
तिरुवनंतपुरम: केरल विधानसभा में बुधवार को केंद्र की प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम-श्री) योजना को लेकर तीखी बहस हुई। सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शमसुद्दीन ने कहा कि संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार ने योजना को लागू करने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है, जबकि विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने आरोप लगाया कि राज्य में इसे लागू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
यह स्थिति भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) विधायक पी. प्रसाद के कार्य स्थगन प्रस्ताव नोटिस पर चर्चा के दौरान बनी। विधानसभा अध्यक्ष तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने प्रस्ताव की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिसके विरोध में विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया। विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के नेता शमसुद्दीन ने कहा कि सरकार ने न तो केंद्र के साथ किसी समझौते पर हस्ताक्षर किया है और न ही योजना के क्रियान्वयन के बारे में कोई निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा, ”हमने किसी एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर नहीं किया है और कोई निर्णय नहीं लिया गया है। मंत्रिमंडल की एक उपसमिति इस मुद्दे की समीक्षा कर रही है और सरकार केवल ऐसा निर्णय लेगी जो संघ परिवार के किसी भी एजेंडे के समक्ष समर्पण किए बिना केरल के हितों की रक्षा करे।”
मंत्री ने आरोप लगाया कि वह पूर्ववर्ती एलडीएफ सरकार थी जिसने राज्य के हितों से समझौता करते हुए केंद्र के साथ करार किया था। उन्होंने कहा, ”हमारे खिलाफ लगाए जा रहे आरोप उनकी दोहरी नीति को छिपाने के लिए हैं। शमसुद्दीन ने सवाल किया, ”यदि समझौते को कानूनी रूप से वापस लिया जा सकता था तो पिछली सरकार अदालत क्यों नहीं गई? आपने मुकदमा क्यों नहीं दायर किया?”
मंत्री ने यह भी दावा किया कि पूर्ववर्ती वाम सरकार के कार्यकाल में ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को केरल के उच्च शिक्षा क्षेत्र में लागू किया जा चुका था। हालांकि, विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने मंत्री के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पीएम-श्री योजना के संबंध में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के अलावा कुछ नहीं हुआ था और उनकी सरकार ने बाद में उसे स्थगित कर दिया था।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने स्वयं उच्चतम न्यायालय को सूचित किया था कि यह योजना अब तक राज्य में लागू नहीं हुई है तथा आठ मई 2026 के एक पत्र में केरल से इसे लागू करने के लिए तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया गया था। विजयन ने कहा, ”यदि पीएम-श्री पहले ही लागू हो चुकी होती तो केंद्र ऐसा अनुरोध नहीं करता।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यूडीएफ सरकार अब गुप्त रूप से योजना को लागू करने की दिशा में कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व एलडीएफ सरकार ने नीति संबंधी निर्णय के तहत केंद्र के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन को 20 दिन के भीतर स्थगित करने का फैसला किया था और आगे कोई कार्रवाई नहीं की थी।
विजयन ने कहा, ”केवल एमओयू पर हस्ताक्षर कर देने से योजना लागू नहीं हो जाती। न तो कोई निगरानी समिति गठित की गई, न स्कूलों की सूची अद्यतन की गई और न ही योजना के तहत एक भी रुपये की राशि प्राप्त हुई।” उन्होंने पीएम-श्री योजना को भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बताते हुए आरोप लगाया कि इसके माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में संघ परिवार की विचारधारा को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पीएम-श्री मुद्दे पर यूडीएफ सरकार का रवैया ”शर्मनाक समर्पण” करने जैसा है।
कार्य स्थगन प्रस्ताव लाने वाले प्रसाद ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति धर्मनिरपेक्षता और बहुलतावाद को कमजोर करती है। उन्होंने दावा किया कि पीएम-श्री ”राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की एक प्रिय परियोजना” है। उन्होंने कहा कि यह ”बेहद शर्मनाक” है कि आईयूएमएल नेता होने के बावजूद शमसुद्दीन स्पष्ट रूप से यह नहीं कह सके कि योजना को केरल में लागू नहीं किया जाएगा।
आईयूएमएल नेताओं पर कटाक्ष करते हुए प्रसाद ने कहा कि जो लोग कभी पीएम-श्री योजना को अरब सागर में फेंकने की बात करते थे, वे अब उसका बचाव करते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने यह भी दलील दी कि पूर्व सरकार द्वारा किया गया समझौता केवल सैद्धांतिक सहमति वाला एमओयू था और उसकी कोई कानूनी वैधता नहीं थी। उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों और अदालतों के फैसलों का हवाला देते हुए सरकार के इस दावे को चुनौती दी कि केरल उससे पीछे नहीं हट सकता।
शमसुद्दीन ने कहा कि इस विषय पर कार्य स्थगन प्रस्ताव की अनुमति देने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह केवल अटकलों पर आधारित है। उन्होंने दोहराया कि योजना के क्रियान्वयन के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। मंत्री के जवाब के बाद अध्यक्ष ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, जिसके विरोध में एलडीएफ सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।
पीएम-श्री (पीएम स्कूल्स फॉर राइंिजग इंडिया) केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप चयनित विद्यालयों को आदर्श संस्थानों के रूप में विकसित करना है। यह मुद्दा केरल में एक प्रमुख राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है। एलडीएफ का आरोप है कि योजना को लागू करना राष्ट्रीय शिक्षा नीति को स्वीकार करने के समान होगा, जबकि यूडीएफ सरकार का कहना है कि इस संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है और मामला विचाराधीन है।



