न्यायमूर्ति शर्मा के बच्चे सरकारी वकीलों के पैनल में शामिल हैं: केजरीवाल ने उच्च न्यायालय में कहा

नयी दिल्ली: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा को उनके मामले में सुनवाई से अलग करने की मांग की है और एक हलफनामे में दावा किया है कि न्यायाधीश के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में शामिल वकील हैं और उन्हें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के माध्यम से काम मिलता है।

केजरीवाल ने आबकारी नीति मामले में उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ जांच एजेंसी की याचिका पर सुनवाई से न्यायमूर्ति शर्मा को हटाए जाने का अनुरोध करने संबंधी अपने आवेदन के सिलसिले में एक अतिरिक्त हलफनामा दायर किया है। आवेदन में कहा गया है कि ”इसमें हितों का सीधा टकराव” है, जिसने उनकी आशंका को ‘और बढ़ा दिया’ और यह सुनवाई से अलग करने के लिए आधार बनाता है।

उन्होंने आगे मौखिक दलीलें और प्रत्युत्तर प्रस्तुत करने के लिए समय देने का भी अनुरोध किया और आशंका व्यक्त की कि न्यायमूर्ति शर्मा के समक्ष मामले की सुनवाई जारी रहने पर कानून द्वारा अपेक्षित पूर्ण न्यायिक स्वतंत्रता और निष्पक्षता नहीं हो पाएगी। चौदह अप्रैल को दाखिल किए गए हलफनामे में कहा गया”

इस प्रकार के आपराधिक मामले में जहां अभियोजन एजेंसी सीबीआई है, जहां केंद्र सरकार के शीर्ष विधि अधिकारी मेरे खिलाफ पेश होते हैं और जहां माननीय न्यायाधीश के निकट संबंधी केंद्र सरकार के विभिन्न सक्रिय पैनलों में नियुक्त हैं तथा उसी विधिक तंत्र और विधि अधिकारियों के माध्यम से सरकारी कार्य प्राप्त करते हैं वहां आशंका प्रत्यक्ष, गंभीर और मेरे लिए नजरअंदाज करना असंभव हो जाती है।” सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध दस्तावेजों जिनमें सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी भी शामिल है, के आधार पर केजरीवाल ने आरोप लगाया कि न्यायमूर्ति शर्मा के पुत्र को पर्याप्त कानूनी कार्य आवंटित किया गया था।

हलफनामे में कहा गया, ” आरटीआई के उत्तर में बताया गया कि उक्त सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि वर्ष 2023 में माननीय न्यायाधीश के पुत्र को कुल 2,487 मामले आवंटित किए गए- 2024 में 1,784 मामले और 2025 में 1,633 मामले।” केजरीवाल ने कहा कि उन्हें ये ‘महत्वपूर्ण तथ्य’ रिक्यूज़ल आवेदन दायर करने के बाद ज्ञात हुए । उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पैनल में शामिल किया जाना केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि इसमें अदालत में पेश होना और आर्थिक लाभ प्राप्त होना शामिल है।

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