‘मैं 62 साल का हूं’: तरुण तेजपाल ने कोर्ट से मांगी नरमी, कहा- खुद को पीड़ित मानता हूं; सरकार ने क्या रखी मांग?

पणजी: वर्ष 2013 के चर्चित दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ से सजा में नरमी बरतने की अपील की। अदालत में उन्होंने कहा कि वह 62 वर्ष के हैं और खुद को इस मामले में पीड़ित मानते हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने गुरुवार को गोवा सरकार की अपील स्वीकार करते हुए 2021 में सत्र अदालत द्वारा दिए गए बरी करने के फैसले को रद्द कर दिया और तेजपाल को दुष्कर्म व यौन उत्पीड़न के आरोपों में दोषी ठहराया।

 

कोर्ट में क्या बोले तरुण तेजपाल?
सजा पर सुनवाई के दौरान तरुण तेजपाल ने अदालत से कहा, ‘मैं 62 साल का हूं और मुझे लगता है कि मैं खुद इस मामले का पीड़ित हूं। मेरी पत्नी है। इसके अलावा मेरे पास कहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। हम इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे। कृपया मेरे प्रति नरमी बरतें। बाकी सभी तथ्य रिकॉर्ड पर मौजूद हैं’। इससे पहले उनके वकील ने अदालत को बताया कि तेजपाल के खिलाफ इस मामले के अलावा कोई अन्य एफआईआर, शिकायत या खराब आचरण का रिकॉर्ड नहीं है।

 

गोवा सरकार ने मांगी अधिकतम सजा
गोवा सरकार की ओर से अदालत में पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेजपाल के लिए अधिकतम सजा की मांग की। उन्होंने कहा कि पीड़िता ने साफ तौर पर मना किया था, लेकिन इसके बावजूद तेजपाल नहीं रुके। तुषार मेहता ने अदालत से कहा, ‘जब कोई लड़की ‘ना’ कहती है, तो उसका मतलब ‘ना’ ही होता है। यह बात समाज तक स्पष्ट रूप से पहुंचनी चाहिए। पीड़िता उनकी बेटी की उम्र की थी। वह उसके लिए पिता समान स्थिति में थे, लेकिन उन्होंने अपने पद और भरोसे का दुरुपयोग किया’। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला समाज के लिए एक उदाहरण बनने वाला है और अदालत को ऐसा फैसला देना चाहिए, जिससे महिलाओं की सुरक्षा और सहमति के अधिकार का स्पष्ट संदेश जाए।

‘जांच चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन सभी सबूत अदालत के सामने रखे’
गोवा पुलिस की वरिष्ठ अधिकारी और मामले की पूर्व जांच अधिकारी सुनीता सावंत ने कहा कि इस मामले की जांच आसान नहीं थी। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान जो भी तथ्य और सबूत सामने आए, उन्हें पूरी ईमानदारी से अदालत के सामने पेश किया गया। उन्होंने कहा, ‘ट्रायल कोर्ट सबूतों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं कर सका। हाईकोर्ट ने उन कमियों को देखा और इसी आधार पर बरी करने का फैसला रद्द कर दिया।”

एडवोकेट जनरल बोले- आखिरकार पीड़िता को मिला न्याय
गोवा के एडवोकेट जनरल देविदास पंगम ने भी हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला सबूतों और न्याय के आधार पर दिया गया है और इससे पीड़िता को आखिरकार न्याय मिला है। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद मजबूत सबूतों के बावजूद तेजपाल को बरी कर दिया था। इतना ही नहीं, फैसले में पीड़िता के चरित्र पर भी सवाल उठाए गए, जबकि उसके साथ आरोपी जैसा व्यवहार किया गया। पंगम ने कहा, ‘आज हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि ट्रायल कोर्ट का फैसला गलत था। रिकॉर्ड पर इतने सबूत मौजूद थे कि आरोप संदेह से परे साबित होते थे। इसके बावजूद आरोपी को बरी कर दिया गया था’।

माफी वाले ईमेल का भी किया जिक्र
एडवोकेट जनरल ने कहा कि मामले में ऐसे पत्र और दो ईमेल भी मौजूद थे, जिनमें तरुण तेजपाल ने माफी मांगी थी। इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से यह साबित हो गया कि सबूतों का सही मूल्यांकन किया गया और पीड़िता को न्याय मिला। उन्होंने जांच टीम, अभियोजन पक्ष और गोवा सरकार की ओर से पैरवी कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की भी सराहना की।

 

क्या है पूरा मामला?
यह मामला नवंबर 2013 का है। तहलका की एक जूनियर महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था कि गोवा में आयोजित थिंकफेस्ट कार्यक्रम के दौरान 7 और 8 नवंबर को होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने दो बार उसका यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म किया। इन आरोपों के बाद 30 नवंबर 2013 को तेजपाल को गिरफ्तार किया गया था। 2017 में उनके खिलाफ दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न और गलत तरीके से रोकने समेत कई धाराओं में आरोप तय किए गए। हालांकि उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया।

 

पहले बरी हुए, अब हाईकोर्ट ने पलटा फैसला
मई 2021 में गोवा की सत्र अदालत ने सबूतों को पर्याप्त न मानते हुए तेजपाल को बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने अब निचली अदालत का फैसला रद्द करते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया है। अदालत जल्द ही उनकी सजा पर अंतिम फैसला सुनाएगी।

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