मंदिर के सामने डीजे बजाने के विवाद से कैसे नेपाल में भड़की सांप्रदायिक हिंसा, भारत में क्यों चिंता?

नेपाल : नेपाल में बीते तीन दिन से हालात तनावपूर्ण हैं। दरअसल, नेपाल के सुंसारी जिले में 27 जुलाई को सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। तीन दिन में ये तनाव चार अलग-अलग जिलों तक पहुंच गया है। भारतीय सीमा के करीब के नेपाली शहरों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब हुई है। अब इस सांप्रदायिक हिंसा पर न सिर्फ नेपाल, बल्कि भारत में भी चिंता जताई जा रही है।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर नेपाल में यह सांप्रदायिक हिंसा अचानक कैसे भड़क गई? तनाव भड़कने की वजह क्या रही? कैसे यह तनाव एक के बाद एक शहरों तक पहुंच गया? नेपाल सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए क्या किया है? सियासी दलों ने इस हिंसा पर क्या कहा है? भारत पर नेपाल के इस तनाव का क्या असर पड़ सकता है?

नेपाल में कैसे अचानक भड़क उठी हिंसा?

नेपाल के सुनसारी जिले के देवानगंज में हुई हालिया सांप्रदायिक हिंसा का तात्कालिक कारण एक स्थानीय विवाद रहा। हालांकि, पूरी घटना अचानक नहीं भड़की, बल्कि इसकी वजह लंबे समय से पनप रहा धार्मिक अलगाव रहा।

  • 26 जुलाई को कप्तानगंज क्षेत्र में कुछ लोगों ने बिजली के खंभे पर लगे मुस्लिम समुदाय के एक झंडे को हटाकर उसकी जगह हिंदू झंडा लगा दिया। इससे क्षेत्र में तनाव पहले से ही बना हुआ था।
  • इसके बाद रात को कप्तानगंज में एक मंदिर के बाहर तेज आवाज में बज रहे डीजे सिस्टम को लेकर विवाद शुरू हुआ। शुरुआत में दो पक्षों के बीच बहस हुई और देखते ही देखते यह पथराव में बदल गई।
  • इसके बाद जब स्थानीय पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) ने बढ़ती भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोलियां चलाईं, तो उसमें ओम प्रकाश मेहता नाम के 24 वर्षीय युवक की मौत हो गई।
  • इस मौत के बाद हिंसा और भड़क गई और इससे पूरा जिला प्रभावित हुआ। प्रशासन को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई इलाकों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाना पड़ा।

सांप्रदायिक हिंसा में अब तक कितनी जानें गईं, कितने घायल?

इस सांप्रदायिक हिंसा और उससे जुड़ी घटनाओं में अब तक दो लोगों की जान गई है और लगभग 22 से 24 लोग घायल हुए हैं।

कहां-कैसे हुईं मौतें?

  • सुनसारी जिले के कप्तानगंज (देवानगंज) में हुई हिंसा के दौरान भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों की ओर से फायरिंग के बाद गोली लगने से 24 वर्षीय ओम प्रकाश मेहता की मौत हो गई।
  • इसके बाद, जब यह अशांति पड़ोसी सिरहा जिले के गोलबाजार में फैली, तो वहां भी भड़के उपद्रव और कर्फ्यू के बीच एक अन्य व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

अब तक कितने घायल?
देवानगंज की घटना में अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 22 से 24 लोग घायल हुए हैं। इन घायलों में सुरक्षाकर्मी और स्थानीय नागरिक दोनों शामिल हैं। नेपाल पुलिस के 10 जवान, सशस्त्र पुलिस बल के पांच जवान और नौ स्थानीय नागरिक घायल हुए हैं।

कैसे एक के बाद दूसरे जिलों में फैलती गई हिंसा?

नेपाल में यह सांप्रदायिक हिंसा कोशी प्रांत के सुनसरी जिले के एक छोटे से इलाके से शुरू होकर देखते ही देखते पड़ोसी जिलों और मधेस प्रांत तक फैल गई।

1. सुनसारी जिले में शुरुआत और फिर बढ़ा तनाव 
पुलिस गोलीबारी में युवक की मौत के बाद स्थितियां बेकाबू हो गईं। प्रशासन ने स्थिति संभालने के लिए शुरुआत में कर्फ्यू लगाया, लेकिन सोमवार सुबह तक यह अशांति इनरुवा और उसके आसपास के इलाकों में फैल गई। गुस्साई भीड़ ने कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए सड़कों पर उतरकर आगजनी की, टायर जलाए और दुकानों में जमकर तोड़फोड़ की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन को नेपाली सेना और बख्तरबंद वाहनों को तैनात करना पड़ा। तनाव को देखते हुए प्रशासन ने जिले में कर्फ्यू का दायरा बढ़ाकर पूर्व-पश्चिम राजमार्ग, इटहरी, इनरुवा, दुहबी सहित कई अन्य नगर पालिकाओं तक कर दिया।

2. सिराहा जिले में हुई आगजनी और हत्या की घटना
सुनसारी के बाद यह हिंसा पड़ोसी मधेस प्रांत के सिराहा जिले तक पहुंच गई। गुरुवार को सिराहा में प्रदर्शन जबरदस्त रूप से उग्र हो गए। गोलबाजार इलाके में उपद्रवियों ने एबी मॉल नाम के एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में आग लगा दी, जिसके बाद पुलिस बल तैनात किया गया और वहां अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाना पड़ा। इसी दौरान गोलबाजार में भड़के इन संघर्षों के बीच एक और व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के कारण प्रशासन ने सिराहा के लहान क्षेत्र में भी अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया।

3. धनुषा जिले में हिंसा के बीच कर्फ्यू
सिराहा के साथ-साथ मधेस प्रांत के ही धनुषा जिले में भी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। एहतियात के तौर पर और हिंसा को फैलने से रोकने के लिए प्रशासन ने धनुषा के कई प्रमुख इलाकों, जिनमें जनकपुर, लक्ष्मिनिया हाटबाजार, बेलौनी रोड, नगरैन नगर पालिका और दूधमती पुल शामिल हैं, वहां अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया है। इस तरह, केवल एक लाउडस्पीकर और झंडे के विवाद से शुरू हुई यह घटना ने पूरे कोशी और मधेस प्रांत की सुरक्षा स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

नेपाल में बदलती धार्मिक जनसांख्यिकी कैसे बनी तनाव की वजह?

नेपाल के तराई क्षेत्र, खासकर कोशी और मधेस बेल्ट में बदलती धार्मिक जनसांख्यिकी और समुदायों की बसावट तनाव की एक प्रमुख वजह मानी जा रही है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर नेपाल में मुस्लिम आबादी सिर्फ पांच फीसदी से थोड़ी ज्यादा है, लेकिन मधेस प्रांत में यह लगभग 13% और लुंबिनी प्रांत में सात प्रतिशत है। सुनसारी, धनुषा, रौतहट, परसा और सर्लाही जैसे तराई के जिले इसी उच्च-घनत्व वाले बेल्ट में आते हैं।

हिंसा के केंद्र रहे देवानगंज के कप्तानगंज जैसे इलाकों में, मुस्लिम आबादी अपने हिंदू पड़ोसियों, जैसे कुशवाहा और यादव समुदाय के साथ बहुत करीब से रहती है। वे एक ही बाजार, स्कूल और त्योहार साझा करते हैं। समुदायों के बीच इसी रोजमर्रा की करीबी की वजह से झंडे या लाउडस्पीकर जैसे छोटे विवाद भी कुछ ही घंटों में एक बड़े सुरक्षा संकट में बदल जाते हैं, जिसे घनी बसावट वाले इलाकों में शांत कराना भी सुरक्षाबलों के लिए मुश्किल हो जाता है।

नेपाल के न्यूज पोर्टल- नेपाल न्यूज के मुताबिक, हिंदू-मुस्लिम आबादी की इस मिश्रित बनावट का इस्तेमाल अब भविष्य के चुनावों के लिए ‘वोट-बैंक’ की गणना में किया जा रहा है। धार्मिक संगठन खुद को ऐसे गुटों के रूप में स्थापित कर रहे हैं, जिनके समर्थन से चुनाव जीते जा सकते हैं। इससे नेपाल में राजनीतिक स्वार्थों को बढ़ावा मिलता है और नेता तनाव खत्म करने के बजाय उसे बनाए रखने पर जोर देते हैं।

सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) और पुलिस के स्पेशल ब्यूरो ने तीन साल पहले ही सरकार को गोपनीय रिपोर्ट सौंपकर चेतावनी दी थी कि तराई क्षेत्र में धार्मिक और जातीय विभाजन भड़काने के संगठित प्रयास किए जा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार को राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप करना चाहिए, लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने इन चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया। एपीएफ की जांच में पाया गया कि कुछ चरमपंथी समूह जानबूझकर ऐसे छोटे विवादों, जैसे सड़क रोकना, दीवार बनाना या लाउडस्पीकर की आवाज की तलाश में रहते हैं, ताकि उन्हें धार्मिक रंग देकर सांप्रदायिक तनाव भड़काया जा सके।

नेपाल में इस सांप्रदायिक हिंसा पर किस तरह हो रही राजनीति?

नेपाल के कोशी और मधेस प्रांत में भड़की इस सांप्रदायिक हिंसा ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद और ध्रुवीकरण का रूप ले लिया है।

1. ध्रुवीकरण के आरोप
संसद में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) की सांसद समीना मिया ने भी सीधा आरोप लगाया है कि राजनीतिक फायदे और महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए जानबूझकर शांति से रहने वाले समुदायों को आपस में लड़ाया जा रहा है।

2. प्रधानमंत्री-गृह मंत्री पर विपक्ष के तीखे हमले
संसद में विपक्षी दलों ने सरकार के संकट प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल (प्रचंड), नेपाली कांग्रेस की बसना थापा और सीपीएन-यूएमएल की पद्मा अर्याल ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह और गृह मंत्री सुदान गुरुंग की कड़ी आलोचना की। विपक्ष ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि देश के इतने संवेदनशील हालात में भी पीएम और गृह मंत्री दोनों सर्वदलीय बैठक में गैरमौजूद रहे। उन्होंने संसद में आकर जवाब देना भी जरूरी नहीं समझा। नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि जो प्रधानमंत्री पहले छोटी घटनाओं पर संसद में आंसू बहाते थे, वे अब एक नागरिक की मौत पर पूरी तरह चुप हैं और अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं।

3. पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग पर राजनीतिक बहस
देवानगंज में शांति बहाल करने के तरीके पर भी राजनीति गरमाई हुई है। आरएसपी सांसद लाल बिक्रम थापा और एनसीपी नेता पुष्प कमल दहल ने सवाल उठाया कि पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस जैसे गैर-घातक विकल्पों का इस्तेमाल किए बिना सीधे गोलियां क्यों चलाईं। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) की नेता खुश्बू ओली ने खुफिया तंत्र की नाकामी की ओर इशारा करते हुए एक निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच आयोग बनाने की मांग की है।

4. पूर्व राजा की प्रतिक्रिया
वर्तमान राजनीतिक दलों के बीच चल रहे इस भारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच, नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र बीर बिक्रम शाह ने भी स्थिति पर चिंता जताते हुए एक बयान जारी किया। उन्होंने कोशी और मधेस प्रांतों में हो रहे इस सांप्रदायिक टकराव पर दुख जताते हुए नेपालियों से अपील की है कि वे अपनी बहु-सांस्कृतिक और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की पुरानी परंपरा को नष्ट न होने दें।

कैसे भारत पर पड़ सकता है पड़ोसी देश के सीमाई क्षेत्र पर तनाव का असर?

चूंकि नेपाल का यह अशांत क्षेत्र भारत और खासकर बिहार की सीमा से बिल्कुल सटा हुआ है, इसलिए दोनों देशों के बीच सीमावर्ती गतिविधियों, द्विपक्षीय व्यापार और सुरक्षा पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।

  • नेपाल का सुनसारी जिला भारत के बिहार राज्य की सीमा से सटा है और यह दोनों देशों के बीच एक बहुत ही अहम व्यापारिक कॉरिडोर है। हिंसा भड़कने के बाद यहां अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया गया है, जिसकी वजह से लोगों की आवाजाही, व्यापारिक गतिविधियों और यातायात पर पूरी तरह से रोक लग गई है।
  • इस तराई बेल्ट, जैसे सुनसारी, धनुषा, रौतहट आदि में रहने वाले कई नेपाली परिवारों के भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश में पीढ़ियों पुराने व्यापारिक, पारिवारिक और वैवाहिक रिश्ते हैं। आम दिनों में लोग रोजमर्रा की खरीदारी और रिश्तेदारों से मिलने के लिए नियमित रूप से सीमा पार करते हैं। कर्फ्यू और तनाव के कारण सीमा के दोनों ओर बसे इन समुदायों का संपर्क और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

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