‘इंडिया’ गठबंधन से इतर दलों से भी ‘सहयोग’ मिलने का न्यायमूर्ति रेड्डी का दावा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 26 Aug 2025 08:17 PM
‘इंडिया’ गठबंधन से इतर दलों से भी ‘सहयोग’ मिलने का न्यायमूर्ति रेड्डी का दावा
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लखनऊ. उपराष्ट्रपति पद के लिए इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) के उम्मीदवार न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी. सुदर्शन रेड्डी ने खुद को ‘इंडिया’ गठबंधन से इतर राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिलने का दावा करते हुए मंगलवार को सभी सियासी पार्टियों के सांसदों से अपील की कि वे दलगत भावना से ऊपर उठकर ‘गुण-दोष’ के आधार पर उनकी उम्मीदवारी के बारे में सोचें.

‘इंडिया’ गठबंधन के अहम घटक दलों- कांग्रेस और सपा के नेताओं से विचार-विमर्श के लिए लखनऊ आये न्यायमूर्ति रेड्डी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ”प्रतिपक्षी दलों ने मुझ पर विश्वास किया है और मैं इसके लिए बहुत-बहुत आभारी हूं. मुझे मालूम है ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दलों के साथ-साथ, वे लोग भी सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं, जो इस गठबंधन में शामिल नहीं है.” न्यायमूर्ति रेड्डी ने कहा, ”मैं सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से अपील करता हूं कि दलगत भावनाओं से ऊपर उठकर गुण-दोष के आधार पर मेरी उम्मीदवारी के बारे में सोचें.” उन्होंने कहा कि वह हमेशा से संविधान की प्रस्तावना की मूल भावना के साथ खड़े रहे और पूरे देश को आश्वस्त करना चाहते हैं कि वह आगे भी पूरी मजबूती से खड़े रहेंगे.

न्यायमूर्ति रेड्डी ने कहा कि उपराष्ट्रपति का पद राजनीतिक नहीं, बल्कि उच्च संवैधानिक ओहदा है. उन्होंने कहा, ”आप लोगों में से कुछ लोग मुझसे पूछते हैं कि मैंने क्यों राजनीतिक अखाड़े में कदम रखा है. मेरा कहना है कि मैंने किसी राजनीतिक मैदान में कदम नहीं रखा है. यह (उपराष्ट्रपति का पद) उच्च संवैधानिक पद है, जिस पर पहले कभी दार्शनिक, राष्ट्रकर्मी और शिक्षाविद् रह चुके हैं.” उन्होंने कहा, ”शिक्षाविद् डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉक्टर जाकिर हुसैन, पूर्व राजनयिक डॉक्टर के. आर. नारायणन और बाद में श्री हामिद अंसारी जी. ये लोग मेरे लिए प्रेरणास्रोत हैं. ये जिस पद पर बैठे, मुझे उसका उम्मीदवार बनाया गया है, इसके लिए मैं सभी विपक्षी दलों का शुक्रगुजार हूं.” न्यायमूर्ति रेड्डी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा उन्हें नक्सलवाद का समर्थक बताये जाने के मुद्दे पर बहस को आगे बढ़ाने से इनकार करते हुए कहा कि वह इस पर अपनी प्रतिक्रिया पहले ही दे चुके हैं. शाह उनके खिलाफ एक ‘विमर्श’ गढ़ना चाहते हैं.

इस सवाल पर कि क्या आपको लगता है कि भारत की संवैधानिक संस्थाएं अपनी राह भटक गई हैं, उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ने कहा, ”इतना तो मुझे जरूर मनाना पड़ेगा कि वे निश्चित रूप से प्रभाव में हैं. जरूरत है कि वे खुद को रास्ते पर लाने के लिए गंभीरता से सोचने पर ध्यान दें.” संसद में हाल ही में पेश किये गये 130वें संविधान संशोधन विधायक के बारे में पूछे गए एक सवाल पर न्यायमूर्ति रेड्डी ने कहा कि अभी यह विधेयक संयुक्त संसदीय समिति के समक्ष भेजा गया है, इसलिए अभी इस बारे में कोई टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा. उनकी की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने बाद में ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि न्यायमूर्ति रेड्डी के बतौर न्यायाधीश दिए गए फैसले पर शाह की टिप्पणी ‘अनुचित’ थी.

कांग्रेस नेता ने कहा, ”मुझे लगता है कि न्यायमूर्ति रेड्डी द्वारा न्यायाधीश के तौर पर दिए गए फैसले पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की टिप्पणी पूरी तरह से अनुचित थी और यह न्यायपालिका का अपमान करने के समान है. इसीलिए हम हमेशा से कहते आए हैं कि भाजपा और उसके नेताओं के मन में संविधान और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति कोई सम्मान नहीं है.” राय ने यह भी दावा किया कि उन्हें यकीन है कि उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए न्यायमूर्ति रेड्डी को ‘इंडिया’ गठबंधन के बाहर से भी समर्थन मिल रहा है.

यह पूछे जाने पर कि क्या पर्याप्त संख्याबल न होने के बावजूद, विपक्ष उपराष्ट्रपति चुनाव का इस्तेमाल यह दिखाने के लिए कर रहा है कि ‘इंडिया’ गठबंधन अब भी एकजुट है, राय ने कहा, ”हम एक हैं और भाजपा को र्शिमंदा करने के लिए हमारे पास कुछ सरप्राइज है.” उन्होंने कहा, ”हमें हर जगह से शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है. हर कोई देख रहा है कि भाजपा किस तरह संविधान की भावना को कुचल रही है. मुझे विश्वास है कि हमें मिल रहा समर्थन कई लोगों को आश्चर्यचकित कर देगा.” उपराष्ट्रपति का चुनाव आगामी नौ सितंबर को होगा. यह पद जगदीप धनखड़ के हाल में इस्तीफा देने की वजह से रिक्त हुआ है. सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने इस चुनाव में महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है.

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