चित्रदुर्ग. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि वह सरकारी संपत्तियों के “बड़े पैमाने पर निजीकरण” के विचार से सहमत नहीं हैं और सत्ता में आने पर उनकी पार्टी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के निजीकरण की अनुमति नहीं देगी. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि सत्ता में आने पर उनकी पार्टी राष्ट्रीय एवं राज्य – दोनों स्तरों पर एक रणनीति बनाएगी जिससे युवाओं के लिए रोजगार सुनिश्चित होगा.
गांधी ने कहा, “मैं सरकारी संपत्तियों के बड़े पैमाने पर निजीकरण से सहमत नहीं हूं और अगर हम सत्ता में आते हैं तो हम सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बड़े पैमाने पर निजीकरण की अनुमति नहीं देंगे.” कांग्रेस नेता इन दिनों ‘भारत जोड़ो यात्रा’ कर रहे हैं और इस क्रम में उन्होंने कर्नाटक के करीब 1,800 युवाओं के साथ बेरोजगारी पर बातचीत की. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों से ही कमजोर वर्गों को रोजगार मिल सकता है.
उन्होंने कहा, “सार्वजनिक क्षेत्र की जिन इकाइयों को संचालन के लिए सही स्थान और सही माहौल दिया जाता है, जिन्हें ठीक से संचालित करने की आजादी दी जाती है, वे काफी अच्छा काम करती हैं.” कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश, महासचिव एवं पार्टी के कर्नाटक प्रभारी रणदीप ंिसह सुरजेवाला , प्रदेश कांग्रेस प्रमुख डी. के. शिवकुमार सहित अन्य लोग इस कार्यक्रम में मौजूद थे.
राहुल गांधी ने कहा कि रोजगार सृजन के लिए एक रणनीति होनी चाहिए और “नौकरियां उस तरीके से पैदा नहीं होती हैं, हम राष्ट्रीय एवं राज्य दोनों स्तरों पर एक रणनीति बनाएंगे जो सुनिश्चित करेगी कि लाखों युवाओं को रोजगार मिले.’’
उन्होंने कहा कि सबसे पहले सरकारी क्षेत्र में खाली पदों को भरने से नौकरियां मिल सकती हैं, और इसके लिए उनकी पार्टी पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए पहली जगह जहां बड़ी संख्या में नौकरियां मिल सकती हैं, वह स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा क्षेत्र है. कांग्रेस सरकार लोक स्वास्थ्य और सार्वजनिक शिक्षा पर सबसे अधिक पैसा खर्च करेगी और ये सरकारी नौकरियां होंगी.”
कांग्रेस नेता ने कहा कि देश में निजी क्षेत्र की नौकरियों में सबसे अधिक संख्या छोटे और मध्यम व्यवसायों से आती है. उन्होंने कहा कि जब उनकी पार्टी सत्ता में होगी तो अधिक संतुलित नीति तैयार की जाएगी और छोटे और मध्यम व्यवसायों का समर्थन करेगी एवं उन्हें बैंकों से वित्तपोषण कराया जाएगा. राहुल गांधी ने जोर दिया कि कोई समाज जो सौहार्दपूर्ण नहीं है, जहां शांति नहीं है और जहां ंिहसा है, वह आर्थिक रूप से प्रगति नहीं कर सकता और न ही अपने युवाओं को रोजगार दे सकता है.
भारत जोड़ो यात्रा: राहुल गांधी अंगदान करने वाले लोगों के परिजनों के साथ आगे बढ़े
‘भारत जोड़ो यात्रा’ पर निकले कांग्रेस नेता राहुल गांधी अंगदान की अहमियत पर जोर देने के लिए अंगदान करने वाले लोगों के परिवार के सदस्यों के साथ बुधवार को पैदल चले. पार्टी ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के साथ चलने वाले करीब 33 ‘यात्रियों’ ने अपनी आंखें दान करने का संकल्प लिया है.
एक विज्ञप्ति के मुताबिक, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित दिवंगत अभिनेता संचारी विजय के परिवार के सदस्यों ने राहुल गांधी के साथ मार्च किया. संचारी की मौत एक मोटरसाइकिल दुर्घटना में हो गई थी. उनके अलावा, चिक्कमंगलुरु जिले की छात्रा रक्षिता और वेदा मंजूनाथ के परिवार के सदस्यों ने भी कांग्रेस नेता के साथ मार्च किया. रक्षिता की एक बस से गिरने के बाद सिर में चोट लगने से मृत्यु हो गयी थी जबकि मंजूनाथ हुबली धारवाड़ बाईपास पर एक दुर्घटना का शिकार हो गये थे.
बाद में फेसबुक पर किए गए एक पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें इन अंग दाताओं के बहादुर परिजनों के साथ चलने का सौभाग्य मिला और वे सहानुभूति और मानवता के प्रतीक हैं. उन्होंने कहा, ‘‘ उनके जाने की यह कोई उम्र नहीं थी. रक्षिता, वेदा और विजय बहुत जल्दी चले गए. मौत के बाद भी, उन्होंने जीवन बचाने के लिए अपने अंग दान करके दूसरों को खुशी का उपहार दिया है. यह प्रेम और बलिदान का सुंदर भाव है. यह देखभाल और करुणा की मानवीय भावना है जिसे हमें विकसित करना चाहिए और संजोना चाहिए.’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह (जीवन) इतना मूल्यवान है कि इसे कुछ लोगों के घृणापूर्ण और लालची षडयंत्रों में (नहीं) गंवाया जाए.’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि कन्नड़ के दिवंगत अभिनेता राजकुमार और उनके अदाकार बेटे दिवंगत पुनीत राजकुमार ने भी अपनी आंखें दान देकर निस्वार्थ कार्य किया जिससे लाखों कन्नड़ भाषियों और अन्य को प्रेरणा मिली तथा अंग दान की अहमियत के प्रति लोगों में जागरुकता फैली.
उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे आपको यह बताते हुए बहुत गर्व हो रहा है कि 33 भारत यात्रियों ने कर्नाटक की खूबसूरत जमीन से अपनी आंखें दान देने का संकल्प लिया है.’’ राहुल गांधी ने कहा, ‘‘सद्भाव, भाईचारे और मानवता की भावना में असीम प्रेम और आनंद है.’’ यात्रा अपने 35वें दिन छल्लाकेरे से शुरू हुई और दिन में ऐतिहासिक चित्रदुर्ग जिले से गुजÞरी.