
मॉस्को: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक ऐसे आदेश पर हस्ताक्षर किये हैं, जिसके तहत यदि निजी मालिक यूक्रेनी ड्रोन हमलों से अहम बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करने या हमलों के बाद उसे फिर से खड़ा करने में विफल रहते हैं तो सरकार अस्थायी रूप से उनका नियंत्रण अपने हाथ में ले सकती है। इसे युद्ध के बढ़ते दबाव के बीच मॉस्को की मुश्किलों का एक और संकेत माना जा रहा है।
रूस कई महीनों से बढ़ते, दूर तक पहुंचने वाले और अधिक सटीक यूक्रेनी हमलों के कारण आर्थिक और राजनीतिक दबाव का सामना कर रहा है। यूक्रेन ने घरेलू स्तर पर विकसित लंबी दूरी के ड्रोन के जरिए महत्वपूर्ण तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है, जिससे ईंधन की कमी पैदा हुई है। राष्ट्रपति पुतिन ने भी सार्वजनिक रूप से ईंधन की कमी को स्वीकार किया है।
इन हमलों में बड़े वाणिज्यिक केंद्र भी निशाना बने हैं, जिससे रूसी नेतृत्व को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। वहीं, यूक्रेन भी लगातार हो रहे रूसी हवाई हमलों से प्रभावित हुआ है। रूसी हमलों ने सर्दी से पहले यूक्रेन के बिजली ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है और बड़ी संख्या में घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। रूस-यूक्रेन के टकराव का यह पांचवा साल है।
सरकार का यह नया आदेश मरम्मत के लिए मालिकों पर दबाव डाल सकता है। सोमवार देर रात घोषित पुतिन के आदेश के पीछे क्रेमलिन की मंशा अभी स्पष्ट नहीं है। हालांकि, यह ऊर्जा और ईंधन संरचनाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, संचार, परिवहन और रसद केन्द्रों समेत कई क्षेत्रों पर लागू होता है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता द मित्री पेस्कोव ने मंगलवार को कहा कि ”अक्सर कारोबारी मालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने, खासकर ड्रोन रोधी सुरक्षा के उपाय करने पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते।” पेस्कोव ने कहा कि अहम आर्थिक ढांचे के खिलाफ ड्रोन हमलों के खतरे को देखते हुए ”हमें कदम उठाने होंगे और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।”
उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव ने सोमवार शाम एक बयान में कहा कि इस आदेश का मतलब कंपनियों का राष्ट्रीयकरण या उनके स्वामित्व में बदलाव नहीं है। इसका उद्देश्य केवल ”विशिष्ट सुरक्षा समस्याओं को हल करने के लिए किसी उद्यम के प्रबंधन में राज्य की भागीदारी” है।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का व्यापक इस्तेमाल नहीं किया जाएगा और ”उच्चतम स्तर पर लक्षित तथा सोच-समझकर फैसले किए जाएंगे।” रूसी राजनीतिक विश्लेषक अब्बास गल्यामोव ने कहा कि यह कदम संभवत? एक ”रणनीतिक उपाय” है, जिसका उद्देश्य बार-बार हमलों का शिकार हो रही तेल रिफाइनरियों के मालिकों पर मरम्मत कराने का दबाव बनाना है।
पुतिन के पूर्व भाषण लेखक रह चुके गल्यामोव ने ‘टेलीग्राम’ पर कहा, ”जब एक ही रिफाइनरी पर तीन से पांच बार हमला हो चुका है तो यह मानना उचित है कि उसके मालिक नष्ट हुए केन्द्रों को फिर से खड़ा करने में निवेश करने से हिचक रहे हैं।” उन्होंने सवाल किया, ”अगर कल फिर हमला होने वाला है तो अरबों रुपये क्यों खर्च किए जाएं?” गल्यामोव के अनुसार, सरकार कंपनियों को स्पष्ट संदेश दे रही है, ”अगर आप रिफाइनरियों के पुर्निनर्माण के लिए धन नहीं लगाएंगे तो हम उन्हें अपने नियंत्रण में ले लेंगे।”
वहीं यूक्रेन के जनरल स्टाफ ने मंगलवार को कहा कि उसकी सेना ने रात में क्रास्रोदार क्षेत्र स्थित रूस की अफिप्स्की तेल रिफाइनरी के संयंत्रों पर हमला किया, जिससे वहां आग लग गई। क्रास्रोदार के गवर्नर वेनियामिन कोंद्रात्येव ने भी अफिप्स्की शहर की एक तेल रिफाइनरी में आग लगने की पुष्टि की।
दक्षिणी रूस के रोस्तोव क्षेत्र में स्थित नोवोशांिख्तस्क तेल रिफाइनरी को भी रात में यूक्रेनी हमले से नुकसान पहुंचा और उसका संचालन रोकना पड़ा। रोस्तोव के गवर्नर यूरी स्ल्यूसार ने मंगलवार को यह जानकारी दी, उन्होंने अन्य विवरण नहीं दिया। लंबे समय से जारी महंगे युद्ध के कारण रूस को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने बजट घाटे को नियंत्रण में रखने के लिए करों में बढ़ोतरी की है और घरेलू स्तर पर कर्ज भी बढ़ाया है। बड़ी कंपनियों का नियंत्रण अपने हाथ में लेने से सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है। हालांकि, क्षतिग्रस्त संपत्तियों का नियंत्रण अपने हाथ में लेने से सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी पड़ सकता है।



