वामपंथी सरकार केरल में संवैधानिक अराजकता पैदा कर रही है: जावड़ेकर

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 11 Nov 2022 07:03 PM
वामपंथी सरकार केरल में संवैधानिक अराजकता पैदा कर रही है: जावड़ेकर
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तिरुवनंतपुरम. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता प्रकाश जावड़ेकर ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के साथ विवाद को लेकर केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार पर शुक्रवार को निशाना साधा और आरोप लगाया कि यह सरकार राज्य में ‘‘संवैधानिक अराजकता’’ पैदा कर रही है.

जावड़ेकर ने कहा कि वामपंथी सरकार राज्यपाल के संवैधानिक पद को ‘अपमानित’ और ‘बदनाम’ करने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि राज्यपाल एक संवैधानिक पद है और उनकी भूमिकाएं, कर्तव्य और शक्तियां संविधान में अच्छी तरह से निर्धारित हैं लेकिन सत्तारूढ़ माकपा सब चीजों की अनदेखी कर रही है और संवैधानिक तंत्र को मानने से इनकार कर रही है.

उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया, ‘‘राज्यपाल वही कर रहे हैं जो संविधान में उन्हें प्रदान किया गया है. लेकिन, मुझे आश्चर्य है कि मुख्यमंत्री खुद राज्यपाल का नाम ले रहे हैं… राज्यपाल का इस तरह का अपमान और संवैधानिक पद की उपेक्षा पहले कभी नहीं देखी गई.’’ भाजपा के केरल प्रभारी जावड़ेकर ने एक लाख से अधिक लोगों के साथ राजभवन के सामने आंदोलन करने संबंधी योजना को लेकर सत्तारूढ़ माकपा की आलोचना की और कहा कि ‘‘घेराव पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है’’.

उन्होंने कहा, ‘‘आप (सरकार) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, यही पूरा मामला है. और यह विश्वविद्यालयों पर कब्जा करने के लिए नहीं बनाया गया है. आपने इसे पहले ही कब्जा कर लिया है … के. के. रागेश, एम. बी. राजेश और ए. एन. शमसीर की पत्नियां… जिन्होंने फायदा लिया.’’ रागेश मुख्यमंत्री के निजी सचिव हैं, राजेश स्थानीय स्वशासन विभाग मंत्री हैं जबकि शमसीर विधानसभा अध्यक्ष हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, माकपा को विश्वविद्यालयों पर कब्जा करने की आदत है. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू)और अन्य विश्वविद्यालयों में उन्होंने यही काम किया. वे केरल में भी ऐसा करना चाहते हैं..लोग इसका मुंहतोड़ जवाब देंगे.’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री ने तिरुवनंतपुरम के महापौर आर्य राजेंद्रन द्वारा माकपा जिला सचिव को कथित रूप से लिखे गए विवादास्पद पत्र को लेकर भी विजयन सरकार और मार्क्सवादी पार्टी पर निशाना साधा, जिसमें वाम शासित निगम में अस्थायी पदों पर नियुक्त किए जाने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं की प्राथमिकता सूची मांगी गई थी.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस- संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) राज्यपाल-सरकार की खींचतान और महापौर के पत्र जैसे मुद्दों पर चुप है क्योंकि उनकी वाम सरकार के साथ सांठगांठ है. जावड़ेकर यहां निगम मुख्यालय में धरना स्थल पर भी गये और पार्टी कार्यकर्ताओं तथा नेताओं को संबोधित किया और उनके साथ एकजुटता व्यक्त की.

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