श्रद्धा हत्याकांड : पुलिस ने मानव जबड़ा बरामद किया, दंत चिकित्सक से लेगी मदद

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 21 Nov 2022 10:11 PM
श्रद्धा हत्याकांड : पुलिस ने मानव जबड़ा बरामद किया, दंत चिकित्सक से लेगी मदद
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नयी दिल्ली/मुंबई. श्रद्धा वालकर के अवशेषों को खोज रही दिल्ली पुलिस ने एक मानव जबड़ा बरामद किया है एवं यह पता लगाने के लिए यहां एक दंत चिकित्सक से संपर्क किया है कि क्या यह जबड़ा पीड़िता का ही है. दंत चिकित्सक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि वह किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले और जानकारी चाहते हैं.

उन्होंने कहा, “पुलिस आज आई थी. उनके पास जबड़े की एक तस्वीर थी जिसे उन्होंने तलाशी के दौरान बरामद किया. मैंने उनसे मुंबई के उस डॉक्टर से एक्स-रे लेने को कहा, जिसने रूट कैनाल उपचार (आरसीटी) के लिए पीड़िता का इलाज किया था. बिना एक्स-रे के, इसकी पहचान मुश्किल है.” दिल्ली पुलिस ने रविवार को एक वन क्षेत्र से खोपड़ी के कुछ हिस्से और कुछ हड्डियां बरामद की थी. इसी के साथ दक्षिण दिल्ली के मैदानगढ़ी इलाके में एक तालाब से पानी निकाला जा रहा है.

पूनावाला के वकील ने कहा, पुलिस रिमांड बढ़ाने का विरोध करेंगे

सनसनीखेज श्रद्धा वालकर हत्याकांड में आरोपी आफताब पूनावाला का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने कहा है कि वह पूनावाला की दो दिन से अधिक की पुलिस हिरासत बढ़ाने का विरोध करेंगे. पूनावाला की पांच दिन की पुलिस रिमांड मंगलवार को समाप्त होने जा रही है और मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस उसकी हिरासत की अवधि बढ़ाने की मांग कर सकती है क्योंकि 17 नवंबर को अदालत के पांच दिनों के भीतर परीक्षण करने के आदेश के बावजूद नार्को परीक्षण अभी भी नहीं हो सका है. दिल्ली पुलिस ने श्रद्धा वालकर की हत्या के आरोपी आफताब अमीन पूनावाला की पॉलीग्राफ जांच के लिए यहां अदालत में सोमवार को आवेदन दाखिल किया.

पूनावाला के वकील अविनाश कुमार ने कहा कि पुलिस मंगलवार को उसकी रिमांड बढ़ाने की मांग कर सकती है. उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘यदि वे (पुलिस) दो दिन से अधिक की रिमांड मांगेंगे, तो मैं निश्चित रूप से यह कहते हुए इसका विरोध करूंगा कि वह (पूनावाला) लंबे समय से पुलिस हिरासत में है.’’ वकीलों द्वारा बृहस्पतिवार को पूनावाला को अदालत ले जाते समय उसके खिलाफ नारबाजी करने को लेकर कुमार ने आरोप लगाया कि एक वर्ग इसे ‘‘सस्ती लोकप्रियता’’ पाने के एक अवसर के रूप में इस्तेमाल कर रहा है.

आफताब पूनावाला के पॉलीग्राफ परीक्षण के लिए पुलिस ने आवेदन दिया

दिल्ली पुलिस ने श्रद्धा वालकर की हत्या के आरोपी आफताब अमीन पूनावाला की पॉलीग्राफ जांच के लिए यहां अदालत में सोमवार को आवेदन दाखिल किया. मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अविरल शुक्ला ने मामले को न्यायधीश विजयश्री राठौर को भेजा जिन्होंने पहले पूनावाला के नार्को विश्लेषण परीक्षण के आवेदन पर सुनवाई की थी. अदालत ने बृहस्पतिवार को दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया था कि पांच दिन के भीतर पूनावाला की नार्को जांच कराई जाए. अदालत ने साफ किया था कि पुलिस आरोपी पर किसी थर्ड डिग्री उपाय का प्रयोग नहीं कर सकती.

अदालत के एक सूत्र ने कहा कि सोमवार को इस आधार पर आवेदन किया गया कि पूनावाला गलत जानकारी दे रहा है और पुलिस को गुमराह कर रहा है. नार्को-विश्लेषण जांच में किसी संदिग्ध को ऐसी दवा नियंत्रित मात्रा में दी जाती है जिसके प्रभाव में उससे वह जानकारी मिलती है जो सामान्य स्थिति में प्रकट नहीं होती है. पॉलीग्राफ या लाई डिटेक्टर जांच में संदिग्ध से अनेक प्रश्न पूछे जाते हैं और इस दौरान उसके रक्तचाप, श्वसन दर और नाड़ी जैसे कई शारीरिक संकेतकों को रिकॉर्ड कर सच, झूठ का पता लगाया जाता है.

दिल्ली पुलिस ने एक और बयान दर्ज किया, अब तक 11 लोगों के बयान दर्ज किये

श्रद्धा वालकर की हत्या की जांच के सिलसिले में महाराष्ट्र में पालघर जिले के वसई गये दिल्ली पुलिस के एक दल ने सोमवार को इस सिलसिले में एक व्यक्ति के बयान दर्ज किये. एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस यहां अब तक 11 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है जिनमें दो लोगों ने 2020 में पूनावाला के कथित हमले के बाद वालकर की मदद की थी. अधिकारी ने बताया कि पुलिस दल ने वालकर के पूर्व कॉल सेंटर प्रबंधक के बयान भी दर्ज किये हैं.

उन्होंने कहा कि इसके अलावा वसई में उन तीन मकान मालिकों के भी बयान दर्ज किये गये हैं जिनके घरों में वालकर और पूनावाला रहे थे. दोनों जब वसई से दिल्ली के छतरपुर में बसने आये थे तो उनका सामान लाने में मदद करने वाली कंपनी के मालिक के भी बयान दर्ज किये गये. दिल्ली पुलिस के दल ने मुंबई और पड़ोसी पालघर जिले में पिछले चार दिन के अपने दौरे में श्रद्धा के पिता विकास के बयान भी दर्ज किये हैं जिनकी शिकायत पर जांच शुरू हुई.

पूनावाला ने फ्लैट लेते समय बेटे आफताब के बारे में खास जानकारी नहीं दी थी : रियल एस्टेट एजेंट

श्रद्धा वालकर की हत्या के आरोपी आफताब अमीन पूनावाला के पिता अमीन पूनावाला ने पिछले महीने मीरा रोड इलाके की एक इमारत में किराए पर फ्लैट लेते समय आफताब के बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की थी. इमारत में फ्लैट दिलाने वाले एक रियल एस्टेट एजेंट ने सोमवार को यह दावा किया.

डेल्टा गार्डन कॉम्प्लेक्स में फ्लैट तलाशने में अमीन पूनावाला की मदद करने वाले रियल एस्टेट एजेंट ने पीटीआई-भाषा को बताया कि अमीन शुरू में एक बीएचके (बेडरूम, हॉल और किचन) फ्लैट चाहते थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपना मन बदल लिया और किराए पर 2 बीएचके फ्लैट लिया.
रियल एस्टेट एजेंट ने कहा, ‘‘अमीन पूनावाला ने फ्लैट के अंधेरी स्थित मालिक को बताया कि फ्लैट में उनके परिवार के तीन सदस्य, वह, उनकी पत्नी मुनीरा और उनका बेटा अहद रहेंगे. उन्होंने मालिक से कहा कि उनका दूसरा बेटा (आफताब) उनके साथ नहीं, कहीं अलग रह रहा है. इसके अलावा, उन्होंने आफताब के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की.’’ पूनावाला का परिवार पालघर जिले के वसई में किराये के फ्लैट के बाद अक्टूबर में नयी जगह स्थानांतरित हुआ था. पुलिस ने कहा था कि हालांकि उनसे संपर्क नहीं हो पाया और मीरा रोड में फ्लैट बंद मिला.

अपराध के लिए फिल्मों के असर की बात नयी नहीं, श्रद्धा मामले में भी आरोपी ने कही यह बात

लोगों का फिल्मों से प्रभावित होकर अपराध करना और बचने की कोशिश करना नयी बात नहीं है और हाल में सामने आईं जुर्म की दो दास्तान फिल्म ‘डेक्स्टर’ और ‘दृश्यम’ से प्रभावित नजर आती हैं. श्रद्धा वालकर (27) हत्याकांड में आरोपी आफताब पूनावाला ने अपने बयान में कबूल किया कि उसने अमेरिकी टेलीविजन श्रृंखला ‘डेक्स्टर’ देखकर श्रद्धा को जान से मारने और उसके शरीर के टुकड़े करने के बारे में सोचा था.

इसी तरह गाजियाबाद में पुलिस ने चार साल पुराने अपराध के एक मामले का खुलासा किया है जिसमें एक युवती ने बताया कि किस तरह उसकी मां ने उसके पिता की जान ले ली. इस घटना में शव को एक घर के नीचे गड्ढे में दफन कर दिया गया था. कुछ इसी तरह की कहानी अजय देवगन अभिनीत फिल्म ‘दृश्यम’ की भी है.

लोकनायक जयप्रकाश नारायण अपराधशास्त्र एवं विधि विज्ञान संस्थान में अपराध विज्ञान के प्रोफेसर डॉ बेउला शेखर के अनुसार, शोध बताते हैं कि ंिहसा करने की प्रवृत्ति रखने वाले ज्यादातर लोग फिल्मों से प्रभावित होते हैं. उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘यह भाव-विरेचन मजबूत भावनाओं की खुली अभिव्यक्ति के माध्यम से लोगों को मनोवैज्ञानिक राहत प्रदान करता है.’’ दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने श्रद्धा हत्याकांड में आरोपी पूनावाला के हवाले से कहा कि उसने शादी के मुद्दे पर विवाद के बाद लड़की की हत्या कर दी और ‘डेक्स्टर’ फिल्म की तरह उसके शरीर के टुकड़े कर दिये. यह बयान देते हुए बिल्कुल पछतावा नहीं दिखाने वाला पूनावाला एक ‘सीरियल किलर’ आधारित शृंखला से प्रभावित होकर अपराध करने के बाद छह महीने तक बचता रहा और अंतत: उसे गत शनिवार को गिरफ्तार किया गया.

श्रद्धा वालकर की हत्या का वाकया सबसे नया है लेकिन फिल्मों से प्रभावित होकर इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने के पहले भी कई मामले आये हैं. फिल्मकार एस एम एम औसाजा ने बताया कि किस तरह 1971 में अमिताभ बच्चन अभिनीत मनोवैज्ञानिक थ्रिलर फिल्म ‘परवाना’ देखकर उस समय एक आदमी ने चलती ट्रेन में हत्या की घटना को अंजाम दिया था.

उन्होंने कहा, ‘‘उस समय इस पर विवाद उठा था और लोगों ने फिल्म पर प्रतिबंध की मांग उठाई.’’ दिसंबर 2010 में देहरादून में एक आदमी ने अपनी पत्नी की हत्या कर उसके शरीर के 70 से ज्यादा टुकड़े किये थे. पुलिस ने बताया कि हत्यारा आॅस्कर पुरस्कार विजेता फिल्म ‘द साइलेंस आॅफ द लैंब्स’ से प्रभावित था जिसमें एंथनी हॉपकिन्स को सीरियल किलर के रूप में दिखाया गया था.
लूटपाट से जुड़े कई मामले भी इसी तरह फिल्मों से प्रभावित दिखाई देते हैं. पिछले महीने आईसीआईसीआई बैंक के एक अधिकारी ने पुणे में एक बैंक से 34 करोड़ रुपये लूट लिये थे. उस पर कथित रूप से, अंतरराष्ट्रीय रूप से हिट हुई स्पेनिश शृंखला ‘मनी हीस्ट’ का असर था.

औसाजा के अनुसार, समाज में होने वाले जघन्य अपराधों के लिए सिनेमा को जिम्मेदार ठहराया सही नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘सिनेमा, साहित्य और कला से अच्छी चीजें ग्रहण करनी चाहिए. केवल बीमार और असामान्य दिमाग वाला व्यक्ति ही फिल्मों से देखकर वास्तविक जीवन में ऐसे नकारात्मक काम करेगा.’’ सबसे पहले 2013 में मलयालम भाषा में और फिर ंिहदी में आई ‘दृश्यम 2’ का असर एक से अधिक अपराध की घटनाओं में होने की बात सामने आई है.

केरल में 2013 में एक व्यक्ति ने अपने भाई से विवाद के बाद उसकी हत्या कर दी और बाद में शव को अपनी मां तथा पत्नी की मदद से घर के पीछे एक हिस्से में दफना दिया. ‘दृश्यम 2’ के निर्देशक अभिषेक पाठक ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग अपराध आधारित फिल्मों से नकारात्मक काम करने के लिए प्रभावित होते हैं. फिल्म निर्देशक नीरज पांडेय का मानना है कि वास्तविक जीवन की अपराध घटनाओं से फिल्मों या शो की समानता करने के लिए मीडिया जिम्मेदार है.

 

 

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