
नयी दिल्ली/कोलकाता. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को कहा कि बिहार के बाद अब देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद शुरू होगी. दूसरे चरण में छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में एसआईआर कराया जाएगा. इनमें तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल में 2026 में चुनाव संभावित हैं.
कुमार ने स्पष्ट किया कि असम में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की घोषणा अलग से की जाएगी. असम में भी अगले साल विधानसभा चुनाव संभावित है. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि मौजूदा एसआईआर स्वतंत्रता के बाद से ऐसी नौवीं कवायद है और पिछला एसआईआर 21 वर्ष पहले 2002-04 में हुआ था. उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई और इसको लेकर कोई भी अपील नहीं आई जो इस कवायद की सबसे बड़ी खूबी रही.
कुमार ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”दूसरा चरण 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया जाएगा. एसआईआर यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी योग्य मतदाता का नाम छूट न जाए और किसी भी अयोग्य मतदाता का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो.” उन्होंने आगे कहा, ”एसआईआर के दूसरे चरण में 51 करोड़ मतदाता शामिल होंगे. गणना प्रक्रिया चार नवंबर से शुरू होगी, जबकि मसौदा मतदाता सूची नौ दिसंबर को और अंतिम मतदाता सूची सात फरवरी को प्रकाशित की जाएगी.” बिहार में मतदाता सूची को दुरुस्त करने का काम पूरा हो चुका है, जहां लगभग 7.42 करोड़ मतदाताओं की अंतिम सूची बीते 30 सितंबर को प्रकाशित की गई थी. राज्य में मतदान दो चरणों में होगा छह नवंबर और 11 नवंबर को होगा तथा मतगणना 14 नवंबर को होगी.
आयोग एसआईआर कराने की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) के साथ पहले ही दो बैठकें कर चुका है. कई सीईओ ने अपनी पिछली एसआईआर के बाद की मतदाता सूचियां अपनी वेबसाइटों पर डाल दी हैं.
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर 2008 की मतदाता सूची उपलब्ध है, जब राष्ट्रीय राजधानी में अंतिम गहन पुनरीक्षण हुआ था. उत्तराखंड में अंतिम एसआईआर 2006 में हुआ था और उस वर्ष की मतदाता सूची अब राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध है.
राज्यों में अंतिम एसआईआर उसी तरह से ‘कट-ऑफ’ तिथि के रूप में काम करेगी जैसे बिहार की वर्ष 2003 की मतदाता सूची का उपयोग चुनाव आयोग ने गहन पुनरीक्षण के लिए किया था. अधिकांश राज्यों में मतदाता सूची का अंतिम एसआईआर 2002 और 2004 के बीच था और उन्होंने अपने-अपने राज्यों में हुए अंतिम एसआईआर के अनुसार वर्तमान मतदाताओं का मानचित्रण लगभग पूरा कर लिया है. एसआईआर का प्राथमिक उद्देश्य अवैध विदेशी प्रवासियों की जांच करके उनका नाम मतदाता सूची से बाहर करना है. बांग्लादेश और म्यांमार सहित विभिन्न देश के अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई के मद्देनजर यह कदम महत्वपूर्ण हो जाता है.
एसआईआर के लिए निर्वाचन आयोग की घोषणा से पहले बंगाल में अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला
पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की निर्वाचन आयोग द्वारा घोषणा किये जाने से कुछ घंटे पहले, राज्य सरकार ने सोमवार को विभिन्न जिलों में 200 से अधिक नौकरशाहों और वरिष्ठ अधिकारियों का बड़े पैमाने पर फेरबदल करने की अधिसूचना जारी की.
पश्चिम बंगाल सरकार के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा 61 आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) और पश्चिम बंगाल लोक सेवा (डब्ल्यूबीसीएस) के 145 (कार्यकारी) अधिकारियों का तबादला किया गया. यह हालिया समय में एक बार में हुए सबसे बड़े तबादलों में से एक है.
इस फेरबदल में 10 जिलाधिकारी, विशेष सचिव स्तर के कई अधिकारी, कई विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) तथा आईएएस और डब्ल्यूबीसीएस, दोनों संवर्गों के कई एडीएम (अतिरिक्त जिलाधिकारी) और एसडीओ (अनुमंडल पदाधिकारी) शामिल हैं. हाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एचआईडीसीओ) के प्रबंध निदेशक (एमडी), कोलकाता नगर निगम के नगर आयुक्त और हल्दिया विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) भी तबादलों की सूची में शामिल हैं.
स्थानांतरित जिलाधिकारियों की सूची में उत्तर और दक्षिण 24 परगना, कूच बिहार, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया, दार्जिलिंग, मालदा, बीरभूम, झारग्राम और पूर्वी मेदिनीपुर जिले शामिल हैं. एक अधिकारी ने बताया कि इन र्किमयों से आगामी एसआईआर कवायद में नोडल भूमिका निभाने की उम्मीद थी तथा निर्वाचन आयोग द्वारा कार्यक्रमों की घोषणा के बाद राज्य सरकार के लिए आगे फेरबदल करना असंभव हो जाता. राज्य में विपक्षी दल भाजपा ने आरोप लगाया कि यह कदम ममता बनर्जी प्रशासन द्वारा आगामी एसआईआर प्रक्रिया को विफल करने का एक प्रयास है. वहीं, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने अधिसूचनाओं को ”नियमित” बताया है.
भाजपा नेता सजल घोष ने आरोप लगाया, ”ममता बनर्जी को लग रहा है कि इस प्रक्रिया के सफलतापूर्वक पूरा होने और मतदाता सूची से बड़ी संख्या में फर्जी मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद उनकी पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. इसलिए, वह आखिरी समय में इतनी बड़ी संख्या में फेरबदल कर इस प्रक्रिया को बाधित करने की हरसंभव कोशिश कर रही हैं.” इस आरोप को खारिज करते हुए, तृणमूल कांग्रेस आईटी प्रकोष्ठ प्रमुख देबांग्शु भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा बेबुनियाद आरोप लगाने के लिए ”हथकंडे अपना रही है.” उन्होंने कहा, ”प्रशासन में इस तरह के तबादले साल भर नियमित तौर पर होते रहते हैं. कोई कारण नहीं है कि इसके और एसआईआर की घोषणा के बीच कोई संबंध जोड़ा जाए. यह केवल विरोध के लिए विरोध है.”
असम में एसआईआर को लेकर अलग आदेश जारी किया जाएगा: ज्ञानेश कुमार
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को कहा कि असम में नागरिकता अधिनियम के अलग प्रावधान लागू होते हैं और राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए एक विशेष आदेश जारी किया जाएगा. कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ”नागरिकता अधिनियम के तहत, असम में नागरिकता के लिए अलग प्रावधान हैं. उच्चतम न्यायालय की निगरानी में नागरिकता की जांच का कार्य लगभग पूरा होने वाला है. 24 जून का एसआईआर आदेश पूरे देश के लिए था. ऐसी परिस्थितियों में यह असम पर लागू नहीं होता.” उन्होंने कहा, ”इसलिए असम के लिए अलग से पुनरीक्षण आदेश जारी किए जाएंगे और एसआईआर की एक अलग तिथि घोषित की जाएगी.”
बंगाल में एसआईआर में कोई बाधा नहीं, राज्य संवैधानिक रूप से इसका समर्थन करने के लिए बाध्य: सीईसी
निर्वाचन आयोग ने सोमवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कार्यान्वयन में कोई बाधा नहीं आएगी क्योंकि राज्य सरकारें मतदाता सूची में संशोधन के लिए उसे कर्मी उपलब्ध कराने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य हैं.
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब निर्वाचन आयोग ने नवंबर और फरवरी के बीच 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के दूसरे चरण के कार्यान्वयन की घोषणा की है.
इनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ., गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं.
पश्चिम बंगाल में एसआईआर कराये जाने पर वहां ”खूनखराबे” की संभावना के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कुमार ने कहा, ”इसमें (एसआईआर कराने में) कोई बाधा नहीं है.” कुमार ने संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग को प्राप्त शक्तियों का हवाला देते हुए कहा, ”आयोग अपना कर्तव्य निभा रहा है और राज्य सरकारें संवैधानिक रूप से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए बाध्य हैं…सभी संवैधानिक निकाय संविधान में निहित अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं.” उन्होंने कहा, ”कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारी है… राज्य मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव कराने के लिए निर्वाचन आयोग को आवश्यक कर्मी उपलब्ध कराने के लिए भी बाध्य हैं.”



