उत्तर प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश: नेपाल, दुबई और अमेरिका से संचालित, हिंदू नामों का इस्तेमाल

गाजियाबाद पुलिस ने पकड़े गए संदिग्ध के आधार पर खुलासा किया कि जासूसी नेटवर्क युवाओं को फंसाने के लिए धार्मिक और हिंदू नामों का प्रयोग कर रहा था, साथ ही तीन किस्तों में रकम भी मिली

मामले का संदर्भ और मुख्य जानकारी: गाजियाबाद पुलिस ने जासूसी के आरोप में एक अंतरराष्ट्रीय जाल का भंडाफोड़ किया है, जो नेपाल, दुबई, अमेरिका और बांग्लादेश जैसे देशों से संचालित हो रहा था। इस जाल में शामिल एजेंट भारत के युवाओं को फंसाने और उनके बीच जासूसी गतिविधियों को संचालित करने के लिए काम कर रहे थे।

गिरफ्तारी और पूछताछ का खुलासा
गाजियाबाद पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार संदिग्ध समीर को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और आईएसआई के हैंडलर सरफराज, सरदार के नाम से बनाए गए व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा गया था। इन ग्रुपों के जरिए युवाओं को धार्मिक और आतंकी गतिविधियों से प्रभावित किया जाता था।

आंतरिक गतिविधियों और गतिविधियों का संचालन
जांच में पाया गया कि दुबई में बैठे एजेंट इन ग्रुपों के माध्यम से युवाओं को विभिन्न स्थानों की वीडियो, फोटो और लोकेशन भेजने का टास्क देते थे। इन ग्रुपों में तबलीगी जमात और अन्य धार्मिक वीडियो शेयर किए जाते थे ताकि युवाओं का ब्रेनवाश किया जा सके।

नाम बदलकर पहचान छिपाने का प्रयास
आरोपियों ने अपनी पहचान छुपाने के लिए हिंदू नामों का प्रयोग किया है। सरफराज खुद का नाम बदलकर ‘सरदार’ रख चुका था, और ऑनलाइन मीटिंग में माथे पर टीका लगाकर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास किया गया।

धार्मिक और सेना संबंधित स्थानों की जानकारी जुटाना
ग्रुप में शामिल युवाओं को धार्मिक स्थलों और सेना से जुड़े स्थानों की फोटो और वीडियो भेजने के निर्देश दिए जाते थे। इन सभी गतिविधियों का उद्देश्य जासूसी और संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम देना था।

पुलिस की कार्रवाई और रकम का खुलासा
पुलिस के अनुसार, समीर को गिरोह की ओर से तीन बार में कुल पांच हजार रुपये दिए गए थे। पहली और दूसरी बार 1500-1500 रुपये, और तीसरी बार 2000 रुपये प्राप्त हुए। यह रकम कहां से आई है, इसकी जांच की जा रही है।

अधिक जानकारी और जांच का चरण
एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इन ग्रुपों से जुड़े करीब 250 लोग पुलिस की नजर में हैं। जांच एजेंसियां इस जाल के पीछे मौजूद विदेशी एजेंटों और नेटवर्क का पर्दाफाश करने में लगी हैं।

निष्कर्ष: यह मामला यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क भारत जैसे देश में अपनी गतिविधियों को जारी रखने के लिए धार्मिक और हिंदू नामों का प्रयोग कर रहा है। पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए इस जाल का भंडाफोड़ किया है, और आगे की जांच जारी है। जनता से भी अपील की गई है कि सावधानी बरतें और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

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