राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: आरोपियों के वकील ने पुलिस की धाराओं पर उठाए सवाल

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Fri, 31 Jul 2026 03:51 PM
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: आरोपियों के वकील ने पुलिस की धाराओं पर उठाए सवाल
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अयोध्या: राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में आरोपियों के अधिवक्ता ने पुलिस पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गलत धाराओं के तहत जांच करने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को कहा कि वह जल्द ही अदालत में याचिका दायर कर पुलिस को ”उपयुक्त धाराओं” के तहत जांच करने और उसी के अनुरूप आरोपपत्र दाखिल करने का निर्देश देने का अनुरोध करेंगे।

फैजाबाद बार एसोसिएशन द्वारा इस मामले में आरोपियों की पैरवी नहीं करने का निर्णय लिए जाने के बाद राज्य सरकार की ओर से विधिक सहायता के लिए नियुक्त अधिवक्ता कुलशेखर ंिसह ने कहा कि वह पुलिस द्वारा लगाई गई कई धाराओं को न्यायालय में चुनौती देंगे।

ंिसह ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “मैं शीघ्र ही अदालत का दरवाजा खटखटाऊंगा और यह आग्रह करूंगा कि पुलिस इस मामले की जांच सही धाराओं के तहत करे तथा उसी के अनुरूप आरोपपत्र दाखिल किया जाए।” उन्होंने दलील दी कि पुलिस ने एक ही मामले में चोरी और आपराधिक विश्वासघात या गबन से संबंधित धाराएं एक साथ लगाई हैं, जबकि उनके अनुसार दोनों प्रावधान एक साथ लागू नहीं किए जा सकते।

ंिसह ने कहा, “पुलिस ने चोरी और गबन दोनों की धाराएं लगाई हैं। ये दोनों धाराएं एक साथ नहीं लग सकतीं। इसके अलावा एक ऐसी धारा भी लगाई गई है, जिसमें आजीवन कारावास का प्रावधान है।” उन्होंने कहा कि आरोपियों का यह पहला आपराधिक मामला है और आजीवन कारावास का प्रावधान वाली धारा इस मामले में अनुचित ढंग से लगाई गई है।

अधिवक्ता ने पुलिस द्वारा आरोपियों को लोक सेवक मानने और उन पर सार्वजनिक संपत्ति के गबन का आरोप लगाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “राम मंदिर न्यास कोई लोक प्राधिकरण नहीं है, इसलिए आरोपियों को लोक सेवक नहीं माना जा सकता। यदि उचित धाराएं लगाई गई होतीं तो मेरे मुवक्किलों को स्थानीय अदालत से जमानत मिल सकती थी।”

जमानत याचिका दाखिल करने के संबंध में पूछे जाने पर ंिसह ने कहा कि वह अगले सप्ताह इस प्रक्रिया पर काम शुरू करेंगे, हालांकि उन्होंने याचिका दायर करने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने पहले एक प्रस्ताव पारित कर अपने सदस्यों से राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के आरोपियों की पैरवी नहीं करने का निर्णय लिया था।

एसोसिएशन ने यह भी कहा था कि यदि कोई सदस्य आरोपियों की पैरवी करता है तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है और उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है। कुलशेखर ंिसह ने स्पष्ट किया कि वह फैजाबाद बार एसोसिएशन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए आरोपियों की पैरवी करने के लिए स्वतंत्र हैं।

इस मामले के आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं। राज्य सरकार ने जुलाई के दूसरे सप्ताह में कुलशेखर ंिसह को विधिक सहायता एवं बचाव अधिवक्ता नियुक्त किया था। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान आरोपी लवकुश मिश्रा के पास से 14.25 लाख रुपये बरामद किए गए हैं।

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