शिवसेना विवाद: पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न पर रोक के फैसले के खिलाफ उद्धव पहुंचे अदालत

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 10 Oct 2022 07:47 PM
शिवसेना विवाद: पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न पर रोक के फैसले के खिलाफ उद्धव पहुंचे अदालत
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नयी दिल्ली/मुंबई. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी का नाम ‘शिवसेना’ और चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ के उपयोग पर रोक लगाए जाने के निर्वाचन आयोग के आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया.
ठाकरे द्वारा दायर याचिका में आयोग के आठ अक्टूबर के आदेश को चुनौती दी गई है. इसमें दलील दी गई है कि यह आदेश नैर्सिगक न्याय के सिद्धांतों का पूर्ण उल्लंघन करते हुए और पक्षों को सुने बगैर और उन्हें साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिए बिना जारी किया गया.

आयोग ने आठ अक्टूबर के अपने अंतरिम आदेश में शिवसेना के उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री एकनाथ ंिशदे नीत खेमों के पार्टी का नाम और इसके चुनाव चिह्न का उपयोग करने पर रोक लगा दी थी. प्रतिद्वंद्वी खेमों द्वारा किए गये दावे के बाद अंतरिम आदेश जारी करते हुए आयोग ने उनसे सोमवार तक अपनी पसंद के तीन-तीन वैकल्पिक नाम (पार्टी के) और चिह्न सुझाने को कहा था.

विधानसभा की अंधेरी ईस्ट सीट पर होने जा रहे उपचुनाव के नजदीक आने पर ‘धनुष-बाण’ चिह्न आवंटित करने के ंिशदे खेमे के अनुरोध के बाद यह अंतरिम आदेश आया था. ठाकरे की याचिका में निर्वाचन आयोग और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ ंिशदे को पक्षकार बनाया गया है. याचिका के जरिए आयोग के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया गया है. साथ ही, ठाकरे द्वारा प्रस्तावित चिह्नों में से एक चिह्न आवंटित करने पर विचार करने का आग्रह किया गया है.

याचिका में कहा गया है कि विधानसभा की अंधेरी ईस्ट सीट पर उपचुनाव के लिए जारी की गई अधिसूचना के मुताबिक नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 14 अक्टूबर और मतदान की तारीख तीन नवंबर 2022 है, ऐसे में यदि उक्त आदेश पर रोक नहीं लगाया गया तो यह याचिकाकर्ता (ठाकरे) और उनकी पार्टी के लिए गंभीर पूर्वाग्रह होगा.

अन्नाद्रमुक के ‘दो पत्ती’ चुनाव चिह्न तथा जनता दल (यूनाइटेड) और समाजवादी पार्टी के बीच इसी तरह के तकरार का उदाहरण देते हुए याचिका में कहा गया है कि इन सभी मामलों में आयोग ने पक्षों को सुनने के बाद ही फैसला सुनाया था. याचिका में कहा गया है कि इस मामले में निर्वाचन आयोग ने अनुचित जल्दबाजी दिखाई और उद्धव ठाकरे नीत पार्टी शिवसेना के चिह्न ‘धनुष-बाण’ के उपयोग पर रोक लगाने का आदेश जारी किया. इसमें कहा गया है कि शिवसेना 1966 में गठन होने के बाद से ही इस चिह्न का उपयोग करती आ रही है. अंधेरी ईस्ट विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में ठाकरे खेमे ने अपने लिए तीन चिह्न सुझाए हैं जिनमें त्रिशूल, उगता सूरज और मशाल शामिल हैं.

उद्धव एवं शिंदे खेमों ने निर्वाचन आयोग को वैकल्पिक चिह्न और नाम सुझाए, शीघ्र मंजूरी की संभावना

शिवसेना के उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे नीत खेमों ने निर्वाचन आयोग को अपनी पसंद के तीन-तीन वैकल्पिक चिह्न और नाम औपचारिक रूप से सौंप दिए हैं. आयोग ने शनिवार रात पार्टी का ‘धनुष-बाण’ चिह्न पर रोक लगा दी थी और दोनों खेमों को वैकल्पिक चिह्न और पार्टी नाम का सुझाव देने को कहा था. आयोग के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि वैकल्पिक चिह्न और नाम दोनों खेमों ने सौंप दिए हैं.

निर्वाचन आयोग अब यह पड़ताल करेगा कि इन चिह्नों का इस्तेमाल कोई अन्य पार्टी तो नहीं कर रही है. आयोग यह भी जांच करेगा कि इन चिह्नों के इस्तेमाल पर कहीं उसने रोक तो नहीं लगा रखी है. निर्वाचन आयोग के एक पूर्व पदाधिकारी ने कहा, ‘‘चिह्न आवंटित करना आयोग का विशेषाधिकार है. इस तरह के मामलों में, यह (आयोग) ऐसा चिह्न आवंटित कर सकता है जो राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के पास उपलब्ध स्वतंत्र चिह्नों की सूची में शामिल नहीं है.’’ शनिवार को, आयोग ने शिवसेना के दोनों खेमों को तीन नवंबर को अंधेरी ईस्ट विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से प्रतिबंधित कर दिया था.

पार्टी पर नियंत्रण के लिए प्रतिद्वंद्वी खेमों के दावे को लेकर एक अंतरिम आदेश में आयोग ने उन दोनों से सोमवार तक अपनी पसंद के तीन अलग-अलग नाम और चिह्न बताने को कहा था. रविवार को, ठाकरे ने आयोग से उपचुनाव से पहले बगैर देर किए तीन चिह्नों–त्रिशूल,मशाल और उगते सूरज–में से एक चिह्न और नाम आवंटित करने का अनुरोध किया था.

ठाकरे खेमा यह उपचुनाव लड़ रहा है. शिंदे खेमे की सहयोगी भारतीय जनता पार्टी ने भी यह उपचुनाव लड़ने का फैसला किया है.
नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 14 अक्टूबर है, ऐसे में दोनों खेमों के वैकल्पिक चिह्न और नामों पर आयोग के शीघ्र फैसला करने की संभावना है.

निर्वाचन आयोग के ‘क्रूर’ फैसले के बाद भी वापसी करेंगे : शिवसेना के उद्धव धड़े ने कहा

शिवसेना ने सोमवार को कहा कि वह कभी नहीं बुझने वाली मशाल है और पार्टी का नाम एवं चुनाव चिह्न के उपयोग पर रोक लगाने के निर्वाचन आयोग के फैसले के बाद भी वह वापसी करेगी. उद्धव ठाकरे धड़ा ने निर्वाचन आयोग (ईसी) के फैसले को “अन्याय” करार दिया है.

निर्वाचन आयोग ने अंधेरी ईस्ट विधानसभा सीट पर तीन नवंबर को होने वाले उपचुनाव में शिवसेना के उद्धव ठाकरे और एकनाथ ंिशदे नीत दोनों गुटों के पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न का उपयोग करने पर शनिवार को पाबंदी लगा दी थी. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में एक संपादकीय में कहा, ‘‘यह (निर्वाचन आयोग का फैसला) पाप दिल्ली ने किया. बेईमान लोगों ने यह बेईमानी की. लेकिन हम इतना ही कहेंगे कि कितना भी संकट आ जाए,हम खड़े ही रहेंगे.’’ संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि निर्वाचन आयोग ने शिवसेना के मामले में क्रूर फैसला दिया है और बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित की गई शिवसेना का नामोनिशान खत्म करने की कोशिश की गई है.

इसमें कहा गया है, ‘‘निर्वाचन आयोग ने ऐसा निर्णय देकर महाराष्ट्र में घना अंधेरा ला दिया है. बालासाहेब ठाकरे ने 56 साल पहले मराठी अस्मिता व मराठी लोगों के न्याय व अधिकार के लिए एक अलख जगाई. उस शिवसेना का अस्तित्व खत्म करने के लिए एकनाथ ंिशदे और उनके 40 सहयोगी दिल्ली के गुलाम बन गए हैं.’’

संपादकीय में आगे कहा गया है कि ंिशदे और उनके धड़े के विधायकों के नाम महाराष्ट्र के इतिहास में ‘काली स्याही’ से लिखे जाएंगे. पार्टी ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री पद और कुछ मंत्री पद की सौदेबाजी में महाराष्ट्र का स्वाभिमान बेचने वाले इन लोगों के आगे औरंगजेब की ‘दुष्टता’ भी फीकी पड़ जाएगी.’’ संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि भारतीय जनता पार्टी इन सबकी सूत्रधार है और उसके ही एक नेता ने कहा था कि ढाई साल से शिवसेना को तोड़ने की कोशिश की जा रही थी.

पार्टी ने कहा, ‘‘शिवसेना को जमीन दिखाएंगे, ऐसा (केंद्रीय गृह मंत्री) अमित शाह कहते थे. शिवसेना रही ही नहीं, ऐसा (देवेंद्र) फडणवीस ने घोषित किया. वे शिवसेना से मैदान में लड़ नहीं सकते थे, इसलिए उन्होंने न्यायालय और निर्वाचन आयोग के कंधे पर बंदूक रखकर शिवसेना पर गोली दागी.’’

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