आईआरसीटीसी मामले में अदालत ने लालू, राबड़ी और तेजस्वी के खिलाफ आरोप तय किये

नयी दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को कथित आईआरसीटीसी घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनके बेटे व राज्य में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय किए. इसके साथ ही बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले उनके खिलाफ मुकदमे की तैयारी शुरू हो गई है.

बिहार में विधानसभा चुनाव दो चरणों में छह और 11 नवंबर को होंगे. लालू प्रसाद नीत राष्ट्रीय जनता दल (राजद) राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों में से एक है. विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ ”प्रथम दृष्टया” मामला बनता है और भूमि हस्तांतरण के संबंध में गंभीर संदेह है. पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी तथा पूर्व उपमुख्यमंत्री और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने न्यायाधीश द्वारा आरोप पढ़े जाने के बाद खुद को ”निर्दोष” बताया और मुकदमे का सामना करने की बात कही.

यह मुकदमा अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में शुरू होने की संभावना है. इस मुद्दे का इस्तेमाल उनके राजनीतिक विरोधी चुनाव प्रचार में कर सकते हैं. विशेष न्यायाधीश ने मामले में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी के साझा आरोप तय किए, जो भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के दो होटलों के संचालन के ठेके एक निजी फर्म को देने में कथित अनियमितताओं से संबंधित है. अदालत ने लालू प्रसाद के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी आरोप तय किये.

न्यायाधीश ने आदेश का मुख्य भाग पढ़ा और कहा कि भूखंड कम मूल्य पर दिए गए, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ. मामले में विस्तृत आदेश का इंतजार है. नेताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कहा, “जैसे ही हमें आदेश की प्रति प्राप्त होगी, हम आरोप तय करने से संबंधित आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे.” इससे पहले गत 24 सितंबर को अदालत ने आरोप तय करने के अपने आदेश के लिए सभी आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था.

सीबीआई के आरोपपत्र के अनुसार, 2004 और 2014 के बीच कथित तौर पर एक साजिश रची गई थी, जिसके तहत पुरी और रांची स्थित भारतीय रेलवे के बीएनआर होटलों को पहले आईआरसीटीसी को हस्तांतरित किया गया और बाद में, इनके संचालन, रखरखाव और देखभाल के लिए, बिहार के पटना स्थित सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को पट्टे पर दे दिया गया.

एजेंसी ने आरोप लगाया कि निविदा प्रक्रिया में धांधली और हेराफेरी की गई और निजी संस्था सुजाता होटल्स की मदद के लिए शर्तों में फेरबदल किया गया. आरोपपत्र में आईआरसीटीसी के समूह महाप्रबंधक वी के अस्थाना और आर के गोयल के साथ-साथ सुजाता होटल्स के निदेशक और चाणक्य होटल के मालिक विजय कोचर और विनय कोचर का भी नाम है. डिलाइट मार्केटिंग कंपनी, जिसे अब लारा प्रोजेक्ट्स के नाम से जाना जाता है, और सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को भी आरोपपत्र में आरोपी कंपनियों के रूप में नामित किया गया है.

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