कोच्चि/नयी दिल्ली. केरल उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और इसके पूर्व महासचिव को निर्देश दिया कि वे गत 23 सितंबर को हड़ताल संबंधी हिंसा के कारण संपत्ति को हुए नुकसान को लेकर गृह विभाग में क्षतिपूर्ति के रूप में 5.2 करोड़ रुपये जमा करायें. अदालत ने कहा कि हड़ताल के दौरान हुई हिंसा के लिए पीएफआई को निश्चित तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.
मुआवजे की इस राशि का आकलन केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) और राज्य सरकार की ओर से किया गया है. बसों को हुए नुकसान और सेवाओं में कटौती को लेकर केएसआरटीसी ने क्षतिपूर्ति की इस राशि की मांग की है. अदालत ने चिंता जताया कि राज्य प्रशासन ने हड़ताल आयोजकों को अनुचित मांग के साथ आगे बढ़ने और सड़क जाम करने से रोकने के लिए कुछ नहीं किया, जबकि वर्ष 2019 का उच्च न्यायालय का आदेश इसके खिलाफ है.
अदालत ने कहा कि हड़ताल संबंधित हिंसा और संपत्ति को हुए नुकसान को लेकर दर्ज सभी मामलों में संगठन के पूर्व महासचिव अब्दुल सत्तार को आरोपी बनाया जाए. न्यायमूर्ति ए के जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति मोहम्मद नियास सी पी की पीठ ने निर्देश दिया कि मजिस्ट्रेट या सत्र अदालतों को हड़ताल संबंधी हिंसा के किसी भी आरोपी की जमानत पर विचार करते समय ऐसी शर्त लगानी चाहिए कि उन्हें कोई राहत देने से पहले उनके द्वारा किये गये नुकसान की क्षतिपूर्ति पर जोर दिया जा सके.
अदालत ने कहा कि मीडिया की खबरों से खुलासा होता है कि 23 सितंबर को हालात से निपटने को लेकर पुलिस ने निष्क्रिय भूमिका निभाई. अदालत ने कहा कि निर्धारित समय के भीतर राशि जमा करने में विफल रहने पर राज्य सरकार पीएफआई और अब्दुल सत्तार समेत इसके अन्य कार्यकर्ताओं की संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राजस्व वसूली अधिनियम के तहत तत्काल कदम उठाएगी, ताकि 5.2 करोड़ रुपये की वसूली की जा सके.
अदालत ने कहा क प्रतिवादी आगे भी इस तरह की राशि के लिए उत्तरदायी होंगे जो दावा आयुक्त के समक्ष न्यायिक कार्यवाही के दौरान दावेदारों के पक्ष में देय पाई जाती हैं. अदालत ने पीडी सारंगधरन को दावा आयुक्त नियुक्त किया और राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि उनका कार्यालय तीन सप्ताह के भीतर पूरी तरह काम करने लगे.
केएसआरटीसी ने अपनी यचिका में यह दलील दी है कि हड़ताल बिना कोई अग्रिम सूचना दिए की गई, जो कि उच्च न्यायालय के उन आदेशों का उल्लंघन है जिसके तहत अचानक की जाने वाली हड़ताल को अवैध करार देते हुए कहा गया था कि इसके लिए सात दिन पूर्व नोटिस देना होगा. परिवहन निगम की ओर से दावा किया गया कि हड़ताल के हिंसक होने से 58 बसों में खिड़कियों के शीशों और सीटों को नुकसान पहुंचाया गया तथा उसके 10 कर्मचारियों के अलावा एक यात्री भी घायल हुआ.
पीएफआई का ट्विटर खाता बंद किया गया
आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकवादी संगठन के साथ कथित ‘‘संबंधों’’ और देश में साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश करने को लेकर सरकार द्वारा ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ को पांच साल के लिए प्रतिबंधित किए जाने के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को उसका ट्विटर खाता बंद कर दिया गया.
ट्विटर पेज पर एक संदेश में कहा गया, ‘‘खाता बंद कर दिया गया है. पीएफआई के खाते को कानूनी मांग पर भारत में बंद कर दिया गया है.’’ पीएफआई पर देश के साम्प्रदायिक और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को ‘‘बिगाड़ने’’ और अपनी कट्टरपंथी विचारधारा को आगे बढ़ाने एवं हिंदू कार्यकर्ताओं को लक्ष्य बनाकर उनकी कथित रूप से हत्या करने के अलावा भारत में राजनीतिक इस्लाम की स्थापना का आह्वान करके राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘‘गंभीर खतरा’’ पैदा करने का आरोप लगाया गया है.
गृह मंत्रालय ने आरोप लगाया कि पीएफआई आतंकवाद आधारित एक प्रतिगामी शासन को प्रोत्साहित कर रहा है और उसे लागू करने की कोशिश कर रहा है, वह देश विरोधी भावनाओं का प्रचार करता है और देश के खिलाफ नाराजगी पैदा करने के लिए समाज के एक विशेष वर्ग को कट्टरपंथी बना रहा है और वह ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है जो देश की अखंडता, सुरक्षा एवं संप्रभुता के लिए हानिकारक हैं.
पीएफआई यहूदियों पर हमले का षड्यंत्र रचा था: एनआईए अधिकारी
राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की जांच के अनुसार, ‘पॉपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया’ (पीएफआई) राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में युवाओं को शामिल करने के लिए सोशल मीडिया का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल कर रहा था और अब प्रतिबंधित किए जा चुके इस संगठन के एक मॉड्यूल ने तमिलनाडु के पहाड़ी इलाके वट्टक्कनल में आने वाले विदेशियों, खासकर यहूदियों पर हमला करने की तैयारी भी कर ली थी.
एनआईए के अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी की जांच के अनुसार, इस मॉड्यूल में करीब 15 युवा और दक्षिणी राज्यों में उनसे जुड़े लोग शामिल थे. इनमें अधिकतर पीएफआई के सदस्य या वे लोग शामिल थे, जो वैश्विक आतंकवादी संगठन आईएसआईएस का समर्थन करते हैं. इस मॉड्यूल ने भारत में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के इरादे से उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अहमदिया समुदाय के मुसलमानों पर हमला करने की भी साजिश रची थी.
अधिकारियों ने बताया कि मॉड्यूल ने महत्वपूर्ण व्यक्तियों और सार्वजनिक महत्व के स्थानों को लक्षित करने के लिए विस्फोटक और अन्य विनाशकारी सामग्री एकत्र करके सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए आपराधिक साजिश रची थी. उन्होंने बताया कि मॉड्यूल – अंसार-उल-खिलाफा केरल – आईएसआईएस / आईएसआईएल में शामिल करने के लिए मुस्लिम युवाओं को भर्ती करने, उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित करने और कट्टरपंथी बनाने के एक गुप्त अभियान में शामिल था. उन्होंने बताया कि इससे जुड़े लोगों ने आईएसआईएस की विचारधारा के प्रचार के लिए विभिन्न इंटरनेट आधारित मंचों का इस्तेमाल किया.
जांचकर्ताओं द्वारा की गई सक्रिय निगरानी के दौरान मंसीद, स्वालित मोहम्मद, राशिद अली सफवान और जसीम एन नामक पांच संदिग्धों का पता लगाया गया. उन्हें दो अक्टूबर, 2016 को केरल के कन्नूर जिले से उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वे कथित रूप से सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने के लिए बैठक कर रहे हैं.
अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों के आवास पर बाद में छापा मारा गया और वहां से डिजिटल उपकरणों एवं दस्तावेजों सहित अन्य सामग्री जब्त की गई. उन्होंने बताया कि आरोपियों को हिरासत में लेकर की गई पूछताछ से पता चला कि उन्होंने भारत के भीतर और बाहर अन्य साजिशकर्ताओं के साथ मिलकर फेसबुक एवं टेलीग्राम आदि जैसे सोशल मीडिया मंचों पर कथित रूप से सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए संवाद किया था.
इनमें से एक आरोपी स्वालित मोहम्मद ने खुलासा किया कि उनकी गतिविधियों के वित्त पोषण के लिए उन्हें संयुक्त अरब अमीरात में अपने सहयोगियों से धन मिलता था. अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने आईएसआईएस की विचारधारा का प्रत्यक्ष रूप से और सोशल मीडिया के जरिए प्रचार किया एवं साजिश रची और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए सदस्यों की भर्ती की. उन्होंने ‘द गेट’, ‘बाब अल नूर’, ‘प्ले ग्राउंड’ आदि जैसे विभिन्न टेलीग्राम समूह बनाए थे.
अधिकारियों के अनुसार, जांच से पता चला कि आरोपियों ने साजिश रची और कोडाईकनाल के निकट वट्टक्कनल आने वाले विदेशियों, खासकर यहूदियों पर, केरल में कोझिकोड के प्रमुख राजनीतिक नेताओं पर और कोच्चि में जमात-ए-इस्लामी के एक कार्यक्रम पर हमला करने की तैयारी की.
वट्टक्कनल तमिलनाडु के ंिडडीगुल जिले में एक छोटा पर्वतीय क्षेत्र है, जहां हर साल सैकड़ों इजराइली युवा इजराइल में अनिवार्य सैन्य सेवा के बाद छुट्टियां मनाने आते हैं. एनआईए की जांच में यह भी पाया गया है कि भारत में आईएसआईएस के आतंकवादी नेटवर्क के लिए काम कर रहे केरल निवासी शाजहां ने कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पहले तुर्की/सीरिया की भी यात्रा की थी और उसे वहां से निर्वासित कर दिया गया था.
एनआईए ने पाया कि शाजहां नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट में शामिल हो गया था, जो कि पीएफआई का शुरुआती रूप था. अधिकारियों ने बताया कि वह हारिस, शबीर, मनफ, मुस्तफा, सादिक, शाजिल जैसे पीएफआई नेताओं के संपर्क में आया. वह 2008 में सभी पीएफआई बैठकों में शामिल हुआ था जहां भारत तथा दुनिया के अन्य हिस्सों में ‘काफिरों’ द्वारा मुस्लिमों पर किए जा रहे अत्याचारों पर चर्चा होती थी.