नई दिल्ली. राजस्थान में कांग्रेस का भीतरी संकट काफी बढ़ गया है। सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा के बीच अशोक गहलोत समर्थक विधायक भी लामबंद हो गए हैं। पहले साठ से ज्यादा विधायक मंत्री शांतिलाल धारीवाल के यहां मौजूद थे। इसके बाद 90 से ज्यादा विधायकों ने अपने इस्तीफे का एलान करते हुए विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी से मिलने पहुंचे हैं। ये विधायक अशोक गहलोत को ही मुख्यमंत्री बनाए रखने के लिए दबाव बना रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, ये विधायक विधायक दल की बैठक में नहीे पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि इस घटनाक्रम के बाद विधायक दल की बैठक टाल दी गई है। इससे पहले मुख्यमंत्री आवास पर कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रभारी महासचिव ने कांग्रेस विधायक दल की बैठक शाम सात बजे बुलाई थी।
अशोक गहलोत द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने का एलान करने के बाद से ही उनके सीएम पद पर बने रहने को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में कहा है कि अध्यक्ष का पद एक अहम जिम्मेदारी है। कोई भी नेता एक समय पर दो अहम पदों पर नहीं बना रह सकता। इसके बाद से ही सवाल उठने लगे थे कि अगर गहलोत पार्टी के अध्यक्ष बने तो राजस्थान का नया सीएम कौन होगा?
प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम तय करने के लिए की प्रक्रिया आज रविवार से शुरू भी हो गई थी। इसके लिए शाम विधायक दल की बैठक बुलाई गई। जिसमें कांग्रेस सहित सरकार को समर्थन करने वाले कुछ विधायकों को बुलाया गया। बैठक में शामिल होने के लिए प्रदेश प्रभारी अजय माकन और वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी जयपुर आ गए। दोनों नेताओं को ऑब्जर्वर बनाया गया है। यह दोनों नेता विधायकों से बात कर उनसे मुख्यमंत्री पद के दावेदारों को लेकर चर्चा करने वाले थे।