छात्रों को प्रेरित करने के लिए अनूठी पहल कर रहा सरकारी विद्यालय

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 06 Nov 2022 07:19 PM
छात्रों को प्रेरित करने के लिए अनूठी पहल कर रहा सरकारी विद्यालय
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औरंगाबाद. महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय पढ़ाई में छात्रों की दिलचस्पी और उनकी उपस्थिति बनाए रखने के लिए नए-नए तरीके आजमा रहा है. बाबूवाड़ी-चर्था गांव में जिला परिषद द्वारा संचालित प्राथमिक विद्यालय में केवल 50 छात्र और दो शिक्षक हैं. यह गांव जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर एक छोटी पहाड़ी पर स्थित है.

पिछले कुछ वर्षों से पांचवीं कक्षा तक का यह विद्यालय बच्चों को उनकी सामाजिक जिम्मेदारियों से अवगत कराने के लिए अनूठी पहल कर रहा है, ताकि वे विद्यालय के आसपास के पर्यावरण की देखभाल कर सकें. साथ ही वह उन्हें अच्छी तरह से पढ़ाई करने के लिए भी प्रेरित कर रहा है. चाहे हर सुबह विद्यालय को साफ करने में शिक्षकों की मदद करना हो, पौधे लगाना हो या ‘नो बैग’ वाले दिनों का आनंद उठाना हो, बच्चों को विद्यालय की पहलों के कारण वहां आना काफी अच्छा लगा है.

हाल की ‘स्माइल बैज’ पहल के बारे में विद्यालय के प्रधानाचार्य सुधीर तुपे ने कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी ने छात्रों की पढ़ाई की आदत बदल दी है. ‘स्माइल बैज’ पहल यह सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई कि बच्चों को उनका होमवर्क (गृहकार्य) पूरा करने के लिए प्रेरित किया जाए.’’ उन्होंने बताया कि जो बच्चे अपना होमवर्क पूरा करते हैं, उन्हें बैज दिया जाता है तथा वे विद्यालय में इसे पहनते हैं. हर दिन के होमवर्क की जांच करने के लिए छात्रों की एक समिति बनाई गई है.

तुपे ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘विद्यालय हर दिन सुबह साढ़े नौ बजे शुरू होता है, लेकिन बच्चे परिसर को साफ करने में शिक्षकों की मदद करने के लिए आधा घंटा पहले ही आ जाते हैं.’’ छात्रों को विद्यालय आने के लिए प्रेरित रखने के वास्ते पिछले चार से पांच वर्ष से ‘नो बैग डे’ मनाया जा रहा है.

तुपे ने कहा, ‘‘नो-बैग वाले दिनों पर हम बागवानी, योग और अन्य मनोरंजक गतिविधियां करते हैं. इसने हाजिरी में सुधार लाने में मदद की है और बच्चों को विद्यालय आना पसंद आने लगा है.’’ उन्होंने बताया कि विद्यालय ने अपने आसपास के क्षेत्र को हरा-भरा रखने के लिए एक पौधारोपण अभियान भी शुरू किया है.

तुपे ने कहा, ‘‘हमने विद्यालय परिसर में 2013 के बाद से करीब 60 पौधे लगाए हैं. छात्रों की बोतलों में पानी भरा होता है और वे हर दिन घर जाते वक्त पेड़ों को पानी देते हैं.’’ उन्होंने बताया कि विद्यालय के तीन छात्रों को नवोदय विद्यालय में दाखिला मिला है, जबकि 2017 के बाद से 15 छात्रों को छात्रवृत्तियां प्राप्त हुई हैं. जिला परिषद शिक्षा अधिकारी जयश्री चव्हाण ने कहा कि विद्यालय की पहल विशिष्ट हैं और इनमें से कुछ पहलों को जिले के अन्य स्कूलों ने भी अपनाया है.

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