय एजेंसियों का हथियार के तौर पर इस्तेमाल और संकीर्ण पक्षपातपूर्ण हितों के लिए राज्यपालों के संवैधानिक पद का दुरुपयोग, एक ऐसी प्रवृत्ति है जिसकी कई मौकों पर यहां तक कि उच्चतम न्यायालय द्वारा भी गंभीर रूप से निंदा की गई है, अब इस विधेयक के अधिनियमित होने से कानूनी वैधता प्राप्त कर लेगी.” सरकार ने बुधवार को लोकसभा में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया. इस विधेयक में प्रधानमंत्री, मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार या हिरासत में रहने पर पद से हटाने का प्रावधान है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025’ के अलावा ‘संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025’ और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025’ पेश किया. बाद में उनके प्रस्ताव पर सदन ने तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति को भेजने का निर्णय लिया.
ममता ने आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को हटाने संबंधी विधेयक की निंदा की
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार होने के बाद प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक की बुधवार को निंदा की और आरोप लगाया कि यह भारत में लोकतांत्रिक युग को हमेशा के लिए समाप्त कर देगा. बनर्जी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में यह भी दावा किया कि संशोधन विधेयक एक ‘सुपर-आपातकाल’ से भी बड़ा कदम है और यह देश की न्यायपालिका की स्वतंत्रता को समाप्त कर देगा.
बनर्जी ने कहा कि वह भारत सरकार द्वारा आज लोकसभा में पेश किए गए 130वें संविधान संशोधन विधेयक की निंदा करती हैं.
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने कहा, ”एक सुपर आपातकाल से भी बड़े, भारत के लोकतांत्रिक युग को हमेशा के लिए समाप्त करने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर मैं इसकी निंदी करती हूं. यह दमनकारी कदम भारत में लोकतंत्र और संघवाद के लिए मृत्यु संकेत है.” उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए इस विधेयक का किसी भी कीमत पर विरोध किया जाना चाहिए.
बनर्जी ने दावा किया कि यह विधेयक केंद्र सरकार को जनादेश में दखलंदाजी करने के लिए शक्ति देता है, तथा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई जैसे गैर-निर्वाचित प्राधिकारियों को निर्वाचित राज्य सरकारों के कामकाज में हस्तक्षेप करने के लिए व्यापक शक्तियां प्रदान करता है.
जवाबदेही के बिना सत्ता कायम रखने की कोशिश: प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों से जुड़े विधेयक पर अभिषेक
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को आरोप लगाया कि गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्रियों को हटाने का प्रावधान करने वाले विधेयक मोदी सरकार द्वारा जवाबदेही के बिना सत्ता बनाए रखने का प्रयास है.
कोलकाता में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बनर्जी ने दावा किया कि ये विधेयक एक “नौटंकी” से अधिक कुछ नहीं हैं क्योंकि केंद्र मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को “आगे बढ़ाने में अपनी विफलता” से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है, जिसे अब “उच्चतम न्यायालय में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है”.
उन्होंने कहा, “हम इन विधेयकों का समर्थन करने वाले पहले व्यक्ति होंगे. हम सरकार से आग्रह करते हैं कि मंत्रियों की जेल की अवधि को प्रस्तावित 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया जाए. लेकिन सरकार को यह प्रावधान जोड़ना होगा कि यदि 16वें दिन मंत्री दोषी साबित नहीं होते हैं, तो संबंधित एजेंसी के जांच अधिकारियों और उसके शीर्ष अधिकारियों को जांच के नाम पर नेता को जेल में रखने की अवधि से दोगुने समय तक जेल में रहना होगा.”
130वां संविधान संशोधन ‘काला विधेयक’: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने बुधवार को 130वें संविधान संशोधन विधेयक को राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ मामले थोपने और उन्हें पदों से हटाने वाला “काला विधेयक” बताया. मुख्यमंत्री ने कहा कि 30 दिन की गिरफ्तारी का मतलब है बिना किसी मुकदमे या अदालती सजा के निर्वाचित मुख्यमंत्री को हटाना. हालांकि, यह भाजपा का एक फरमान मात्र है. तानाशाही इसी तरह शुरू होती है; “वोट चुराओ, विरोधियों को चुप कराओ और राज्यों को कुचलो.”
सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में, मुख्यमंत्री ने कहा, “130वां संविधान संशोधन कोई सुधार नहीं है – यह एक काला दिन है और यह एक काला विधेयक है. मैं इस विधेयक की कड़ी निंदा करता हूं, जो लोकतंत्र की जड़ों पर प्रहार करता है, और मैं सभी लोकतांत्रिक ताकतों से भारत को तानाशाही में बदलने के इस प्रयास के खिलाफ एकजुट होने का आ”ान करता हूं.” उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार ने प्रधानमंत्री के तहत भारत को तानाशाही में बदलकर संविधान और इसकी लोकतांत्रिक नींव को अपवित्र करने का फैसला किया है. स्टालिन ने आरोप लगाया कि “वोट चोरी के खुलासे” के बाद, जिस जनादेश के आधार पर केंद्र में भाजपा सरकार बनी है, वही गंभीर सवालों के घेरे में है.
संविधान संशोधन विधेयक विपक्ष को आतंकित करने के लिए हैं : राउत
शिवसेना (उबाठा) के नेता संजय राउत ने बुधवार को कहा कि गंभीर अपराधों के आरोपों में गिरफ्तार किये जाने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को उनके पद से हटाने का प्रावधान करने वाले विधेयक का उद्देश्य विपक्षी दलों के नेतृत्व वाली सरकारों को आतंकित करना है.
उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना के मंत्रियों पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर यह कानून लागू हो गया, तो उन्हें हर दिन जेल जाना पड़ेगा. राउत ने कहा, ”नये कानूनों का उद्देश्य विपक्ष दलों की सरकारों को आतंकित करना और उनमें भय पैदा करना है. नये कानूनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्यों में विभिन्न दलों की सरकारें भाजपा में शामिल हो जाए, अन्यथा मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी का खतरा मंडराता रहेगा.” उन्होंने आरोप लगाया कि ये नये कानून तानाशाही के प्रतीक हैं.