
नयी दिल्ली: नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के मुद्दे पर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक सोमवार को दो बार के स्थगन के बाद अपराह्न तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे बैठक शुरू होने पर उपसभापति हरिवंश ने राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा शुरू कराने का प्रयास किए। यह विधेयक उच्च सदन में शुक्रवार को पेश किया गया था, जिसके प्रावधानों के तहत राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन के दौरान किसी भी तरह का व्यवधान डालना या उसका अपमान आपराधिक कृत्य माना जायेगा और इसके लिए तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है।
इस विधेयक के तहत 1971 के मूल अधिनियम में संशोधन का प्रावधान किया गया है। हरिवंश ने इस विधेयक पर चर्चा शुरू करानी चाही। इसी दौरान कांग्रेस के प्रमोद तिवारी, माकपा के जॉन ब्रिटॉस और द्रमुक सदस्य तिरुचि शिवा ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया। लेकिन उपसभापति ने कहा कि व्यवस्था का प्रश्न विधेयक से संबंधित ही होना चाहिए।
उन्होंने गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से विधेयक पर चर्चा शुरू करने से पहले विधेयक के बारे में बोलने को कहा। इसी दौरान हंगामा तेज हो गया। कुछ सदस्य अपने स्थानों से उठ कर आगे आ गए। हरिवंश ने कहा कि मॉनसून सत्र शुरू हुए एक सप्ताह हो चुका है और अब तक कोई कामकाज नहीं हो पाया है। उन्होंने सदस्यों से शांत रहने, अपने स्थानों पर लौट जाने और विधेयक पर चर्चा शुरू करने की अपील की।
अपनी बात का असर न होते देख हरिवंश ने बैठक अपराह्न तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले, पूर्वाह्न 11 बजे बैठक शुरू होने पर सभापति ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके बाद उन्होंने सदस्यों से शून्यकाल के तहत लोक महत्व के मुद्दे उठाने के लिए कहा।
इसी बीच विपक्षी सदस्यों ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर पिछले सप्ताह दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा उठाया। सभापति से अनुमति मिलने पर विपक्ष के नेता एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि उन्होंने नियम 267 के तहत एक नोटिस दिया है।
सभापति ने कहा कि वह नियम 267 के बारे में व्यवस्था दे चुके हैं। राधाकृष्णन ने अपने पूर्व के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि नियम 267 के तहत केवल दिन की कार्यसूची में शामिल विषयों पर ही चर्चा कराई जा सकती है और वह भी ”विरलतम परिस्थितियों” में तथा सदन की सहमति से।
उन्होंने खरगे से कहा, ”मुझे नियमों के अनुसार चलना है या नियम तोड़ने हैं, आप ही बताइए।” खरगे ने कहा कि अतीत में महत्वपूर्ण अवसरों पर नियम 267 के तहत दिए गए नोटिस स्वीकार किए गए हैं। राधाकृष्णन ने जवाब दिया, ”केवल विरलतम परिस्थितियों में ही यह संभव है।” खरगे ने कहा कि वह जो मुद्दा उठाने जा रहे हैं वह अत्यंत दुर्लभ ही है। उन्होंने कहा कि छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई ऐसा ही मामला है।
इस पर सभापति ने कहा, ”असाधारण परिस्थिति होने के साथ इस पर पूरे सदन की सहमति भी होनी चाहिए… वह नहीं है, मैं क्या करूं।” खरगे ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा उठाना चाहा। उन्होंने आरोप लगाया कि इन छात्रों के खिलाफ पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया।
उन्होंने कहा, ”भारत के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि लड़कों को पीटा गया… और उन्हें पैलेट से निशाना बनाया गया।” सभापति ने उनसे कहा कि वह शून्यकाल चलने दें। इस पर विरोध जताते हुए विपक्षी सदस्य हंगामा करने लगे। सभापति ने सदस्यों से शांत रहने और शून्यकाल चलने देने की अपील की, लेकिन सदन में व्यवस्था बनते न देख उन्होंने बैठक दोपहर बारह बजे तक स्थगित कर दी।
दोपहर 12 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी सांसदों ने एक बार फिर छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया, ”निर्दोष छात्रों को पीटा गया, लाठियां चलाई गईं, लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया…।” उन्होंने मांग की कि गृह मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर सदन में बयान दें।
विपक्षी सांसद गृह मंत्री को सदन में बुलाने की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे। द्रमुक सदस्य तिरुचि शिवा ने कहा कि उनकी पार्टी ने नीट परीक्षा पर रोक लगाने की मांग करते हुए नोटिस दिया है। उन्होंने कहा कि ”हर परंपरा में अपवाद की गुंजाइश होती है।” उन्होंने कहा, ”इतने सारे छात्रों ने आत्महत्या कर ली है।
सरकार बहुत कुछ कर सकती है, लेकिन उनकी ंिजदगी वापस नहीं लौटा सकती।” शिवा ने कहा कि उन्होंने भी नीट के मुद्दे पर नियम 267 के तहत नोटिस दिया है। उन्होंने कहा कि नियम 267 के तहत दिए जा रहे नोटिस लंबे समय से स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं।
नियम 267 के तहत सदन में सूचीबद्ध सभी काम रोककर किसी विषय पर चर्चा करायी जाती है। माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि संसद जनता का प्रतिनिधित्व करती है और भारत लोकतंत्र की जननी है। उन्होंने कहा, ”देश के बच्चों का खून बहा है। लोकतंत्र की जननी की राजधानी इस देश के निर्दोष बच्चों के खून से रंग गई है।” भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पी संदोष कुमार ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस के बल प्रयोग का मुद्दा उठाना
चाहा। सत्ता पक्ष के सदस्य इस पर विरोध जता रहे थे वहीं विपक्ष सदस्य सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। हंगामे के कारण सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ और नीट प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण पिछले सप्ताह एक भी दिन सदन में शून्यकाल और प्रश्नकाल नहीं हो पाए। नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर सत्र के दौरान राज्यसभा में लगातार व्यवधान देखने को मिल रहा है।



