महुवा. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को कहा कि उन्होंने अपनी ‘‘भारत जोड़ो’’ यात्रा के दौरान किसानों, युवाओं और आदिवासियों से मिलकर उनका दर्द महसूस किया. गुजरात में पहले चरण के विधानसभा चुनाव से 10 दिन पहले गांधी ने प्रचार अभियान शुरू करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जंगलों को उद्योगपतियों को सौंपकर आदिवासियों को विस्थापित करने की योजना बनाने का आरोप लगाया. विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद गुजरात में अपनी पहली रैली को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि आदिवासी देश के पहले मालिक हैं, लेकिन भाजपा उनके जंगलों को छीनने और उनके बच्चों को आधुनिक शिक्षा से दूर रखने के लिए काम कर रही है.
कांग्रेस सांसद ‘भारत जोड़ो’ यात्रा से विराम लेकर गुजरात दौरे पर आए. यात्रा वर्तमान में महाराष्ट्र से गुजर रही है. गांधी ने अपनी पार्टी के समर्थन में सूरत जिले के महुवा में आदिवासियों की एक सभा को संबोधित किया. गांधी ने कहा कि सात सितंबर को तमिलनाडु से शुरू हुई उनकी 3,570 किलोमीटर की यात्रा देश की एकता के लिए है और पैदल मार्च के दौरान उन्होंने किसानों, युवाओं और आदिवासी समुदाय के लोगों की समस्याएं सुनकर उनके दर्द को महसूस किया.
कांग्रेस नेता ने कहा कि किसानों ने अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने, फसल बीमा का पैसा या उनके ऋण माफ नहीं होने के अपने अनुभव साझा किए, जबकि युवाओं ने बेरोजगार रहने और अपने सपनों को साकार करने में विफल रहने की बात कही.
गांधी ने आदिवासी बहुल महुवा में रैली में कहा, ‘‘वे आपको वनवासी कहते हैं. वे यह नहीं कहते कि आप भारत के पहले मालिक हैं, बल्कि यह कहते हैं कि आप जंगल में रहते हैं. आपको फर्क दिखता है? इसका मतलब है कि वे नहीं चाहते कि आप शहरों में रहें, वे नहीं चाहते कि आपके बच्चे इंजीनियर बनें, डॉक्टर बनें, विमान उड़ाना सीखें, अंग्रेजी बोलें.’’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘वे चाहते हैं कि आप जंगल में रहें, लेकिन वहां रुकें नहीं. उसके बाद वे आपसे जंगल छीनने लगते हैं. अगर ऐसा ही चलता रहा तो अगले 5-10 वर्षों में सारे जंगल दो-तीन उद्योगपतियों के हाथ में चले जाएंगे, और आपके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं होगी, शिक्षा, स्वास्थ्य और नौकरी नहीं मिलेगी.’’ गांधी ने कहा, ‘‘जब मैं छह-सात का साल था तो मेरी दादी (पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी) ने मुझे एक किताब दी थी वह किताब आदिवासियों के बारे में थी…जो भारत के असली मालिक हैं.’’
राहुल ने कहा कि उनकी दादी ने उनसे कहा कि अगर आप भारत को समझना चाहते हो, तो आपको आदिवासियों, उनके जीवन, जल, जंगल और जमीन के साथ उनके संबंधों को समझना होगा. कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘उन्होंने आदिवासियों के लिए ‘‘आदिवासी’’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिसका अर्थ है जो यहां पहले से रह रहे हैं. मैं आपको बता रहा हूं कि आप देश के पहले मालिक हैं. देश आपसे छीन लिया गया है.’’
गांधी ने कहा कि आदिवासी शब्द का अर्थ है कि देश आदिवासियों का है और उन्हें इस देश में उनका अधिकार मिलना चाहिए-जैसे उन्हें और उनके बच्चों को रोजगार और स्वास्थ्य. कांग्रेस नेता ने कहा कि दूसरी ओर, ‘‘वनवासी का मतलब है कि जो कुछ भी आपका है वह 2 से 3 उद्योगपतियों को दिया जाना चाहिए, और आपको कोई शिक्षा, स्वास्थ्य और कोई अन्य अधिकार नहीं मिलता है.’’
भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अतीत में कांग्रेस द्वारा केंद्र में सत्ता में रहते हुए आदिवासी समुदाय के लाभ के लिए बनाए गए कानूनों को भाजपा शासित राज्यों में कभी लागू नहीं किया गया. गांधी ने दावा किया कि वास्तव में, उन्होंने (भाजपा) पेसा कानून (अनुसूचित क्षेत्रों के लिए पंचायत विस्तार कानून, भूमि अधिग्रहण कानून और वन अधिकार कानून) जैसे महत्वपूर्ण कानूनों को कमजोर करने का काम किया.
कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘आपको जल, जमीन और जंगल लौटाने के लिए ये क्रांतिकारी कानून थे… हमने आपको मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून), नौकरी, छात्रवृत्ति, जमीन पर अधिकार दिए. उन्होंने (भाजपा ने) ऐसा नहीं किया…दरअसल उन्होंने आपसे सिर्फ आपकी जमीन छीनी.’’ उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब लोग पर्यावरण के बारे में बात करते हैं और बड़े सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं जहां दुनिया भर के प्रतिनिधि हरित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए मिलते हैं, आदिवासी इस विषय के बारे में किसी भी नेता से ज्यादा जानते हैं.
गांधी ने कहा, ‘‘आप उन्हें जल, जमीन और जंगल के बारे में सिखा सकते हैं और किसी नेता या सरकार का काम आपकी बात सुनना है.’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि ‘‘भारत जोड़ो’’ यात्रा के दौरान किसानों, बेरोजगार युवाओं, महिलाओं, आदिवासियों, दलितों, पिछड़े समुदाय के सदस्यों और अल्पसंख्यकों सहित लाखों लोग उनके साथ शामिल हुए.
उन्होंने ‘‘भारत जोड़ो यात्रा’’ के बारे में कहा, ‘‘कोई पीछे छूट जाता है तो हर कोई उसकी मदद के लिए बढ़ता है. यह प्यार की यात्रा है और सभी इसमें शामिल हैं. कोई नहीं पूछता कि आपकी जाति, धर्म क्या है, आप कौन सी भाषा बोलते हैं, आपकी उम्र क्या है, आप बूढ़े, जवान, महिला या पुरूष हैं.’’ उन्होंने कहा कि यात्रा महात्मा गांधी से प्रेरित है, जिनका जन्म गुजरात में हुआ था. राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने यात्रा के दौरान खुशी के साथ-साथ दुख की भावनाओं को भी महसूस किया. कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘किसानों, युवाओं, आदिवासियों से बात करते हुए दुख का अनुभव होता है. किसानों को उचित दर (कृषि उत्पादों की), बीमा राशि नहीं मिलती है, उनका ऋण माफ नहीं होता है.’’
गांधी ने कहा, ‘‘युवा बेरोजगार हैं, उनका सपना टूट रहा है. कोई इंजीनियर बनना चाहता है, उसके माता-पिता उसकी शिक्षा पर पैसा खर्च करते हैं, लेकिन वह मजदूर (डिग्री प्राप्त करने के बाद) के रूप में काम कर रहा है.’’ कांग्रेस सांसद ने कहा कि कैसे राम नाम का एक युवक रविवार शाम को यात्रा में शामिल हुआ और उन्हें गले लगा कर रोने लगा. गांधी ने कहा, ‘‘युवक ने कहा कि उसने कोरोना वायरस के कारण अपना पूरा परिवार खो दिया और वह अकेला हो गया है. उसने कहा कि वह बेरोजगार है और उसे कोई रास्ता नहीं दिख रहा.’’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘वह अकेला नहीं है, देश में ऐसे लाखों युवा हैं. जब आप आदिवासियों से बात करते हैं, तो वे कहते हैं कि उनकी जमीन छीनी जा रही है. उन्हें बिना कुछ बताए विस्थापित किया जा रहा है और कुछ उद्योगपतियों को उनकी जमीन दी जा रही है.’’ गुजरात की 182 सदस्यीय विधानसभा के लिए दो चरणों में एक और पांच दिसंबर को चुनाव होंगे और मतगणना आठ दिसंबर को होगी.