उत्तराखंड: ओएनजीसी में ठेका श्रमिकों की नियुक्ति पर लगी तीन दशक पुरानी रोक हटी

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार की 31 साल पुरानी उस अधिसूचना को रद्द कर दिया है जिसमें तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) में ठेका श्रमिकों की नियुक्ति पर रोक लगाई गई थी। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकल पीठ ने ठेका श्रम (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम, 1970 की धारा 10 के तहत अनिवार्य परामर्श प्रक्रिया का पालन किए बिना आठ सितंबर 1994 को जारी की गई अधिसूचना को अमान्य करार दिया।

ओएनजीसी ने यह तर्क देते हुए अधिसूचना को चुनौती दी थी कि अधिसूचना जारी करने से पहले केंद्रीय सलाहकार संविदा श्रम बोर्ड से इस संबंध में सलाह नहीं ली गयी और केवल एक उपसमिति की रिपोर्ट पर भरोसा किया गया जिसने निगम की 34 इकाइयों में से केवल चार का ही निरीक्षण किया था।

केंद्र ने दावा किया था कि अधिसूचना उचित प्रक्रिया के बाद जारी की गयी थी। अदालत ने पाया कि सही ढंग से परामर्श नहीं हुआ तथा सीमित निरीक्षण का अर्थ यह है कि निर्णय में पर्याप्त तथ्यात्मक आधार का अभाव था। उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि धारा 10(2) का अनुपालन अनिवार्य है और इसका कोई भी उल्लंघन अधिसूचना को अमान्य कर देता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button