साइबर ठगी की 159 शिकायतों से जुड़े मामले में बैंक उपप्रबंधक गिरफ्तार

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Wed, 10 Jun 2026 03:38 PM
साइबर ठगी की 159 शिकायतों से जुड़े मामले में बैंक उपप्रबंधक गिरफ्तार
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नयी दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने एक सहकारी बैंक के उप प्रबंधक को कथित रूप से एक ‘म्यूल अकाउंट’ (कमीशन पर मिलने वाला खाता) खुलवाने और उनका संचालन करने में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को लेने और उसे इधर उधर ठिकाने लगाने में किया जाता था तथा इसके जरिए लगभग 67.92 करोड़ रुपये के लेन-देन का पता चला है। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी।

पूर्वी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) राजीव कुमार ने एक बयान में बताया कि आरोपी की पहचान पवित्र कुमार बिस्वाल (42) के तौर पर हुई है और वह पूर्वी दिल्ली में एक सहकारी बैंक की न्यू कोंडली शाखा में उपप्रबंधक के तौर पर काम कर रहा था।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज शिकायतों के विश्लेषण के दौरान यह खाता जांच के दायरे में आया। जांचकर्ताओं ने पाया कि देश के अलग-अलग हिस्सों से दर्ज साइबर धोखाधड़ी की 159 शिकायतों में यह खाता शामिल था और इसका इस्तेमाल आॅनलाइन धोखाधड़ी से हासिल किए गए पैसे को लेने और स्थानांतरित करने के लिए किया गया था।

डीसीपी के मुताबिक, मामला दर्ज किया गया और जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यह खाता “महाकाल एंटरप्राइजेज” के नाम से था और इसे कथित तौर पर शैलेंद्र कुमार यादव के नाम पर खोला गया था। हालांकि, जब यादव का पता लगाकर उनसे पूछताछ की गई तो उन्होंने खाता खोलने, बैंक शाखा जाने या खाता खोलने से जुड़े किसी भी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।

कुमार ने बताया कि जांच से यह पुष्टि हुई कि संबंधित समय के दौरान वह बैंक में मौजूद नहीं थे और खाता खोलने वाले फॉर्म पर किए गए हस्ताक्षर उनके दस्तखत से मेल नहीं खाते थे। जांचकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला कि यादव की जानकारी और पहचान-पत्रों का कथित तौर पर उनकी सहमति के बिना खाता खोलने के लिए दुरुपयोग किया गया।

अधिकारी ने बताया कि बैंक रिकॉर्ड की जांच से पता चला कि बिस्वाल ने खाता खोलने को मंजूरी दी थी। पूछताछ के दौरान, बिस्वाल ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि न तो उसने फर्म का भौतिक सत्यापन किया था और न ही खाता खोलने के दस्तावेज़ों में दिए गए पते पर वह गया था।

डीसीपी ने बताया कि बैंंिकग लेन-देन की जांच से पता चला है कि इस खाते में लगभग 67.92 करोड़ रुपये जमा किए गए और उसके ज़रिए स्थानांतरित किए गए। अधिकारियों को शक है कि बैंंिकग प्रणाली के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए ज़रूरी सुरक्षा उपायों को नज़रअंदाज़ किया गया, जिससे साइबर अपराधियों को ‘म्यूल अकाउंट’ को चलाने में कथित तौर पर मदद मिली।

पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर बिस्वाल को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए।
इस बड़े साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लाभार्थियों, मदद करने वालों, बैंक खातों और व्यक्तियों की पहचान करने के लिए आगे की जांच जारी है।

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