कैसे महज तीन मिनट में पलट गई नाव? वियतनाम हादसे से लौटे भारतीय ने सुनाई दास्तान

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Tue, 14 Jul 2026 12:57 PM
कैसे महज तीन मिनट में पलट गई नाव? वियतनाम हादसे से लौटे भारतीय ने सुनाई दास्तान
ऑडियो सुनें

वियतनाम: 11 जुलाई को फू क्वोक द्वीप के पास होन मे रुत नगोआई क्षेत्र के निकट 32 भारतीय पर्यटकों और चार स्थानीय चालक दल के सदस्यों को लेकर जा रही एक स्पीडबोट पलट गई थी। इस भीषण हादसे में 15 भारतीय पर्यटकों की मौत हो गई। 16 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया और इलाज के बाद उन्हें भारत भेज दिया गया, जबकि एक घायल अब भी फू क्वोक के अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती है। मृतकों में 10 लोग तमिलनाडु, तीन आंध्र प्रदेश और दो केरल के रहने वाले थे। इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं।

कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
दिंडीगुल जिले के पलानी निवासी निर्मल कुमार ने चेन्नई पहुंचने के बाद उस भयावह हादसे का आंखों देखा हाल सुनाया। निर्मल ने बताया कि वह अपने साथियों के साथ 8 जुलाई को वियतनाम घूमने गए थे। 11 जुलाई को यात्रा के अंतिम चरण में सभी लोग एक बड़े बंद स्पीडबोट से एक द्वीप से दूसरे द्वीप जा रहे थे। तभी अचानक एक बेहद ऊंची और तेज लहर नाव से टकराई। पहले नाव हल्की सी एक ओर झुकी, फिर बाईं तरफ बैठे यात्री दाईं ओर गिर पड़े। इससे नाव का पूरा संतुलन बिगड़ गया और वह देखते ही देखते उलट गई।

कौन बच गया और कौन फंस गया?
उन्होंने बताया कि नाव के चालक और गाइड सबसे पहले पानी में कूद गए। उन्हें देखकर वह और करीब 20 अन्य यात्री भी तुरंत पानी में कूद गए और अपनी जान बचाने में सफल रहे। लेकिन नाव के पिछले हिस्से में बैठे यात्रियों की किस्मत इतनी अच्छी नहीं थी। नाव पूरी तरह बंद थी। करीब 15 लोग उसके अंदर फंस गए। उन्होंने लाइफ जैकेट पहन रखी थी, लेकिन उलटी नाव उनके ऊपर आ गई, जिससे वे बाहर नहीं निकल सके।”

बचाव अभियान में कितनी देर लगी?
निर्मल कुमार ने बताया कि हादसे के करीब 10 मिनट के भीतर राहत और बचाव दल मौके पर पहुंच गया। पानी में तैर रहे लोगों को तुरंत बाहर निकाल लिया गया, लेकिन नाव के नीचे फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें बाहर निकालने में 20 से 30 मिनट का समय लग गया। इस हादसे में निर्मल कुमार ने अपने बचपन के दोस्त मुरुगा प्रभु को हमेशा के लिए खो दिया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि मैं वियतनाम तब तक नहीं लौटा, जब तक मेरे दोस्त का शव बरामद नहीं हो गया और उससे जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो गईं।

क्या समय पर इलाज मिलता तो और जानें बच सकती थीं?
निर्मल कुमार ने बताया कि उनके साथ यात्रा कर रहे एक डॉक्टर का मानना था कि यदि घटनास्थल पर तत्काल जरूरी दवाइयां और प्राथमिक चिकित्सा की पर्याप्त व्यवस्था होती तो चार से पांच लोगों की जान और बचाई जा सकती थी। हम यह बात वियतनाम सरकार के सामने भी रख रहे हैं।”

तमिलनाडु के किन-किन जिलों के लोग थे मृतकों में?
कुल 36 लोगों (32 यात्री और चार चालक दल के सदस्य) में बड़ी संख्या तमिलनाडु के लोगों की थी। निर्मल कुमार ने बताया कि राज्य के 10 लोगों की इस हादसे में मौत हुई। इनमें चार चेन्नई, तीन तिरुचिरापल्ली तथा एक-एक व्यक्ति सलेम, इरोड और तिरुप्पुर जिले का रहने वाला था।

शव भारत कब पहुंचे?
मृतकों के पार्थिव शरीर 13 जुलाई की रात करीब 9:30 बजे मुंबई पहुंचे। मंगलवार सुबह उन्हें विमान से चेन्नई और कोयंबटूर लाया जाएगा। राज्य सरकार ने पार्थिव शरीरों को उनके परिजनों तक सम्मानपूर्वक पहुंचाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं।

सरकार से क्या अपील की गई?
निर्मल कुमार ने भारतीय दूतावास और वियतनाम सरकार द्वारा चौबीसों घंटे किए गए समन्वय और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि विदेश की धरती पर यह एक अप्रत्याशित और बेहद दुखद हादसा था। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, वे गहरे सदमे में हैं। यदि सरकार उनकी मदद के लिए राहत पैकेज की घोषणा करे तो उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।

 

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By Nandkishoryadav