चुनावों के बहिष्कार का सवाल नहीं, भाजपा और निर्वाचन आयोग दोनों एक ही टीम में: रमेश

नयी दिल्ली: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बृहस्पतिवार को किसी भी सूरत में चुनावों के बहिष्कार की संभावना को खारिज किया और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस चुनावी मैदान में केवल अपनी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से नहीं, बल्कि निर्वाचन आयोग से भी मुकाबला कर रही है।

रमेश ने ‘पीटीआई वीडियो’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में क्रिकेट की उपमा देते हुए कहा, “हम दूसरी टीम (भाजपा) और अंपायर (निर्वाचन आयोग) दोनों के खिलाफ खेल रहे हैं, क्योंकि अंपायर तटस्थ नहीं है और विरोधी टीम का हिस्सा बन गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को अपनी लड़ाई जारी रखनी चाहिए और जनता से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहना चाहिए।

यह पूछे जाने पर कि 2029 का चुनावी परिदृश्य विपक्ष के लिए कैसा दिखता है और वह आयोग की तटस्थता को लेकर जिन सवालों को उठा रहा है, उनसे विपक्ष कैसे निपटेगा, तो रमेश ने कहा, ” क्रिकेट मैच में दो टीमें एक-दूसरे के खिलाफ खेलती हैं। यहां हम दूसरी टीम और अंपायर, दोनों के खिलाफ खेल रहे हैं। अंपायर विपक्षी टीम का हिस्सा है। आप क्या कर सकते हैं? मुख्य अंपायर और स्क्वायर लेग अंपायर, दोनों विपक्षी टीम का हिस्सा हैं।”

उन्होंने कहा, ”हां, यह कठिन स्थिति है। हमें चुनाव लड़ना है। चुनावों का बहिष्कार हमारे एजेंडे में नहीं है। मुझे नहीं लगता कि कोई भी चुनावों का बहिष्कार करेगा। हमें चुनाव लड़ना होगा। हमें सरकार को बेनकाब करना जारी रखना होगा… अदालतों का दरवाजा खटखटाना होगा। कभी-कभी अदालतें मदद करती हैं, कभी-कभी वे मदद करने के लिए पर्याप्त साहस नहीं दिखातीं।”

रमेश ने कहा, ”यह लंबा संघर्ष होने वाला है… सफलता का कोई तात्कालिक मंत्र नहीं है। हमें लड़ते रहना होगा। हमें ये मुद्दे उठाते रहना होगा और मैं अब लोगों को सवाल उठाते हुए देख रहा हूं।” उन्होंने कहा कि 12 साल पहले किसी न किसी कारण मोदी सरकार को समर्थन देने वाले तबके भी अब उस पर सवाल उठाने लगे हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा, ”वर्तमान शासन के खिलाफ हास्य, व्यंग्य और चुटकुले बनाए जा रहे हैं। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि लोग अब डरे हुए नहीं हैं।” उन्होंने कहा, ”मुझे लगता है कि पहले भय और डराने-धमकाने का माहौल था, लेकिन अब लोग बोलने लगे हैं और अर्थव्यवस्था की समस्याएं सामने आ रही हैं।”

रमेश ने कहा कि लोग अब सरकार से कठिन सवाल पूछने लगे हैं और यही एक चीज है, ”जिस पर हम भरोसा कर सकते हैं। इसके अलावा हमें वही करते रहना होगा, जो हमें करना है।”उन्होंने परिसीमन की कवायद को लेकर भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाया। रमेश ने कहा, ”आपने सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच ‘जुगलबंदी’ देखी है। निर्वाचन आयोग वही करता है, जो गृह मंत्री (अमित शाह) चाहते हैं। क्या आप ऐसे निर्वाचन आयोग से परिसीमन कराएंगे, जिस पर बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में बड़ा दाग लगा है?”

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब कुछ दिन पहले उन्होंने मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने की पैरवी की थी। साक्षात्कार के दौरान रमेश ने यह भी याद किया कि वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने किस तरह प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद वापसी की थी।
उन्होंने कहा, ”2004 में किसी को उम्मीद नहीं थी कि कांग्रेस जीतेगी। ‘भारत उदय’ का माहौल बनाया गया था और अटल बिहारी वाजपेयी एक मजबूत और करिश्माई नेता थे। इसके बावजूद कांग्रेस ने सभी बाधाओं को पार करते हुए चमत्कार किया।” रमेश ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की भी कठिन समय में पार्टी को संभालने के लिए सराहना की।

उन्होंने कहा, ”सोनिया गांधी अप्रैल 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष बनीं और उन्होंने चुनौतीपूर्ण दौर में पार्टी को एकजुट बनाए रखा।” उन्होंने कहा कि 1999 से 2004 तक सोनिया गांधी विपक्ष की नेता रहीं और विपक्षी दलों को एकजुट करने में उनकी केंद्रीय भूमिका रही। रमेश ने कहा कि उनके प्रयासों से संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन अस्तित्व में आया था।

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