
बेंगलुरु: कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने बुधवार को कहा कि उन्होंने हाल में निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक खामियां पाए जाने के बाद बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा केंद्रीय जेल में औचक छापेमारी के आदेश दिए थे। उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य की अन्य जेलों में भी इसी तरह की जांच की जाएगी।
जेल अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी के दौरान पूर्व सांसद और दुष्कर्म मामले में दोषी करार दिये गए प्रज्वल रेवन्ना के पास से एक स्मार्टफोन बरामद किया गया। प्रज्वल, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा के पोते हैं। राज्य के गृह मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार से अनुमति लेने के बाद छापेमारी के लिए करीब 100 केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) र्किमयों को तैनात किया गया था। इस दौरान कई खामियां सामने आईं।
उन्होंने कहा कि जेल के भीतर नियमों के उल्लंघन में सहयोग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
प्रियंक खरगे ने पत्रकारों से कहा, ”यह सीसीबी की ओर से खुद की गई कार्रवाई नहीं थी, मैंने इसके आदेश दिए थे। किसी भी जेल में छापेमारी के लिए गृह मंत्री का आदेश जरूरी होता है।” उन्होंने कहा कि उन्होंने दो-तीन सप्ताह पहले जेल का दौरा किया था और उस दौरान कुछ खामियां देखीं। इसके बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की और मुख्यमंत्री की मंजूरी लेकर छापेमारी कराई।
गृह मंत्री ने कहा, ”हमने व्यवस्था और वहां की स्थिति की जांच के लिए करीब 100 सीसीबी र्किमयों को भेजा था। कई खामियां मिलीं और हमने कार्रवाई भी शुरू कर दी है।” उन्होंने बताया कि नियमों के उल्लंघन में मदद करने वाले अधिकारियों को निलंबित करने के आदेश दिए गए हैं।
प्रियंक खरगे ने कहा, ”हमारे विभाग में कुछ अधिकारी अभी भी पुराने तरीकों को नहीं छोड़ पाए हैं। हम ऐसे सभी लोगों की पहचान करेंगे और उनके खिलाफ जरूरी कानूनी कार्रवाई करेंगे।” उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई केवल परप्पना अग्रहारा जेल तक सीमित नहीं रहेगी।
गृह मंत्री ने कहा, ”यह सिर्फ परप्पना अग्रहारा जेल की बात नहीं है। राज्य की सभी जेलों में ऐसी कार्रवाई होगी। मैं आपको यह नहीं बताऊंगा कि कब, कहां और क्या कार्रवाई होगी। यह कलबुर्गी, बेलगावी, बेंगलुरु या कहीं भी हो सकती है। हम सख्त कार्रवाई करेंगे और इसे जारी रखेंगे।” जेलों में बार-बार घटनाओं के बाद अधिकारियों के तबादले या निलंबन पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ अपराध साबित होता है तो उसे सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार जेलों में बंदियों को किसी भी तरह की वीआईपी सुविधा नहीं मिलने देगी। प्रियंक खरगे ने कहा, ”हम किसी को इस तरह की वीआईपी सुविधा नहीं लेने देंगे। यह छापेमारी ही संदेश है। अगर कोई यह सोचता है कि वह मेरे अधिकारियों को रिश्वत देकर कुछ भी कर सकता है तो वह गलत है।” प्रज्वल रेवन्ना की बैरक से मोबाइल फोन और पेन ड्राइव मिलने की खबरों पर खरगे ने कहा कि फिलहाल इस बारे में पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा, ”कौन सा मोबाइल फोन मिला, पेन ड्राइव किसकी थी, किसकी नोटबुक मिली, यह सब गोपनीय रखना होगा। समय आने पर हम पूरी जानकारी साझा करेंगे।” उन्होंने जांच में जल्दबाजी नहीं करने की बात कहते हुए कहा कि अधिकारियों को यह पता लगाना होगा कि प्रतिबंधित सामान जेल के अंदर कौन लेकर आया और किसने कैदियों की मदद की।
प्रियंक खरगे ने कहा, ”अभी यह सामान मिला है। हमें पता लगाना होगा कि इसे अंदर कौन लाया, वहां कौन लोग सहयोग कर रहे हैं और किस तरह सहयोग कर रहे हैं।” उन्होंने बताया कि जेलों के डिजिटल नेटवर्क, जिसमें मोबाइल फोन जैमर भी शामिल हैं, का तकनीकी आॅडिट कराने के आदेश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा, ”जेलों में जैमर लगे हैं और हमें जानकारी मिल रही है कि कुछ जगहों पर वे काम नहीं कर रहे हैं। इसलिए मैंने जेलों में उपलब्ध डिजिटल नेटवर्क की पूरी जांच के आदेश दिए हैं।” उन्होंने कहा कि कुछ कोठरियों से मोबाइल फोन, नोटबुक और अन्य प्रतिबंधित सामान मिले हैं, जिनमें कुछ हाई-प्रोफाइल कैदियों की बैरक भी शामिल हैं। प्रियंक खरगे ने कहा, ”स्वाभाविक रूप से ऐसा लगता है कि हमारे कुछ लोग इन कैदियों के साथ मिले हुए हैं।”



