नीतिगत सुधारों से कोयला ब्लॉक के संचालन में आई तेजी: कोयला मंत्रालय

नयी दिल्ली: कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा है कि भारत के कोयला क्षेत्र में हालिया नीतिगत सुधारों से खुद के इस्तेमाल वाली यानी कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों के संचालन की प्रक्रिया सुगम हुई है। इससे पूरी तरह और आंशिक रूप से खोजे गए कोयला ब्लॉक को चालू करने में लगने वाला समय कम हुआ है।

दत्त ने कहा कि सरकार के नीतिगत सुधारों के कारण पूरी तरह खोजे गए कोयला ब्लॉक के संचालन की समयसीमा 11 महीने और आंशिक रूप से खोजे गए ब्लॉक की समयसीमा 14 महीने कम हुई है। उन्होंने कहा कि संचालन शुरू करने की समयसीमा में कमी से नियामकीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में लगने वाला समय काफी घटा है, जिससे खदानों का विकास तेजी से हो रहा है और वाणिज्यिक उत्पादन जल्द शुरू हो रहा है।

कोयला मंत्रालय से जुड़ी परामर्श समिति की बैठक के दौरान बुधवार को दत्त ने बताया कि कोयला क्षेत्र में शुरू किए गए निरंतर सुधारों से पूरी तरह खोजे गए ब्लॉक के लिए परिचालन समयसीमा 51 महीने से घटकर 40 महीने और आंशिक रूप से खोजे गए ब्लॉक के लिए 66 महीने से घटकर 52 महीने हो गई है।

उन्होंने कहा कि पिछले दो वित्त वर्षों में एक अरब टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने में कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इन खदानों ने पिछले वित्त वर्ष में देश के कुल कोयला उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत का योगदान दिया है।

कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि वाणिज्यिक कोयला खनन पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किए गए कई सुधारों का एक प्रमुख उदाहरण है। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक कोयला खदानों की नीलामी के 14 दौर पूरे हो चुके हैं, जबकि 15वें दौर की प्रक्रिया जारी है। नीलामी प्रक्रिया का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार उद्योग संगठनों और निजी कंपनियों के साथ सक्रिय रूप से संवाद कर रही है।

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