संसद में ‘शांति’ विधेयक न केवल ‘ट्रंप’, बल्कि ‘अदाणी’ के लिए भी जल्दबाजी में पारित हुआ : कांग्रेस

संसदीय परंपराओं को दरकिनार कर दो दशकों की प्रगति को पलट दिया गया: कांग्रेस ने मनरेगा को लेकर कहा

नयी दिल्ली. कांग्रेस ने ‘शांति’ विधेयक को लेकर रविवार को मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इसे संसद में न केवल ‘ट्रंप’, बल्कि ‘अदाणी’ के लिए जल्दबाजी में पारित कराया गया. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की, जिसमें दावा किया गया है कि निजी कंपनियों को इस क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति मिलने के बाद अदाणी समूह परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में कदम रखने की योजना बना रहा है.

शुक्रवार को संपन्न हुए संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान दोनों सदनों द्वारा ‘भारत के रूपांतरण के लिए नाभिकीय ऊर्जा का संधारणीय दोहन और अभिवर्द्धन (शांति) विधेयक, 2025’ को मंजूरी दी गई. इसका उद्देश्य कड़ाई से नियंत्रित असैन्य परमाणु क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलना है.

रमेश ने दावा किया, ”शांति विधेयक को संसद में न केवल ट्रंप (द रिएक्टर यूज मैनेजमेंट प्रोग्राम) के लिए, बल्कि अदाणी (एक्सेलेरेटेड डेमेजिंग अधिनियम फोर न्यूक्लियर इंडिया) के लिए जल्दबाजी में पारित कराया गया.” कांग्रेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक वार्षिक रक्षा नीति विधेयक पर हस्ताक्षर किए जाने का हवाला देते हुए शनिवार को दावा किया था कि संसद के शीतकालीन सत्र में पारित ”शांति” विधेयक का मकसद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ”उनके अच्छे मित्र रहे ट्रंप के बीच शांति बहाल करना था.”

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया था, ”राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में अमेरिकी वित्त वर्ष 2026 के लिए ‘नेशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट’ पर हस्ताक्षर किए हैं. यह अधिनियम 3,100 पृष्ठों का है. पृष्ठ संख्या 1912 में परमाणु दायित्व नियमों पर अमेरिका और भारत के बीच संयुक्त मूल्यांकन का संदर्भ है.”

उन्होंने दावा किया, ”अब हम निश्चित रूप से जानते हैं कि प्रधानमंत्री ने इस सप्ताह की शुरुआत में संसद के माध्यम से शांति विधेयक को क्यों पारित करवाया, जिसमें अन्य बातों के अलावा, परमाणुवीय नुकसान के लिये सिविल दायित्व अधिनियम, 2010 के लिए नागरिक दायित्व के प्रमुख प्रावधानों को हटा दिया गया था, जिसे संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था.” रमेश ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह विधेयक पारित कराने का मक.सद प्रधानमंत्री के कभी अच्छे मित्र रहे ट्रंप के साथ शांति बहाल करना है. रमेश ने दावा किया कि शांति अधिनियम को ट्रंप अधिनियम (द रिएक्टर यूज मैनेजमेंट प्रोग्राम) कहा जा सकता है.

संसदीय परंपराओं को दरकिनार कर दो दशकों की प्रगति को पलट दिया गया: कांग्रेस ने मनरेगा को लेकर कहा

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर संसद में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) जैसे ”ऐतिहासिक कानून का अपमान” करने का रविवार को आरोप लगाते हुए कहा कि ”कोई परामर्श किए बिना” और सभी संसदीय परंपराओं एवं प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए पिछले दो दशकों की प्रगति को पलट दिया गया है.

कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने ग्रामीण रोजगार योजना की उपलब्धियों को रेखांकित करने के लिए 2012 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की पूर्व सरकार द्वारा जारी इसकी समीक्षा से जुड़ा एक दस्तावेज सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किया. उन्होंने एक ‘पोस्ट’ साझा करते हुए कहा कि 14 जुलाई 2012 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा प्रकाशित ‘मनरेगा समीक्षा’ जारी की थी.

रमेश ने कहा कि यह 2008 से 2012 के बीच मनरेगा पर किए गए 145 क्षेत्रीय अध्ययनों का संकलन है, जिसमें नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा किया गया एक अध्ययन भी शामिल है. कांग्रेस नेता ने कहा कि ”संसद में पिछले एक सप्ताह के दौरान हुए इस ऐतिहासिक कानून के अपमान” के बीच इस दस्तावेज को पढ़ना अब आवश्यक हो गया है.

उन्होंने कहा, ”कोई परामर्श किए बिना तथा सभी संसदीय परंपराओं और प्रक्रियाओं को दरकिनार कर दो दशकों की प्रगति को पलट दिया गया है.” रमेश ने ‘मनरेगा समीक्षा’ दस्तावेज की प्रस्तावना का एक ‘स्क्रीनशॉट’ भी साझा किया. इस दस्तावेज को उस समय जारी किया गया था, जब वह ग्रामीण विकास मंत्रालय के प्रभारी थे.

कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने भी ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक’ संसद से पारित होने के बाद शनिवार को आरोप लगाया था कि मोदी सरकार ने मनरेगा पर बुलडोजर चला दिया है और करोड़ों किसानों, श्रमिकों एवं भूमिहीन ग्रामीण वर्ग के गरीबों के हितों पर हमला किया है. उन्होंने कहा था कि पार्टी नए “काले कानून” के खिलाफ लड़ाई को लेकर प्रतिबद्ध हैं.

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक वीडियो संदेश में कहा था कि पिछले 11 साल में मोदी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार, गरीबों और वंचितों के हितों को नजरअंदाज कर मनरेगा को कमजोर करने की हर कोशिश की, जबकि कोविड के समय यह गरीब वर्ग के लिए संजीवनी साबित हुआ. संसद ने ‘विकसित भारत- जी राम जी विधेयक, 2025’ को बृहस्पतिवार को मंजूरी दी. यह मनरेगा की जगह लेगा. विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध किया है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button