
नयी दिल्ली. दिल्ली में लाल किला के पास सोमवार शाम को हुए शक्तिशाली विस्फोट में घायल हुए लोग न सिर्फ शारीरिक जख्म, बल्कि आघात और अनिश्चित भविष्य की चिंता से भी जूझ रहे हैं. लाल किले के पास लाल बत्ती पर धीमी गति से चलती हुई एक कार में विस्फोट की घटना में 13 लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए. हादसे में घायल लोगों में से कुछ ने अपनी आंख खो दी, तो कुछ लोग टूटी हड्डियों से लेकर खराब आर्थिक स्थिति से गुजरने को मजबूर हैं. हादसे में घायल हुए लोग अब चोट, आघात और भविष्य की चिंताओं से जूझ रहे हैं.
इन्हीं में में से एक हैं, शाहदरा निवासी अंकुश शर्मा हैं, जो सोमवार शाम को चांदनी चौक स्थित गौरी शंकर मंदिर में दर्शन करने आए थे.
जब अंकुश दर्शन के लिए मंदिर की ओर जा रहा थे, तभी विस्फोट ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया. अंकुश (32) के भाई अंकित शर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “जो कुछ हुआ उसने मेरे भाई की जिंदगी पूरी तरह बदल दी.” उन्होंने बताया कि अंकुश की एक आंख हमेशा के लिए चली गई, उसकी हड्डी टूट गई, प्लास्टिक सर्जरी हुई है और वह फिलहाल आईसीयू में है. अंकुश के पास ही रोहित नाम का एक कैब चालक और अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला व्यक्ति था.
रोहित ने अपनी कैब लाल किले की पार्किंग में खड़ी की हुई थी और कुछ देर से कोई सवारी न मिलने के कारण जल्दी से खाना खाने के लिए चांदनी चौक की ओर चल पड़ा था. विस्फोट में घायल हुए रोहित ने बताया, “मुझे भूख लगी थी, इसलिए मैं कुछ खाने के लिए बाजार गया. और फिर विस्फोट हो गया. मैं जमीन पर गिर पड़ा. सब जगह अंधेरा छा गया था.” रोहित अपने परिवार के लिए अकेला कमाने वाला है और उसके परिवार में माता-पिता, पत्नी और आठ साल की बेटी है.
गंभीर चोटों के कारण रोहित को डर है कि ठीक होने का लंबा रास्ता उन पर आर्थिक रूप से भी भारी पड़ेगा. उन्होंने कहा, “मेरा शरीर अभी पूरी तरह से काम नहीं कर रहा है. मुझे नहीं पता कि इसे ठीक होने में कितना समय लगेगा. मैं ही कमाने वाला अकेला सदस्य हूं…सब कुछ मुझ पर निर्भर है.” इस घटना के बाद के हालात से जूझ रहा एक और परिवार रीता का है, जो एक रिश्तेदार से मिलने चांदनी चौक गई थी.
लौटते समय, वह अपनी घड़ी ठीक करवाने के लिए एक दुकान पर रुकी. जब वह अपनी टैक्सी का इंतजार कर रही थी, तो चालक ने उसे दूसरी तरफ आने को कहा. जब विस्फोट हुआ, तब वह दूसरी तरफ जाने की कोशिश कर रही थी. घटना के बाद से अस्पताल में मौजूद रीता की बहन अंजू ने कहा कि परिवार अब भी उस घटना को समझने की कोशिश कर रहा है और शुक्र है कि वह बच गई. अंजू ने कहा, “वह (रीता) सड़क पार करने के लिए आगे बढ़ी ही थी कि सब कुछ हिल गया. वह गिर गई, और उसे लेने आया कैब चालक भी घायल हो गया.” हादसे में बचे लोग शुक्रगुज़ार हैं कि वे बच गए, लेकिन उनके ठीक होने का सफर अभी शुरू ही हुआ है.
दिल्ली विस्फोट में मारे गए अमर कटियार के बेटे को पिता का इंतजार
दिल्ली विस्फोट में मारे गए अमर कटारिया का तीन साल का बेटा अपने घर के मुख्य दरवाजे पर टकटकी लगाए बैठा रहता है. तीन दिन बीत गए हैं, जब उसके पिता ने आखिरी बार दस्तक दी थी और वह दौड़कर उनकी गोद में चढ़ गया था. बच्चा इस बात से अनजान है कि उसके पिता सोमवार देर शाम लाल किले के पास हुए कार विस्फोट में मारे गए 13 लोगों में शामिल हैं. घर के खामोश कमरों और अपने रोते-बिलखते परिजनों को देख उसे कुछ हद तक इस अनहोनी का एहसास हो गया है, पर वह उसे स्वीकार नहीं कर पा रहा है.
अमर के रिश्तेदार स्वदेश सेठी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “वह (बच्चा) दरवाजे की ओर देखता रहता है. बाहर होने वाली हर हलचल पर वह दौड़ पड़ता है. उसे लगता है कि कोई आ रहा है. आप उसकी आंखों में देख सकते हैं. उसे एहसास हो रहा है कि कुछ गड़बड़ है, लेकिन वह नहीं जानता कि क्या गलत हुआ है.” अमर चांदनी चौक के भागीरथ पैलेस में दवा का कारोबार करते थे. वह सोमवार देर शाम काम निपटाकर घर के लिए निकले थे, तभी लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए कार विस्फोट की चपेट में आ गए.
सेठी के मुताबिक, अमर ने चार साल पहले कृति से शादी की थी और दोनों तीन साल पहले माता-पिता बने थे. उन्होंने कहा कि वे अपनी छोटी-सी दुनिया में बहुत खुश थे, लेकिन सोमवार देर शाम 6:52 बजे उनका हंसता-खेलता संसार उजड़ गया. सेठी ने वह दुखद मंजर बयां किया, जब अमर का बेटा अपने पिता के शव के पास खड़ा था और जो कुछ घट रहा था, उससे भ्रमित और भयभीत था.
सेठी ने रुंधे गले से कहा, “वह (बच्चा) बार-बार मेरा हाथ खींच रहा था और पूछ रहा था, ‘पापा ज़मीन पर क्यों सो रहे हैं?’ मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था. मैं रो रहा था, चीख रहा था.” उन्होंने सवाल किया, “हम उस बच्चे को क्या जवाब दें, जो अब भी यही सोचता है कि उसके पापा बस सो रहे हैं?” सेठी ने अमर की पत्नी कृति के बारे में बताया कि वह अपने पति की मौत की खबर सुनने के बाद से सदमे में हैं. उन्होंने कहा, “कृति बस एक जगह बैठी रहती हैं. वह सदमे में हैं और कुछ बोल ही नहीं रही हैं.” सेठी के अनुसार, “कृति तीन महीने की गर्भवती हैं. वह खुलकर नहीं रोई हैं. वह चुपचाप बैठी हुई हैं.” सेठी ने बताया कि अमर और कृति ने भविष्य के लिए बड़े-बड़े सपने देखे थे.
उन्होंने कहा, “उनकी शादी को चार साल हो गए थे. वे एक और बच्चे की योजना बना रहे थे. अपनी एक छोटी-सी दुनिया को लेकर सपने संजो रहे थे. सब कुछ ठीक चल रहा था. और अब सब कुछ खत्म हो गया है. कृति की जिंदगी मानो थम-सी गई है.” सेठी ने कहा कि इस घटना से कटारिया का पूरा परिवार बुरी तरह से टूट गया है, लेकिन विस्फोट के बाद दिल्ली सरकार का एक भी प्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं आया.
उन्होंने कहा, “हमारे इलाके के सांसद दाह संस्कार वाले दिन आए और अगले दिन दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आए. दिल्ली सरकार का एक भी प्रतिनिधि नहीं आया. हम अकेले शोक मना रहे हैं.” अमर के पिता जगदीश कटारिया ने विस्फोट से पहले के पलों के बारे में बताया. उन्होंने कहा, “अमर हमारा इकलौता बेटा था. उसकी शादी चार साल पहले हुई थी और उसका तीन साल का एक बेटा है. उसने हमें फोन करके बताया था कि वह घर आ रहा है.” कटारिया के मुताबिक, जब परिवार ने अमर को फोन पर जानना चाहा कि वह कहां पहुंचा है, तो एक अजनबी महिला ने फोन उठाया.
कटारिया के अनुसार, “महिला ने हमें बताया कि उसे अमर का फोन लाल किले के पास से मिला है, जहां एक विस्फोट हुआ है. हमें कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि हम क्या करें. हम फौरन घटनास्थल के लिए निकल गए.” कटारिया ने कहा, “हम घटनास्थल से एलएनजेपी अस्पताल गए, जहां हम पूरी रात अन्य शोकाकुल परिवारों के साथ इंतजार करते रहे. हमें अगले दिन तड़के पांच बजे उसका शव मिला.” कटारिया ने बताया कि अमर का शव इस कदर झुलस गया था कि उसे पहचानना मुश्किल था और वह अपने बेटे के हाथों पर बने टैटू की मदद से उसकी शिनाख्त कर पाए. इनमें से एक टैटू पर “मां, मेरा पहला प्यार”, दूसरे पर “मेरे पिता मेरी ताकत” और तीसरे पर “कृति” नाम लिखा हुआ था.



