तीन दक्षिणी राज्यों में राज्यपाल बनाम सरकार टकराव बढ़ा, द्रमुक ने रवि को हटाने की मांग की

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 09 Nov 2022 08:56 PM
तीन दक्षिणी राज्यों में राज्यपाल बनाम सरकार टकराव बढ़ा, द्रमुक ने रवि को हटाने की मांग की
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चेन्नई/हैदराबाद/तिरुवनंतपुरम. गैर-भाजपा शासित तीन दक्षिणी राज्यों में राज्यपालों और सत्तारूढ़ सरकार के बीच टकराव बुधवार को बढ़ गया. तमिलनाडु ने आर एन रवि को वापस बुलाने की मांग की, केरल ने राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति पद पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान की जगह शिक्षाविदों को नियुक्त करने के लिए अध्यादेश मार्ग प्रस्तावित किया और तमिलिसाई सुंदरराजन ने संदेह जताया कि तेलंगाना में उनका फोन टैप किया जा रहा है.

तेलंगाना की राज्यपाल ने तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) शासित तेलंगाना में “अलोकतांत्रिक” स्थिति का दावा किया, सत्तारूढ़ द्रमुक और उसके सहयोगियों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से रवि को बर्खास्त करने की मांग करते हुए कहा कि उनके कृत्य राज्यपाल के पद के अनुरूप नहीं हैं.

केरल में सत्तारूढ़ एलडीएफ का पूर्व में राज्यपाल खान के साथ कई बार टकराव हो चुका है. एलडीएफ ने कहा कि उसने राज्य के विश्वविद्यालयों में राज्यपाल की जगह प्रतिष्ठित शिक्षाविदों को कुलाधिपति बनाने के लिए बुधवार को अध्यादेश लाने का फैसला किया. कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों ने इस फैसले का विरोध किया है.

मुख्यमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला किया गया कि खान से अध्यादेश को मंजूरी देने की सिफारिश की जाएगी जो विश्वविद्यालय कानूनों में कुलापधिपति की नियुक्ति से संबंधित धारा को हटा देगा. इस धारा में कहा गया है कि राज्यपाल राज्य के 14 विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी होंगे.

उसने कहा कि बैठक में भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश मदन मोहन पुंछी की अध्यक्षता वाले पुंछी आयोग की सिफारिशों पर भी विचार किया गया कि राज्यपाल को विश्वविद्यालयों का प्रमुख नियुक्त करना ठीक नहीं होगा क्योंकि संविधान के तहत उनके अन्य दायित्व भी हैं.

बयान के अनुसार आयोग की सिफारिशों और राज्यपाल द्वारा राज्य में उच्च शिक्षा को दिये गये महत्व के मद्देनजर विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में प्रतिष्ठित शिक्षाविदों की नियुक्ति का फैसला किया गया है. राज्य की उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदू ने संवाददाताओं से बातचीत में इसकी पुष्टि की. उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्य में उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालयों में सुधार के लिए यह फैसला किया है.

क्या राज्यपाल खान इस अध्यादेश पर हस्ताक्षर करेंगे, इस सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राज्यपाल अपने संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप काम करेंगे. तमिलनाडु के संबंध में, सत्तारूढ़ द्रमुक के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) ने राज्यपाल रवि को बर्खास्त करने की मांग करते हुए राष्ट्रपति भवन का दरवाजा खटखटाया और आरोप लगाया गया कि उन्होंने ‘‘सांप्रदायिक घृणा को भड़काया है.’’

गठबंधन के संसद सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित और राष्ट्रपति कार्यालय को प्रस्तुत अर्जी में राजभवन के पास लंबित विधेयकों को भी सूचीबद्ध किया गया है और स्वीकृति के लिए देरी पर सवाल उठाया गया. इन विधेयकों में राज्य को नीट मेडिकल परीक्षा के दायरे से छूट देने के प्रावधान वाला विधेयक भी शामिल है.

रवि और एम के स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार नीट और 23 अक्टूबर को कोयंबटूर कार विस्फोट मामले की जांच राष्ट्रीय जांच अभिकरण (एनआईए) को सौंपने में राज्य सरकार द्वारा ‘देरी’ पर उनकी हालिया टिप्पणी सहित कई मुद्दों को लेकर उनके और राज्य सरकार के बीच टकराव है.

सांसदों ने नौ पृष्ठों के ज्ञापन में कहा है, , ‘‘रवि भूल जाते हैं कि तमिलनाडु के लोगों के लिए क्या अच्छा है, यह तय करने के लिए उन्होंने तमिलनाडु में कोई चुनाव नहीं जीता है. स्पष्ट रूप से, (श्री) आर एन रवि ने संविधान और कानून के संरक्षण, रक्षा और बचाव के लिए और तमिलनाडु के लोगों की सेवा और भलाई के लिए खुद को सर्मिपत करने के लिए अनुच्छेद 159 के तहत ली गई शपथ का उल्लंघन किया है.’’

इसमें कहा गया है, ‘‘इससे बहुत दूर, वह सांप्रदायिक घृणा को भड़का रहे हैं, और यह राज्य की शांति एक खतरा है …. इसलिए अपने आचरण और कार्यों से, श्री आर एन रवि ने साबित कर दिया है कि वह राज्यपाल के संवैधानिक पद पर बने रहने के लिए अयोग्य हैं और इसलिए उन्हें तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए.’’ इसमें दावा किया गया है, अतीत में भी उन्होंने सनातन धर्म की प्रशंसा करने, तमिल रचना ‘तिरुक्कुरल’ के साम्प्रदायिकरण और द्रविड़ विरासत एवं तमिल गौरव के खिलाफ टिप्पणी की हैं. इसमें कहा गया है कि इन बयानों ने तमिल भावना और गौरव को गहरे घाव दिये हैं.

इसमें कहा गया है कि राज्यपाल का दिमाग किसी भी राजनीतिक पसंद या नापसंद या दलगत राजनीति या उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद भविष्य की नियुक्तियों की उम्मीदों से मुक्त होना चाहिए. अतीत में अपने दौरों के दौरान प्रोटोकॉल का पालन न करने की शिकायत कर चुकी तेलंगाना की राज्यपाल सुंदरराजन ने आशंका जतायी कि उनके फोन टैप किए जा रहे हैं.

सुंदरराजन ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मुझे संदेह है (कि) मेरे फोन टैप किए गए हैं. राज्य में अलोकतांत्रिक स्थिति है, खासकर राज्यपाल के सम्मान के संबंध में. मैं उन सभी चीजों को स्पष्ट करना चाहती हूं.’’ उन्होंने यह कहते हुए इस बारे में कुछ भी विस्तार से बोलने से इनकार कर दिया कि हाल ही में राजभवन को ‘‘टीआरएस विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले’’ से जोड़ने वाली कुछ सोशल मीडिया पोस्ट सामने आयी थी.

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