
नयी दिल्ली. कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने के प्रावधान वाले तीन विधेयकों पर विचार के लिए गठित संयुक्त समिति ”भाजपा और उसकी टीम की जेपीसी’ तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के असंवैधानिक एजेंडे का रबर स्टैंप है.” कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने इस समिति से दूरी बनाने का फैसला किया है.
इस संयुक्त समिति का गठन बुधवार को कर दिया गया, जिसकी अध्यक्षता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद अपराजिता सारंगी करेंगी.
लोकसभा में कांग्रेस के सचेतक मणिकम टैगोर ने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन के 340 से अधिक सांसद इस ”तथाकथित जेपीसी” (संयुक्त संसदीय समिति) का बहिष्कार कर रहे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया, ”यह कोई संयुक्त संसदीय समिति नहीं है, यह भाजपा और उसकी बी-टीम की संयुक्त संसदीय समिति है.” टैगोर ने दावा किया, ”यह जेपीसी मोदी के असंवैधानिक एजेंडे के लिए एक रबर स्टैंप के अलावा और कुछ नहीं है.”
लाल किला विस्फोट का विषय संसदीय समिति की बैठक में उठा, अध्यक्ष ने चर्चा से इनकार किया
संसद की गृह मामलों की स्थायी समिति की बुधवार को हुई बैठक में लाल किले के निकट के हुए विस्फोट का विषय उठाया गया, लेकिन समिति के अध्यक्ष ने इस मामले पर चर्चा से इनकार कर दिया. सूत्रों ने यह जानकारी दी.बैठक में मौजूद एक सदस्य के अनुसार, लाल किले के पास सोमवार शाम को हुए विस्फोट का मुद्दा तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद ने उठाया था. तृणमूल सांसद ने कथित खुफिया विफलता पर भी चिंता जताई. सूत्र ने बताया कि समिति के अध्यक्ष राधा मोहन दास अग्रवाल ने चर्चा करने से इनकार कर दिया और इस मुद्दे पर किसी भी स्वप्रेरित बयान की अनुमति भी नहीं दी.
गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति की बुधवार को एक बैठक हो रही है और इसके एजेंडे में ‘आपदा प्रबंधन’ विषय शामिल हैं.
समिति इस विषय पर गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और महानिदेशालय (अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षक) के विचार सुनेगी.
बीते सोमवार को लाल किला यातायात सिग्नल के निकट धीमी गति से चलती एक गाड़ी में हुए उच्च-तीव्रता वाले विस्फोट में 12 लोगों की मौत हो गई थी.



