जयपुर. राजस्थान में राजसमंद जिले के नाथद्वारा कस्बे में 369 फुट ऊंची शिव प्रतिमा ‘विश्वास स्वरूपम’ का शनिवार शाम को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं कथावाचक मुरारी बापू ने लोकार्पण किया. इस अवसर पर योग गुरु बाबा रामदेव, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी पी जोशी, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया सहित कई नेता मौजूद थे.
इस अवसर आयोजित होने वाली रामकथा का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि रामकथा के वाचन से समाज में प्रेम, भाईचारे व सद्भावना का सन्देश जाता है जिसकी वर्तमान समय में देश में सर्वाधिक आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कथाएं देश के कोने-कोने में आयोजित होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि विश्व की विशालतम शिव प्रतिमा के रूप में ‘विश्वास स्वरूपम’ का निर्माण किया गया है. लगभग 10 साल के अथक समर्पण और लगन से निर्मित इस सुन्दर और भव्य शिव प्रतिमा को इसके शिल्पकारों द्वारा समाज में एक सकारात्मक सन्देश देने के लिए बनाया गया है.
विधानसभा अध्यक्ष जोशी ने कहा कि 10 साल की निरंतर मेहनत व समर्पण से नाथद्वारा में विश्वास स्वरूपम की स्थापना की गई है. नगरीय विकास मंत्री शान्ति धारीवाल ने कहा कि कड़े परिश्रम से इतनी सुन्दर शिव प्रतिमा का निर्माण नाथद्वारा में किया गया है, जो विश्व की सबसे बड़ी शिव प्रतिमा है. उन्होंने कहा कि नाथद्वारा में विकास कार्यों के लिए किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी.
इस अवसर पर देशभर से प्रसिद्ध संत एवं समाजसेवी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे.
इस प्रतिमा का निर्माण तत पदम संस्थान द्वारा किया गया है. संस्थान के ट्रस्टी, उद्योगपति मदन पालीवाल ने कहा कि प्रतिमा के लोकार्पण के बाद 29 अक्टूबर से छह नवंबर तक धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे, जो नौ दिनों तक चलेगा. इस दौरान मुरारी बापू राम कथा का वाचन भी करेंगे.
एक प्रवक्ता के अनुसार नाथद्वारा की गणेश टेकरी पर 51 बीघा की पहाड़ी पर बनी इस प्रतिमा में भगवान शिव ध्यान की मुद्रा में हैं. उन्होंने दावा किया, ‘‘विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा की अपनी एक अलग ही विशेषता है. 369 फुट ऊंची यह प्रतिमा विश्व की अकेली ऐसी प्रतिमा होगी, जिसमें लिफ्ट, सीढ़ियां, श्रद्धालुओं के लिए हॉल बनाया गया है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रतिमा के अंदर सबसे ऊपरी हिस्से में जाने के लिए चार लिफ्ट और तीन सीढ़ियां बनी हैं. प्रतिमा के निर्माण में 10 वर्षों का समय और 3000 टन स्टील और लोहा, 2.5 लाख घन टन कंक्रीट और रेत का इस्तेमाल हुआ है.’’