श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद ने केंद्र शासित प्रदेश को “डर, बेरोजगारी और लाचारी” के साये से बाहर निकालने के लिए बृहस्पतिवार को लोगों से समर्थन मांगा. पिछले महीने कांग्रेस छोड़ने वाले आज़ाद ने कहा कि वह “आज़ादी”, “स्वायत्तता” या “स्व-शासन” जैसे जज्Þबाती मुद्दों को नहीं उठाएंगे, बल्कि सिर्फ उन मुद्दों के बारे में बात करेंगे जिन्हें हासिल किया जा सकता है.
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के डाक बंगले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए आज़ाद ने कहा, ‘‘ मैं उन नेताओं की तरह नहीं हूं कि चुनाव जीतने के लिए आपके जज्Þबातों से खेलूं.’’ आज़ाद ने कहा कि नेता बनने के दो तरीके हैं- एक भावनात्मक नारे लगवाकर और दूसरा सिर्फ उन्हीं मुद्दों पर बात करना जो उनके बस में है.
वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘ मैं कहूंगा कि आपको आज़ादी मिलेगी. लेकिन, मिलेगी नहीं. क्या आपको यह पिछले 75 साल में मिली है? मैं कहूंगा कि आपको स्वायत्तता (नेशनल कॉन्फ्रेंस का नारा) या स्वशासन (पीडीपी का नारा) मिलेगा. इन नारों पर कई चुनाव लड़े गए, आपने देखा है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला है. मैं ऐसे नारे क्यों लगाऊं?’’ आज़ाद ने कहा कि अगस्त 2019 केंद्र सरकार द्वारा खत्म कर दिए अनुच्छेद 370 को बहाल करने का अगर कुछ लोग वादा कर रहे हैं, “उन्हें करने दें”, लेकिन वह लोगों को उस चीज की गारंटी नहीं देंगे जो उनके बस में नहीं है.
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘ मैं आपसे विकास का वादा कर सकता हूं. मैं सुनिश्चित करूंगा कि आपकी जÞंिदगी गरिमापूर्ण हो. मैं आपसे वादा करता हूं कि रात में मेरे गुज्जर-बकरवाल या कश्मीरी भाइयों के घरों के दरवाजे कोई भी पुलिसकर्मी या सेना का जवान नहीं खटखटाएगा.’’
उन्होंने कहा, “मैं आपसे वादा करता हूं कि गरीब या अमीर लोगों के बच्चों को जेल नहीं भेजा जाएगा और उन्हें पैसे के लिए कठुआ या देश की किसी अन्य जेल में नहीं भेजा जाएगा. मैं आपसे वादा करता हूं कि कोई भी हमारी बहनों और बेटियों का अपमान नहीं करेगा.” जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी वादा किया कि “फर्जी” मुठभेड़ नहीं होंगी.
उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद के पटल पर वादा किया है कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा. आज़ाद ने कहा, ‘‘ एक बार राज्य का दर्जा बहाल हो जाने के बाद, मैं जमीन और रोजगार के अधिकार की गारंटी दे सकता जोकि जम्मू-कश्मीर में सिर्फ जम्मू-कश्मीर के लोगों को ही दी जाएगी.’’