पार्टी में कोई छोटा और बड़ा नहीं, सबको साथ लेकर फासीवादी ताकतों से लड़ना है: खरगे

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 19 Oct 2022 08:40 PM
पार्टी में कोई छोटा और बड़ा नहीं, सबको साथ लेकर फासीवादी ताकतों से लड़ना है: खरगे
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नयी दिल्ली/बेंगलुरु. कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को कहा कि पार्टी में कोई भी बड़ा या छोटा नहीं है तथा सबको साथ लेकर संगठन को मजबूत बनाएंगे और ‘फासीवादी ताकतों’ से लड़ेंगे. खरगे ने पार्टी अध्यक्ष निर्वाचित होने के तुरंत बाद एक संवाददाता सम्मेलन में यह भी कहा कि उनके लिए कांग्रेस का हर कार्यकर्ता समान है एवं लोकतंत्र और संविधान को खतरे में डालने वाली ताकतों से लड़ना होगा और देश एक तानाशाह की सनक की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता.

खरगे ने कहा कि कोई भी सदस्य छोटा या बड़ा नहीं है और कांग्रेस को मजबूत बनाने के लिए सभी को कार्यकर्ता के रूप में मिलकर काम करना होगा. उन्होंने कहा, “लोकतंत्र और संविधान के लिए खतरों से हमें साथ मिलकर लड़ना है.’’ खरगे औपचारिक रूप से 26 अक्टूबर को पार्टी अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालेंगे.

उनका कहना था, ‘‘आज जब संविधान और लोकतंत्र पर हमले हो रहे हैं तो उस समय कांग्रेस ने संगठन का चुनाव कराकर लोकतंत्र को मजबूत बनाने का उदाहरण प्रस्तुत किया है. कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के सफल आयोजन के लिए सभी डेलीगेट, वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं का आभार प्रकट करता हूं.’’ खरगे ने कहा, ‘‘अपने साथी शशि थरूर को भी शुभकामनाएं देता हूं क्योंकि वह इस चुनाव में प्रतिनिधि के तौर पर खड़े थे. चुनाव अच्छा चला. वो आकर मुझसे मिले और कहा कि मिलकर काम करना है. उन्हें धन्यवाद देता हूं.’’

उन्होंने कहा, मैं कांग्रेस कार्यकर्ताओं की तरफ से सोनिया जी का आभार प्रकट करता हूं. सोनिया जी ने व्यक्तिगत त्याग करके कांग्रेस को अपने खून-पसीने से सींचा. उनके नेतृत्व में दो बार केंद्र में सरकार बनी और कई राज्यों में सरकार बनी. उनका कार्यकाल हमेशा याद रखा जाएगा.’’ खरगे ने कहा, ‘‘आज देश के सामने सबसे बड़ी समस्याएं महंगाई, बेरोजगारी और फैलाई जा रही नफरत है. इनके खिलाफ लड़ने के लिए राहुल गांधी जी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ पर निकले हैं. आज पूरा देश उनके संघर्ष से जुड़ रहा है. मैं सभी लोगों से इस यात्रा में जुड़ने की अपील करता हूं.’’

उन्होंने बताया, ‘‘राहुल गांधी ने मुझसे फोन पर कहा कि मैं कांग्रेस के सिपाही के रूप में काम करता रहूंगा.’’ खरगे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में बैठे हुए लोगों का चरित्र ‘थोथा चना, बाजे घना’ है. उन्होंने कहा, ‘‘ हमारा मानना है कि यह देश एक तानाशाह की सनक की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता. हमें इकट्ठे होकर इन विनाशकारी ताकतों को हराना है.’’ खरगे का कहना था, ‘‘पार्टी के सभी दोस्तों को संसद से सड़क तक लड़ना होगा. बूथ स्तर तक संगठन के हर साथी को जोर से संघर्ष करना है. मुझे विश्वास है कि जैसे आपने मुझ पर भरोसा जताया है, और गरीब परिवार में जन्मे एक व्यक्ति को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया है, मैं आपके भरोसे पर खरा उतरूंगा.’’

गांधी परिवार के विश्वस्त खरगे ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की जगह ली
गांधी परिवार के विश्वस्त कर्नाटक निवासी मापन्ना मल्लिकार्जुन खरगे 24 साल में गांधी परिवार के बाहर कांग्रेस के पहले अध्यक्ष हैं. खरगे (80) ने कांग्रेस में सोनिया गांधी की जगह ली है. खरगे ने तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर को हराया है. कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 17 अक्टूबर को मतदान हुआ था जिसमें देश भर के 9500 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने वोट डाले.

राजनीति में 50 साल से अधिक समय से सक्रिय खरगे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के अध्यक्ष बनने वाले एस निजांिलगप्पा के बाद कर्नाटक के दूसरे नेता और जगजीवन राम के बाद इस पद पर पहुंचने वाले दूसरे दलित नेता भी हैं. लगातार नौ बार विधायक चुने गये खरगे के सियासी सफर का ग्राफ उत्तरोत्तर चढ़ाव दिखाता है. उन्होंने अपना सियासी सफर गृह जिले गुलबर्ग (कलबुर्गी) में एक यूनियन नेता के रूप में किया. वर्ष 1969 में वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और गुलबर्ग शहरी कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने.

चुनावी मैदान में खरगे अजेय रहे और वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कर्नाटक खासकर हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र में नरेंद्र मोदी लहर के बावजूद गुलबर्ग से 74 हजार मतों के अंतर से जीत हासिल की. उन्होंने वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव के मैदान में कूदने से पहले गुरुमितकल विधानसभा क्षेत्र से नौ बार जीत दर्ज की. वह गुलबर्ग से दो बार लोकसभा सदस्य रहे.

हालांकि, वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में खरगे को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता उमेश जाधव के हाथों गुलबर्ग में 95,452 मतों से हार का सामना करना पड़ा. अपने गृह राज्य कर्नाटक में ‘सोलिल्लादा सरदारा’ (कभी नहीं हारने वाला नेता) के रूप में मशहूर खरगे के कई दशकों के सियासी सफर में यह उनकी पहली हार थी.

गांधी परिवार के विश्वस्त माने जाने जाने वाले खरगे ने कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली जिससे एक प्रशासक के तौर पर उनका अनुभव समृद्ध हुआ. खरगे ने कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाने के अलावा वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) प्रमुख के रूप में काम किया.

लोकसभा में वर्ष 2014 से 2019 तक खरगे कांग्रेस के नेता रहे, हालांकि वह लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता नहीं बन सके क्योंकि कांग्रेस सांसदों की संख्या सदन की कुल संख्या की 10 प्रतिशत से कम थी. मनमोहन ंिसह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में खरगे ने केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में श्रम एवं रोजगार, रेलवे और सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग संभाला. उन्होंने राज्य में शासन करने वाली लगातार कांग्रेस सरकारों में विभिन्न विभागों का कार्यभार संभाला था.

कर्नाटक में जब एस एम कृष्णा मुख्यमंत्री थे तो उस वक्त खरगे राज्य के गृह मंत्री रहे. उनके कार्यकाल में कन्नड़ अभिनेता राजकुमार का कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन ने अपहरण कर लिया था, उसी दौरान कावेरी जल विवाद भी छाया था. इन दोनों मुद्दों से राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हुई.

जून, 2020 में खरगे कर्नाटक से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए और कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव में उतरने से पहले हाल तक उच्च सदन में विपक्ष के 17वें नेता थे. खरगे ने पिछले साल फरवरी में गुलाम नबी आजाद की जगह ली. खरगे को कई बार कर्नाटक में मुख्यमंत्री बनने के शीर्ष दावेदार के रूप में देखा गया, लेकिन वह कभी इस पद पर नहीं पहुंच पाए. जब कभी कर्नाटक में उनको दावेदार के रूप में पेश करके दलित मुख्यमंत्री की बात उठी तो उन्होंने कई बार कहा, ‘‘आप क्यों बार-बार दलित कहते रहते हैं? ऐसा मत कहिये. मैं एक कांग्रेसी हूं.’’

मिजाज और स्वभाव से सौम्य खरगे कभी किसी बड़ी राजनीतिक समस्या या विवाद में नहीं फंसे. बीदर के वारावट्टी में एक गरीब परिवार में जन्मे खरगे ने स्कूली पढ़ाई के अलावा स्रातक और वकालत की पढ़ाई कलबुर्गी में की. राजनीति में आने से पहले वह वकालत के पेशे में थे. वह बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं और कलबुर्गी में बुद्ध विहार परिसर में निर्मित सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट के संस्थापक-अध्यक्ष हैं.

उन्होंने 13 मई, 1968 को राधाबाई से विवाह रचाया और दोनों के दो पुत्रियां और तीन बेटे हैं. उनके एक बेटे प्रियांक खरगे विधायक हैं और कर्नाटक में मंत्री रहे हैं. नरेंद्र मोदी नीत सरकार के मुखर आलोचक खरगे के कांग्रेस का नेतृत्व करने से कार्यकर्ताओं को बढ़ावा मिलने और राज्य में पार्टी नेतृत्व को एकजुट करने की उम्मीद है, जहां अगले साल अप्रैल तक विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.

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