सरकार ने पीएफआई व उससे संबंधित आठ संगठनों पर लगाया प्रतिबंध

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 28 Sep 2022 10:10 PM
सरकार ने पीएफआई व उससे संबंधित आठ संगठनों पर लगाया प्रतिबंध
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नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने बुधवार को इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकवादी समूहों से ‘‘संबंध’’ रखने और देश में सांप्रदायिक नफरत फैलाने की कोशिश का आरोप लगाते हुए आतंकवाद रोधी कानून यूएपीए के तहत पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया.

राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार पीएफआई के आठ सहयोगी संगठनों- रिहैब इंडिया फाउंडेशन, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया इमाम काउंसिल, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन, नेशनल विमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन, केरल के नाम भी यूएपीए यानी गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित किए गए संगठनों की सूची में शामिल हैं.

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और विभिन्न राज्य पुलिस बलों ने हाल के दिनों में देशभर में दो बार पीएफआई के खिलाफ बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी. देश में आतंकी गतिविधियों को कथित रूप से समर्थन देने के आरोप में 22 सितंबर को 15 राज्यों में पीएफआई के कुल 106 नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था. 27 सितंबर को सात राज्यों में छापेमारी करके पीएफआई से कथित तौर पर जुड़े 170 से अधिक लोगों हिरासत में लिया या गिरफ्तार किया गया था.

प्रतिबंध के बाद, अधिकारियों ने उन 17 राज्यों में पीएफआई के कार्यालयों को सील करने और उनके बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी, जहां संगठन काम कर रहा था. केंद्र 30 दिनों के भीतर एक न्यायाधिकरण भी स्थापित करेगा जो यह तय करेगा कि पीएफआई को ‘‘गैरकानूनी संगठन’’ घोषित करने के लिए पर्याप्त कारण हैं या नहीं. पीएफआई प्रतिबंध के खिलाफ अपना बचाव भी कर सकता है.

घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के अनुसार यह संगठन देश के सांप्रदायिक और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को ‘नुकसान पहुंचाने’ में संलिप्त था. साथ ही अपनी कट्टरपंथी विचारधारा को आगे बढ़ाकर व भारत में ‘‘इस्लामी प्रभुत्व’’ कायम करने का आ’’ान करके राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘गंभीर खतरा’ पैदा कर रहा था. साल 2006 में गठित यह संगठन 2010 से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था, जब केरल में एक प्रोफेसर के हाथ काटने की घटना हुई थी. इस मामले में दोषी ठहराए गए कई आरोपी संगठन के सदस्य थे.
भाजपा के नेताओं एवं केंद्रीय मंत्रियों ने इस फैसले की सराहना की.

उन्होंने कहा कि यह कदम दर्शाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार उन ताकतों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करती है, जिनका उद्देश्य देश में शांति व स्थिरता को बाधित करना होता है. पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने प्रतिबंध लगाए जाने को देशहित में की गई कार्रवाई करार देते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल ऐसे हैं जो इस कार्रवाई को लेकर भी सियासी नफा-नुकसान का गुणा-भाग कर रहे हैं.

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘लोकतंत्र के खिलाफ सक साजिश के तहत गतिविधियां चला रहे कुछ संगठनों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है. देश की सुरक्षा हमारी ताकत है… यह कार्रवाई देश की सुरक्षा और देशहित में है.’’ नकवी ने कहा, ‘‘अफसोस की बात है कि पहले कुछ राजनीतिक दल ऐसे लोगों को प्रश्रय दे रहे थे. ऐसे ही लोग अब भी उनके साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं. यही लोग कभी र्सिजकल स्ट्राइक पर सवाल करेंगे. जब इस तरह के संगठनों (पीएफआई) पर कार्रवाई होती है तो ये लोग इनके साथ खड़े होते हैं.’’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने कहा कि पीएफआई को प्रतिबंधित करने का फैसला अच्छा है, लेकिन आरएसएस के खिलाफ यही कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि केरल में बहुसंख्यकवादी सांप्रदायिकता और अल्पसंख्यकवादी सांप्रदायिकता दोनों का विरोध होना चाहिए.

केरल में अच्छा खासा प्रभाव रखने वाले, प्रतिबंधित इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के एक वरिष्ठ नेता ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार की ओर से संगठन को अवैध करार दिए जाने के मद्देनजर अब इसे भंग कर दिया गया है. पीएफआई के प्रदेश महासचिव अब्दुल सत्तार ने संगठन की केरल इकाई के फेसबुक पेज पर पोस्ट साझा की है कि ‘‘देश के कानून का पालन करते हुए संगठन गृह मंत्रालय का फैसला स्वीकार करता है.’’ यह पोस्ट करने के कुछ ही घंटे बाद सत्तार को करुणागपल्ली से पकड़ लिया गया.

सत्तार ने पोस्ट में यह भी कहा कि सभी सदस्य और आम लोगों को बता दिया गया है कि गृह मंत्रालय द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद ‘‘पीएफआई को भंग कर दिया गया है.’’ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को एक ‘‘दू चरमपंथी संगठन’’ बताते हुए बुधवार को कहा कि इस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा इस्लामिक चरमपंथी संगठन ‘पीएफआई’ पर प्रतिबंध के बारे में पत्रकारों के सवालों के जवाब में यह टिप्पणी की.

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उन्होंने हालांकि हमेशा पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के दृष्टिकोण का विरोध किया है, लेकिन संगठन पर प्रतिबंध का समर्थन नहीं किया जा सकता.
केरल में कांग्रेस की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया और यह भी कहा कि आरएसएस को भी प्रतिबंधित किया जाना चाहिए.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाना समाधान नहीं है बल्कि बेहतर विकल्प यह होता कि उन्हें राजनीतिक रूप से अलग-थलग कर उनकी आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाती. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पीएफआई और उसके अनुषांगिक संगठनों पर लगाया गया प्रतिबंध सराहनीय एवं स्वागत योग्य है.

उन्होंने कहा, ‘‘यह ‘नया भारत’ है, यहां आतंकी, आपराधिक और राष्ट्र की एकता व अखंडता तथा सुरक्षा के लिए खतरा बने संगठन एवं व्यक्ति स्वीकार्य नहीं हैं.’’ कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने निर्णय का स्वागत किया और कहा कि इस कदम से सभी ‘‘राष्ट्र विरोधी तत्वों’’ को यह संदेश जाएगा कि इस देश में उनके लिए कोई जगह नहीं है. इसके अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया दी.

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