पीएम मोदी से मुलाकात के बाद जमीन विवाद में नया मोड़: कंपनी ने निर्माण परमिट किया सरेंडर, जानें असगरअली वोहरा का पूरा मामला

ठाणे के 81 वर्षीय असगरअली वोहरा ने 1989 में 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदने का दावा किया था। विवाद के बीच भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता से जुड़ी बताई जा रही सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस ने निर्माण अनुमति वापस कर दी।

ठाणे/मुंबई: महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मीरा रोड निवासी 81 वर्षीय असगरअली वोहरा से जुड़े जमीन विवाद में 16 सितंबर 2026 को नया घटनाक्रम सामने आया है। वोहरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर अपनी जमीन से जुड़े विवाद में हस्तक्षेप और सीबीआई जांच की मांग की थी। अब विवादित जमीन पर परियोजना से जुड़ी सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड ने अपना निर्माण परमिट सरेंडर करने की प्रक्रिया शुरू की है।

1989 में खरीदी थी जमीन

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, असगरअली वोहरा ने 1989 में भयंदर ईस्ट के नवघर इलाके में करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदने का दावा किया था। वोहरा का आरोप है कि वर्ष 2011 में इस जमीन पर दो निर्माण कंपनियों—स्वयं बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस—ने कब्जे का दावा किया और जमीन से जुड़े दस्तावेजों में कथित तौर पर हेरफेर की गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है।

पीएम मोदी से 8 सितंबर को हुई मुलाकात

वोहरा ने 8 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। उनका कहना था कि उन्होंने गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में मोदी के साथ पढ़ाई की थी। मुलाकात के दौरान उन्होंने जमीन विवाद की जांच सीबीआई से कराने की मांग रखी थी। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने मामले को लेकर 16 सितंबर को सुनवाई निर्धारित की थी।

कंपनी ने निर्माण अनुमति वापस ली

अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस की ओर से सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने मीरा-भायंदर नगर निगम के टाउन प्लानिंग विभाग को पत्र देकर विवादित प्लॉट के लिए जारी कमेंसमेंट सर्टिफिकेट सरेंडर करने की जानकारी दी है।

कंपनी का कहना है कि उसने 13 जून 2019 को रजिस्टर्ड डीड के जरिए जमीन खरीदी थी और उसे 17 अप्रैल 2026 को निर्माण की अनुमति मिली थी। हालांकि जमीन के स्वामित्व को लेकर चल रहे विवाद के कारण कंपनी ने निर्माण अनुमति वापस करने का फैसला किया। कंपनी ने जमा की गई परियोजना संबंधी फीस वापस करने का अनुरोध भी किया है।

2015 में दर्ज हुई थी एफआईआर

वोहरा के अनुसार, जमीन विवाद से जुड़े कथित दस्तावेजी फर्जीवाड़े को लेकर वर्ष 2015 में एफआईआर दर्ज की गई थी। उनका कहना है कि इसके बाद भी मामला लंबे समय तक विभिन्न सरकारी विभागों और अदालतों में चलता रहा। स्वतंत्र रिपोर्टों के अनुसार, मामला अदालत में लंबित रहा है।

भाजपा विधायक से कंपनी के संबंध का दावा

वोहरा ने सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस को भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता से जुड़ा बताया है। यह संबंध विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में भी दर्ज किया गया है। हालांकि जमीन पर स्वामित्व और कथित दस्तावेजी गड़बड़ी से जुड़े आरोपों को संबंधित कानूनी प्रक्रिया के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

16 सितंबर की सुनवाई पर नजर

पीएम मोदी से मुलाकात के बाद स्थानीय प्रशासन ने मामले पर सुनवाई के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की थी। इससे पहले दोनों संबंधित निर्माण कंपनियों के प्रतिनिधियों को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया था। अब सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस द्वारा निर्माण अनुमति सरेंडर करने के घटनाक्रम के बाद इस सुनवाई का महत्व और बढ़ गया है।

संक्षेप में, यह विवाद 1989 में खरीदी गई करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन, वर्ष 2011 में कथित कब्जे और दस्तावेजों से जुड़े आरोपों तथा 2015 में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। सितंबर 2026 में वोहरा ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर सीबीआई जांच की मांग की। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई हुई और अब विवादित जमीन से जुड़ी एक कंपनी ने अपना निर्माण परमिट सरेंडर कर दिया है। जमीन के अंतिम स्वामित्व और अन्य कानूनी विवादों का निर्धारण संबंधित कानूनी प्रक्रिया से होगा।

नोट: इस रिपोर्ट में जमीन पर कब्जे, जाली दस्तावेज और कंपनियों के संबंधों से जुड़े दावों को संबंधित पक्षों/मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तुत किया गया है। इन्हें अदालत के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।

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