केरल उच्च न्यायालय ने मत्स्य विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति रद्द की

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 14 Nov 2022 08:30 PM
केरल उच्च न्यायालय ने मत्स्य विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति रद्द की
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कोच्चि/तिरुवनंतपुरम. केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को केरल मत्स्य पालन और महासागर अध्ययन विश्वविद्यालय (केयूएफओएस) के कुलपति की नियुक्ति को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि उनकी नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानदंडों के खिलाफ है.

यह फैसला राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा उल्लंघन को लेकर राज्य में 11 कुलपतियों के इस्तीफे मांगे जाने के कदम को जायज ठहराता है. यह सरकार के लिए झटका है जो इस मुद्दे पर राज्यपाल का विरोध कर रही है. न्यायमूर्ति एस मणिकुमार और न्यायमूर्ति शाजी पी चाले की पीठ ने कहा कि डॉ. के रीजि जॉन को केयूएफओएस का कुलपति नियुक्त करने के दौरान यूजीसी के उस नियम का पालन नहीं किया गया, जिसके तहत कुलाधिपति को तीन या उससे अधिक दावेदारों की सूची भेजना अनिवार्य है.

पीठ ने कहा कि नियुक्ति के लिए केवल जॉन के नाम की सिफारिश करने वाले खोज-सह-चयन समिति भी नियमों के खिलाफ थी.
पीठ ने कहा कि नए कुलपति के चयन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कुलाधिपति एक चयन कमेटी गठित कर सकते हैं. उसने स्पष्ट किया कि कुलपति के चयन में यूजीसी के मानदंडों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस ने फैसले का स्वागत किया है. दोनों ने कहा कि यह फैसला सरकार के लिए बड़ा झटका है.
बहरहाल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा कि इस फैसले की कानूनी रूप से समीक्षा की जाएगी तथा उसके बाद उचित कदम उठाए जाएंगे.

केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) के अध्यक्ष के. सुधाकरन ने कहा कि यह फैसला एलडीएफ सरकार के लिए झटका है जो विश्वविद्यालयों में अहम पदों पर कथित तौर पर अपने पसंद के लोगों की नियुक्ति कर रही थी. उन्होंने एक बयान में कहा कि ऐसी सभी नियुक्तियों की विस्तृत जांच कराने की आवश्यकता है.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने कहा कि यह दिखाता है राज्यपाल का रुख सही था और सत्तारूढ़ वाम मोर्चा गलत था.
गौरतलब है कि खान ने इस आधार पर जॉन का इस्तीफा मांगा था कि उच्चतम न्यायालय ने ऐसे ही एक अन्य मामले में कहा था कि यूजीसी के मानदंडों के अनुसार राज्य सरकार द्वारा गठित चयन कमेटी को कम से कम तीन उपयुक्त दावेदारों के नामों की सिफारिश करनी चाहिए थी.

उन्होंने जॉन को कारण बताओ नोटिस भेजकर पूछा था कि शीर्ष अदालत द्वारा यूजीसी के नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति को खारिज किए जाने के मद्देनजर उन्हें कुलपति के पद पर बने रहने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए. उच्च न्यायालय का यह फैसला जॉन की नियुक्ति को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं पर आया है.

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