उम्मीद है चीन में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में सीमा पार आतंकवाद की निंदा की जाएगी: भारत

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 26 Aug 2025 08:04 PM
उम्मीद है चीन में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में सीमा पार आतंकवाद की निंदा की जाएगी: भारत
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नयी दिल्ली. भारत सरकार ने मंगलवार को उम्मीद जतायी कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) अगले हफ्ते चीन के तियानजिन शहर में होने वाले अपने वार्षिक शिखर सम्मेलन में सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा करेगा. यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चीन यात्रा से पहले आई है. मोदी 29 अगस्त से एक सितंबर तक जापान और चीन की चार दिवसीय यात्रा पर रहेंगे.

अपनी यात्रा के पहले चरण में वह प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ वार्षिक भारत-जापान शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए तोक्यो जाएंगे. दोनों प्रधानमंत्री तोक्यो के बाहर भी मिलेंगे. जापान यात्रा समाप्त करने के बाद मोदी 31 अगस्त और एक सितंबर को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए तियानजिन जाएंगे.

एक संयुक्त प्रेसवार्ता में विदेश सचिव विक्रम मिसरी के साथ विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) तन्मय लाल ने कहा कि नयी दिल्ली, शिखर सम्मेलन की घोषणा में आतंकवाद की कड़ी निंदा सुनिश्चित करने के लिए अन्य एससीओ सदस्य देशों और भागीदारों के साथ काम कर रहा है. उन्होंने कहा, ”एससीओ की स्थापना आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी तीन बुराइयों का मुकाबला करने के प्राथमिक लक्ष्य के साथ की गई थी, जो आज भी एक चुनौती बनी हुई है.” लाल ने कहा कि क्षेत्र की सुरक्षा एससीओ सदस्यों के लिए प्राथमिकता बनी हुई है और उन्होंने कट्टरपंथ, उग्रवाद और आतंकवाद का मुकाबला करने पर एक संयुक्त वक्तव्य का स्मरण किया जिसे 2023 में समूह की भारत की अध्यक्षता के दौरान अपनाया गया था.

उन्होंने कहा, ”अतीत में जिन वक्तव्यों को अंतिम रूप दिया गया है, उनमें सीमा पार आतंकवाद सहित अन्य तरह के आतंकवाद की कड़ी निंदा की गई है, जिसमें वह संयुक्त वक्तव्य भी शामिल है जिसका मैंने उल्लेख किया है, जिसे शिखर सम्मेलन की हमारी अध्यक्षता के दौरान अंतिम रूप दिया गया था.” उन्होंने कहा, ”जहां तक इस (आगामी) शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र का संबंध है, तो उसके मसौदे को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है. हम अन्य सदस्यों और साझेदारों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि सीमा पार आतंकवाद सहित अन्य आतंकवाद की फिर से कड़ी निंदा की जाए. लेकिन पाठ को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है.” लाल की यह टिप्पणी इस सवाल के जवाब में आई कि एससीओ आतंकवाद के खतरे से कैसे निपटेगा. पहलगाम में आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने सात मई को पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था.

इन हमलों के बाद चार दिनों तक भीषण झड़पें हुईं, जो 10 मई को समाप्त हुईं. एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर मोदी के चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक करने की उम्मीद है. यह पूछे जाने पर कि क्या प्रधानमंत्री रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे, मिसरी ने कहा कि मोदी की बैठकों को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है. 29 और 30 अगस्त को मोदी की जापान यात्रा के बारे में उन्होंने कहा कि इससे सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे और हिंद-प्रशांत क्षेत्र तथा उसके बाहर शांति, समृद्धि और स्थिरता के लिए साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि होगी. यह लगभग सात वर्षों में मोदी की पहली जापान यात्रा होगी. विदेश सचिव मिसरी ने कहा कि मोदी की जापान यात्रा पूरी तरह से द्विपक्षीय एजेंडे के प्रति सर्मिपत होगी.

मिसरी ने कहा, ”भारत और जापान दो ऐसे देश हैं जो कई मुद्दों पर समान मूल्य, विश्वास और रणनीतिक दृष्टिकोण रखते हैं. दोनों ही एशिया के दो अग्रणी लोकतंत्र और दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में से एक हैं.” विदेश सचिव ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत-जापान संबंधों का दायरा लगातार बढ़ा है. उन्होंने कहा कि यह शिखर सम्मेलन दोनों प्रधानमंत्रियों को अपासी संबंधों की गहन समीक्षा करने, पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति का जायजा लेने और निश्चित रूप से, हमेशा की तरह, महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान करेगा. मिसरी ने कहा, ”यह संबंधों में और अधिक लचीलापन लाने और उभरते अवसरों तथा चुनौतियों का सामना करने के लिए कई नई पहल शुरू करने का भी अवसर होगा.”

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