
अयोध्या: पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के सीईओ की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाये जाने के बाद न्यास ने स्पष्ट किया है कि चुने गये सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा 11 अगस्त को साक्षात्कार के लिये आए थे।
राम मंदिर न्यास के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पद की दौड़ में शामिल रहे पांडेय ने हाल में एक साक्षात्कार में कहा था कि 11 अगस्त को उन्हें दिए गए समय के दौरान उन्होंने मिश्रा को साक्षात्कार वाली जगह पर नहीं देखा था।
इन टिप्पणियों के बाद न्यास को चयन प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा, वहीं पांडेय ने भी स्पष्ट किया कि उनकी बातों का गलत मतलब निकाला गया। न्यास ने सोमवार रात ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि वह सीईओ के चयन को लेकर मीडिया की कुछ खबरों में गलत जानकारी के मद्देनजर ‘तथ्यों को स्पष्ट’ करना चाहता है।
न्यास ने इस दावे को ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ बताते हुए खारिज कर दिया कि मिश्रा ने 11-12 अगस्त की साक्षात्कार प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया था। न्यास के अनुसार सीईओ के चयन के लिये छह जुलाई को एक ‘सर्च कमेटी’ बनायी गयी थी और उसे 5585 आवेदन मिले थे। इनमें से अंतिम दौर के लिए 16 उम्मीदवारों को चुना गया था, जिन्होंने 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में साक्षात्कार में हिस्सा लिया।
न्यास ने जोर दिया कि जितेंद्र मिश्रा ने 11 अगस्त को पहले सत्र के दौरान साक्षात्कार प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। ‘सर्च कमेटी’ ने एक सितंबर को न्यास को अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपी थीं। न्यास के अनुसार इसके बाद दो सितंबर को जितेंद्र मिश्रा समेत अंतिम तीन उम्मीदवारों के नामों को सार्वजनिक किया गया था।
न्यास ने कहा, ”संस्तुत शीर्ष तीन उम्मीदवारों में उनका शामिल होना उनके भाग लेने, मूल्यांकन और योग्यता-आधारित चयन का दस्तावेजी सबूत है।” न्यास ने कहा कि चयन प्रक्रिया को संस्थागत कामकाज और पारर्दिशता के उच्च मानकों के साथ पूरा किया गया और हर चरण का दस्तावेजीकरण करने के बाद सभी उम्मीदवारों की पहचान दर्ज की गई।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव स्वामी गोंिवद देव गिरि ने यह जानकारी दी। वहीं, पांडेय ने भी मंगलवार सुबह ‘एक्स’ पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनकी बातों का गलत मतलब निकाला गया। पांडेय ने कहा, ”मैं स्थिति स्पष्ट करना चाहता हूं क्योंकि राम मंदिर सीईओ के चयन को लेकर मीडिया में भ्रम फैलाया जा रहा है।” पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा कि उन्होंने कभी यह दावा नहीं किया कि वह सीईओ पद के लिये शीर्ष तीन अंतिम उम्मीदवारों में शामिल थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें चयन की जानकारी सोशल मीडिया और अखबारों से मिली थी।
पांडेय ने यह भी कहा कि उन्होंने यह कभी नहीं कहा था कि मिश्रा साक्षात्कार के लिए नहीं आए थे। पांडेय ने बताया कि उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि 11 अगस्त को जब उनका अपना साक्षात्कार होना था तब उन्होंने मिश्रा को उस जगह पर नहीं देखा था।
यह मामला तीन दिन के अयोध्या दौरे पर पहुंचे राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और न्यास के सदस्य नृपेंद्र मिश्रा के साथ संवाददाताओं की बातचीत में भी उठा।
नृपेंद्र ने जितेंद्र के साक्षात्कार के लिये पहुंचने के बारे में पूछे जाने पर कहा कि उन्हें इस मामले के बारे में कोई जानकारी नहीं है। नृपेंद्र ने कहा, ”मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। चयन समिति ने फैसला लिया था। वे ही आपको बता सकते हैं।” राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण के तूल पकड़ने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के कामकाज को बेहतर बनाने के लिये सीईओ के चयन की लंबी कवायद के बाद दो सितंबर को जितेंद्र मिश्रा को न्यास का पहला सीईओ घोषित किया गया था।



