चिदंबरम ने वित्त मंत्री के एक बयान को लेकर उन पर कटाक्ष किया, भाजपा ने किया पलटवार

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 16 Sep 2022 06:51 PM
चिदंबरम ने वित्त मंत्री के एक बयान को लेकर उन पर कटाक्ष किया, भाजपा ने किया पलटवार
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नयी दिल्ली/मुंबई. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के एक बयान को लेकर शुक्रवार को उन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भगवान का शुक्र है कि मनमोहन सिंह ने 1991 में बतौर वित्त मंत्री नोटबंदी, कई दरों वाले जीएसटी तथा पेट्रोलियम उत्पादों पर बेहताशा कर लगाने जैसे कदम नहीं उठाए.

इस पर भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार में रहते हुए कांग्रेस हमेशा सिर्फ बोलने, लेकिन कोई निर्णय नहीं लेने की नीति पर अमल करती रही तथा चिदंबरम उसकी इस ‘अक्षमता’ का चेहरा हैं. दरअसल, सीतारमण ने बृहस्पतिवार को एक कार्यक्रम में 1991 की तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए आर्थिक सुधारों को ‘‘आधे-अधूरे सुधार’’ करार दिया था और कहा था कि उस समय अर्थव्यवस्था सही तरीके से नहीं, बल्कि आईएमएफ द्वारा लगाई गई सख्ती के अनुसार खोली गई थी.

उन्होंने कहा था, ‘‘जब तक भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री पद ग्रहण नहीं किया, तब तक कोई प्रगति नहीं हुई और बुनियादी ढांचे के निर्माण, सड़कों और मोबाइल टेलीफोन पर उनके द्वारा दिये गये ध्यान ने हमारी बहुत मदद की.’’ उनके इस बयान को लेकर पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने शुक्रवार को कटाक्ष करते हुए ट्वीट किया, ‘‘खबर है कि वित्त मंत्री ने यह कहा है कि 1991 के आर्थिक सुधार आधे-अधूरे (हाफ बेक्ड) थे. भगवान का शुक्र है कि मनमोहन सिंह ने नोटबंदी, कई दरों वाली जीएसटी और पेट्रोल एवं डीजल पर बेतहाशा कर लगाने जैसे हद से ज्यादा पके और स्वादहीन खाने नहीं परोसे.’’

चिदंबरम ने यह तंज भी किया, ‘‘हम वित्त मंत्री का आभार प्रकट करते हैं कि उन्होंने इस बात खुलासा किया है कि उन्होंने विश्वविद्यालय में बेकरी और खाना पकाने की भी पढ़ाई की है.’’ भाजपा नेता मालवीय ने चिदंबरम के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए कहा, ‘‘1991 के सुधार निश्चित तौर पर आधे-अधूरे थे, क्योंकि वे मजबूरी में किए गए थे, किसी प्रतिबद्धता और अकांक्षा के साथ नहीं किए गए थे. आजादी के बाद पहले चार दशकों में कांग्रेस की आर्थिक नीतियों के कारण ऐसी परिस्थिति पैदा हुई कि हमें अपने सोने बेचने और गिरवी रखने पड़े.’’

उन्होंने चिदंबरम पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘अटल जी के नेतृत्व में नयी दूरसंचार नीति, एनएचएआई, जीएसटी के विचार जैसे कई सुधार पूरी प्रतिबद्धता के साथ सामने आए. कांग्रेस हमेशा सिर्फ बोलने और कोई निर्णय नहीं लेने वाली स्थिति में थी और रहेगी. आप उस अक्षमता का चेहरा हैं.’’

सीतारमण ने कंपनियों से एमएसएमई का बकाया 45 दिन में चुकाने को कहा

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निजी क्षेत्र की कंपनियों से सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) का बकाया 45 दिन के भीतर चुकाने को कहा है. उन्होंने इस बात को माना कि केंद्र सरकार के विभाग और उपक्रम भी एमएसएमई का बकाया समय पर नहीं दे रहे हैं.

सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र, राज्य सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का भी एमएसएमई क्षेत्र पर बकाया है.
वित्त मंत्री ने कहा कि दो दिन पहले उनकी बड़े कारोबारियों से मुलाकात हुई थी जिनसे उन्होंने यह सुनिश्चित करने की अपील की कि अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले छोटे व्यवसायों का बकाया समय पर चुकाया जाए.

लघु उद्योग भारती के एक कार्यक्रम में सीतारमण ने कहा, ‘‘निजी क्षेत्र और उद्योग को 45 दिन के भीतर भुगतान का संकल्प लेना चाहिए और कंपनी पंजीयक में खाता पुस्तिका दाखिल करनी चाहिए जिससे कि वह बकाया का उल्लेख कर सके. निजी क्षेत्र को भी आगे आना चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि केंद्रीय विभाग और उपक्रम भी एमएसएमई को समय पर भुगतान नहीं कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भी इस मुद्दे का समाधान निकालने के लिए कदम उठाएगी और यह सुनिश्चित करेगी कि उसके विभाग और सार्वजनिक उपक्रम छोटे व्यवसायों को 90 दिन के भीतर भुगतान करें. उन्होंने राज्य सरकारों से भी समय पर बकाया चुकाने की अपील की. वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाएं जैसे कि ट्रेड्स (व्यापार प्राप्तियां रियायत प्रणाली) मंच और समाधान पोर्टल छोटे व्यवयासों को समय पर भुगतान दिलाने में मददगार हैं. उन्होंने एमएसएमई क्षेत्र से प्रौद्योगिकी अपनाने और प्रभावी उत्पादन के लिए कौशल प्रशिक्षण देने का अनुरोध किया.

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