नागपुर के वाटर प्लांट में क्लोरीन गैस लीक, 20 लोग अस्पताल में भर्ती; NDRF ने संभाला मोर्चा

महाराष्ट्र के नागपुर के गोधनी इलाके में जलशोधन संयंत्र से क्लोरीन गैस लीक होने के बाद हड़कंप मच गया। पुलिस, दमकल और NDRF की टीमों ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान चलाया। गैस की चपेट में आने से करीब 20 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

महाराष्ट्र के नागपुर के गोधनी इलाके में महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के जलशोधन संयंत्र में क्लोरीन गैस लीक होने की घटना से हड़कंप मच गया। गैस रिसाव की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग, NDRF और अन्य बचाव दल मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।

घटना के बाद कुछ लोगों को सांस लेने में परेशानी की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 20 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल किसी की मौत या बड़ी जनहानि की सूचना नहीं है।

पुलिस ने सबसे पहले संभाला मोर्चा

गैस रिसाव की शुरुआती जानकारी मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची। मौके पर मौजूद लोगों और फंसे हुए व्यक्तियों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया गया। इसके बाद सुरक्षा को देखते हुए इलाके में बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही रोक दी गई।

प्रशासन ने आसपास के लोगों को भी घटनास्थल से दूर रहने की सलाह दी, ताकि किसी संभावित खतरे से बचा जा सके।

दमकल और NDRF की टीम ने शुरू किया बचाव अभियान

पुलिस के बाद दमकल विभाग की टीम को भी घटना की जानकारी दी गई। दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर ऑपरेशन शुरू किया। इसके बाद NDRF की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बचाव अभियान में शामिल हुई।

बचाव दलों ने परिसर की स्थिति का जायजा लिया और प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा उपायों को मजबूत किया।

करीब 20 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी

क्लोरीन गैस के संपर्क में आने के कारण कई लोगों को सांस लेने में परेशानी हुई। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। NDRF की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक करीब 20 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की बात सामने आई है।

फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है और घटना में किसी की मौत की सूचना नहीं है।

परिसर में दो-तीन दिन सावधानी की सलाह

बचाव दल के मुताबिक घटनास्थल पर अभी भी कुछ सामग्री पड़ी हुई है और गैस की मौजूदगी की संभावना को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में लोगों का घटनास्थल के पास जाना जोखिम भरा हो सकता है।

सुरक्षा के मद्देनजर परिसर को अगले दो-तीन दिनों तक सील रखना बेहतर माना जा रहा है, ताकि प्रभावित क्षेत्र की पूरी तरह जांच की जा सके और किसी संभावित खतरे को टाला जा सके।

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