
बंगाल: अरुणाचल प्रदेश के ताक्सिंग से लेकर सिलीगुड़ी तक पूर्वी भारत की सुरक्षा परिदृश्य में कई परतें हैं। इसी संवेदनशील भूगोल के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को करीब एक महीने में दूसरी बार उत्तर बंगाल पहुंचे। तीन दिन के इस दौरे में सीमा सुरक्षा को लेकर उच्चस्तरीय बैठकें, सीमावर्ती इलाकों की समीक्षा और सशस्त्र सीमा बल के जवानों से संवाद होना है। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से लगी सीमाओं के साथ-साथ सिलीगुड़ी गलियारा केंद्र के सुरक्षा एजेंडे के केंद्र में है।
सिलीगुड़ी गलियारा देश के बाकी हिस्से को पूर्वोत्तर से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण स्थलीय कड़ी है। इसके आसपास नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाएं हैं। यही वजह है कि यहां सुरक्षा में किसी बड़ी चूक का असर केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूर्वोत्तर की सैन्य, नागरिक और आर्थिक संपर्क व्यवस्था तक पहुंच सकता है।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, पूर्वी सीमा पर केंद्र का फोकस अब बहुस्तरीय सुरक्षा पर है। इसका उद्देश्य अवैध घुसपैठ के साथ तस्करी, हथियार और मादक पदार्थों की आवाजाही, मानव तस्करी, सीमा पार अपराध तथा संवेदनशील इलाकों में किसी भी असामान्य गतिविधि का शुरुआती स्तर पर पता लगाना है।
- तीन सीमाएं-नेपाल, भूटान और बांग्लादेश
- आठ राज्य- पूर्वोत्तर की मुख्य भूमि से संपर्क सिलीगुड़ी गलियारे पर निर्भर
- भारत-बांग्लादेश सीमा पर 1,647.696 किमी बाड़ लग चुकी
रणनीति में सीमा बाड़ के साथ सड़क और सीमा चौकियां, तकनीकी निगरानी, खुफिया सूचनाओं का साझा इस्तेमाल और केंद्र-राज्य एजेंसियों के बीच तत्काल समन्वय शामिल है। गृह मंत्रालय की सीमा प्रबंधन नीति में भी बाड़, सड़क, सीमा चौकियों और तकनीकी प्रणालियों को एकीकृत सुरक्षा ढांचे का हिस्सा बनाया गया है।



