कौन हैं हेमांग जोशी: दो साल में नगर निगम से लोकसभा तक पहुंचे, राहुल गांधी पर दर्ज करा चुके ‘हमला करने’ का केस

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने नितिन नबीन की अध्यक्षता में अपने राष्ट्रीय उपाध्यक्षों, महासचिवों, सचिवों और मोर्चा प्रमुखों में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने 65 पदाधिकारियों में से अधिकतर को बदल दिया है और सिर्फ कुछ को ही उनके पद पर बरकरार रखा है। सबसे बड़ा बदलाव भाजपा के सचिव और मोर्चा स्तर पर ही हुआ। जहां राष्ट्रीय सचिवों में से सिर्फ एक नेता- अनिल एंटनी को बरकरार रखा गया तो वहीं मोर्चे के सभी अध्यक्षों को हटा दिया गया है। उनकी जगह नए प्रमुखों को बिठाया गया है।

भाजपा के सबसे चर्चित भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो), जिसके अध्यक्ष का पद लंबे समय से कर्नाटक से सांसद तेजस्वी सूर्या के पास था, उसके नेतृत्व में भी बदलाव किया गया है। अब गुजरात से आने वाले सांसद हेमांग जोशी को भाजयुमो अध्यक्ष बनाया गया है। जोशी मौजूदा समय में वडोदरा से सांसद हैं और अपने मानवीय संसाधन के प्रबंधन से जुड़े कौशल के लिए भाजपा में चर्चित हैं।

पहले जानें- राजनीति में आने से पहले कैसा था हेमांग जोशी का जीवन?

हेमांग जोशी का जन्म 1991 में गुजरात के पोरबंदर में हुआ। साल 2008 में जब उनके पिता वडोदरा चले आए, तब जोशी ने अपनी उच्च शिक्षा के लिए लोकप्रिय महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय (एमएसयू) में प्रवेश लिया। वे साल 2008 से लेकर 2021 तक इस विश्वविद्यालय से जुड़े रहे।

हेमांग ने अपनी 2015 में स्नातक की पढ़ाई फिजियोथेरेपी से की। बैचलर्स इन फिजियोथेरेपी (बीपीटी) की पढ़ाई करने की वजह से ही अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाते हैं। इसके बाद साल 2016 में उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से मानव संसाधन प्रबंधन में पोस्ट ग्रैजुएट की डिग्री हासिल की।

अब जानें- राजनीति में कैसे हुई हेमांग की एंट्री?

बताया जाता है कि वडोदरा आने और कॉलेज में एडमिशन लेने के साथ ही वे भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से सक्रिय तौर पर जुड़ गए। साल 2010-11 के दौरान उन्होंने एबीवीपी के मीडिया प्रभारी और जिला कार्यकारी सदस्य के रूप में काम किया। बाद में, साल 2015-16 में वे विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ सोशल वर्क के महासचिव चुने गए। इसके बाद वे साल 2013 में भाजपा के एक सक्रिय कार्यकर्ता बने।

छात्र राजनीति के दिनों में पीएम मोदी की ओर से मिला जिक्र
छात्र जीवन के दौरान हेमांग जोशी को पहली बार व्यापक स्तर पर पहचान उनके स्वच्छता पर लिखे गए एक गीत ‘सनेडो’ से मिली। इस गीत को गुजरात की तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल की ओर से लॉन्च किया गया और बाद में विश्वविद्यालय की ओर से अपनाया गया। गीत को मशहूर गायिका भूमि त्रिवेदी ने गाया था और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम- मन की बात में इसका खास जिक्र किया था।

कुणाल कामरा के शो का विरोध कर आए चर्चाओं में
इसके अलावा छात्र राजनीति के दिनों में जोशी तब भी चर्चा में रहे, जब उनके संगठन के समूह ने एमएसयू परिसर में हास्य कलाकार कुणाल कामरा के एक प्रस्तावित कॉमेडी शो का कड़ा विरोध किया, जिसके कारण उस शो को रद्द करना पड़ा था।नगर निगम में मिली थी पहली बड़ी नियुक्ति
सक्रिय चुनावी राजनीति और सांसद बनने से ठीक पहले, जनवरी 2022 में उन्हें वडोदरा नगर निगम (वीएमसी) की स्कूल कमेटी (नगर प्राथमिक शिक्षण समिति) का उपाध्यक्ष  नियुक्त किया गया था। यह नागरिक शासन और प्रशासन में उनकी पहली औपचारिक जिम्मेदारी थी।

लोकसभा सांसद बनने और भाजपा में अलग पहचान बनाने की कहानी?

सांसद बनने का सफर (2024)

  • हेमांग जोशी के राष्ट्रीय राजनीति में उभार का एक बड़ा कारण उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और स्थानीय धार्मिक-सांस्कृतिक संगठनों, जैसे वल्लभ यूथ ऑर्गनाइजेशन के साथ भी करीबी जुड़ाव भी रहा है।
  • साल 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने हेमांग जोशी को गुजरात की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक वडोदरा से मैदान में उतारा। यह वही निर्वाचन क्षेत्र है, जिससे खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ चुके हैं और रिकॉर्ड तोड़ जीत हासिल कर चुके हैं।
  • जोशी को दो बार की मौजूदा सांसद रंजनबेन भट्ट की जगह पर टिकट दिया गया था। इस सीट पर जीत के साथ महज 33 वर्ष की आयु में वे गुजरात से भाजपा के सबसे युवा सांसदों में से एक बने और अपनी जीत दर्ज कराकर पार्टी में एक मजबूत चुनावी आधार तैयार किया।

भाजपा में अलग पहचान और राष्ट्रीय कद बनाने की क्या कहानी?

1.  राष्ट्रीय राजनीतिक सुर्खियों में आए: 2024 में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान संसद परिसर में सत्तापक्ष और विपक्षी सांसदों के बीच एक तीखा टकराव (धक्कामुक्की) हुआ था। इस घटना में घायल हुए भाजपा सांसद प्रताप सारंगी के पक्ष में हेमांग जोशी ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी से सीधे सवाल किए। इसके बाद जोशी ने बांसुरी स्वराज और अनुराग ठाकुर जैसे बड़े नेताओं के साथ मिलकर राहुल गांधी के खिलाफ पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इस कदम ने जोशी को अचानक राष्ट्रीय मीडिया और पार्टी की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया।

2. अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रतिनिधित्व: सांसद बनने के बाद 2025 में उनकी भूमिका को विस्तार दिया गया। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेशों में भारत का कूटनीतिक पक्ष रखने के लिए भेजे गए सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल में वे गुजरात के एकमात्र सांसद थे। इस 17 दिवसीय यात्रा में उन्होंने टीम के साथ इंडोनेशिया, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, जापान और सिंगापुर का दौरा किया और आतंकवाद के खिलाफ भारत के जीरो-टॉलरेंस के दृष्टिकोण को वैश्विक नीति निर्माताओं के सामने प्रस्तुत किया।

3. संगठन में अनूठी पहलों ने तेजी से बढ़ाया कद: नवंबर 2025 में उन्हें गुजरात के विशेष निवेश क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त किया गया। जोशी को बेहद तकनीकी प्रेमी भी माना जाता है। उन्होंने वडोदरा में एक अनूठा डिजिटल एमपी ऑफिस स्थापित किया, जिसने पूरे दल में उनकी एक आधुनिक छवि बनाई। गुजरात युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने बड़े पैमाने पर संगठन से जुड़े कार्यों के लिए बेहद सफल डिजिटल बैठकों का आयोजन किया, जिसने सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष का ध्यान खींचा।

4. भाषाओं पर मजबूत पकड़ और विवाद-मुक्त छवि: विश्लेषकों के मुताबिक, भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसे शिक्षित, सौम्य और विवादों से दूर रहने वाले युवा नेता की तलाश थी, जो देश के युवा (जेन-जी) मतदाताओं के साथ संवाद कर सके। जोशी गुजराती, हिंदी और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में पारंगत हैं, जिसने उनकी इस स्वीकार्यता को और आसान बना दिया।

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