प्रधानमंत्री ने गुजरात में प्रचार के लिए छोटी बच्ची का इस्तेमाल किया : कांग्रेस

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 21 Nov 2022 10:22 PM
प्रधानमंत्री ने गुजरात में प्रचार के लिए छोटी बच्ची का इस्तेमाल किया : कांग्रेस
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नयी दिल्ली/राजकोट. कांग्रेस ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर गुजरात विधानसभा चुनाव के प्रचार में छोटी बच्ची का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि इस पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को कार्रवाई करनी चाहिए तथा निर्वाचन आयोग को इसका संज्ञान लेना चाहिए. कांग्रेस के कुछ नेताओं ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के उस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए निशाना साधा जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक बच्ची का वीडियो साझा किया है .

इस ट्वीट ने प्रधान ने कहा, “देश का बच्चा बच्चा जनता है कि देश प्रधानमंत्री जी के हाथ में ही सुरक्षित है, केवल मोदी जी ही सबका ख़्याल रख सकते हैं. सुनिए गुजरात की यह नन्हीं बेटी क्या संदेश दे रही है.” इस पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “प्रधानमंत्री द्वारा छोटे बच्चे का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए किया जा रहा है. यह कÞानून का खुला उल्लंघन है.”

उन्होंने सवाल किया, “चुनाव आयोग कहां है ? राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) कहां है?” कांग्रेस की सोशल मीडिया प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “यह होता है बच्चों का इस्तेमाल राजनीति में – प्रधानमंत्री मोदी छोटी बच्ची का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए कर रहे हैं.एनसीपीसीआर के (प्रमुख) प्रियंक कानूनगो कुम्भकर्ण की नींद सो रहे हैं क्या? अब नहीं लिखेंगे चुनाव आयोग को खर्रे? “‘ उन्होंने कहा की निर्वाचन आयोग को स्वत: संज्ञान लेना चाहिए.

मोरबी हादसे के ‘असली गुनहगारों’ के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई क्योंकि वे भाजपा से जुड़े हैं: राहुल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को आरोप लगाया कि गुजरात के मोरबी में पिछले महीने एक पुल गिरने की घटना के ‘‘असली गुनहगारों’’ के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई क्योंकि उनके सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ ‘‘अच्छे संबंध’’ हैं. पुल गिरने की घटना में 135 लोगों की मौत हो गई थी.

राजकोट में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि (दुर्घटना स्थल पर तैनात) चौकीदारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, लेकिन असली गुनहगारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘जब पत्रकारों ने मुझसे पूछा कि मैं मोरबी त्रासदी के बारे में क्या सोचता हूं…मैंने कहा कि करीब 150 लोग मारे गए और यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, इसलिए मैं इस पर कुछ नहीं कहूंगा. लेकिन आज सवाल उठता है कि क्यों कोई कार्रवाई नहीं की गई, जो इसके (त्रासदी) लिए जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कोई प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की गई?’’

गांधी ने आरोप लगाया, ‘‘क्या उन्हें कुछ नहीं होगा क्योंकि उनके भाजपा के साथ अच्छे संबंध हैं? उन्होंने चौकीदारों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे डाल दिया, लेकिन असली गुनहगारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई.’’ तीस अक्टूबर की शाम मच्छु नदी पर ब्रिटिशकालीन पुल टूट गया था, जिसमें कई महिलाओं और बच्चों सहित 135 लोगों की मौत हो गई थी. जिला बनने से पहले मोरबी राजकोट जिले का हिस्सा था.

गांधी ने कहा कि उन्हें दुख है कि कांग्रेस की ‘‘भारत जोड़ो यात्रा’’ गुजरात से नहीं गुजर रही है, जहां एक और पांच दिसंबर को दो चरणों में विधानसभा चुनाव होंगे. गांधी ने भाजपा नीत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इसकी नीतियां ‘‘दो भारत’’ का निर्माण कर रही हैं जिसमें एक तरफ अरबपपति वह सब कर सकते हैं जिसका वे सपना देखते हैं, दूसरी तरफ गरीब हैं, जो महंगाई और बेरोजगारी के बीच जीने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि ‘‘भारत जोड़ो यात्रा’’ का विचार गुजरात ने ‘दिखाया’ और इसके दो बेटों-महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल से प्रेरित है. उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन दुख की बात है कि यात्रा गुजरात से नहीं गुजरी.’’ गांधी ने कहा, ‘‘दो भारत बनाए जा रहे हैं-एक अरबपतियों का, जिसमें वो सब कर सकते हैं जिसके वे सपने देखते हैं, दूसरे में गरीब, किसान, मजदूर और छोटे व्यवसायी शामिल हैं. हमें दो भारत की जरूरत नहीं है. हमें एक न्याय वाला भारत चाहिए.’’

उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र से नौकरियों का सृजन होता था, लेकिन 2016 में नोटबंदी और खराब तरीके से लागू माल और सेवा कर (जीएसटी) के कारण वे सभी व्यवसाय बंद करने को मजबूर हो गए. गांधी ने कहा, ‘‘उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भी ऐसा ही किया. मैंने एक पत्रकार से कहा कि (भारत जोड़ो यात्रा के दौरान) 2,000 किमी पैदल चलना कोई बड़ी बात नहीं है. भारत के श्रमिक 2,000 किमी खाली पेट (लॉकडाउन के दौरान) पैदल चले, इसलिए (यात्रा में चलना) कोई बड़ी बात नहीं है. लेकिन जब मजदूरों को सरकार की जरूरत पड़ी तो वह उनकी मदद के लिए नहीं आई.’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब मजदूर सड़कों पर मर रहे थे तो भाजपा सरकार ने सबसे अमीर भारतीयों के लाखों करोड़ों के कर्ज माफ कर दिए. एसएमई से जुड़े लोग कह रहे थे कि नोटबंदी, दोषपूर्ण जीएसटी और कोविड-19 के कारण वे बर्बाद हो रहे हैं, लेकिन सरकार ने उनका सहयोग नहीं किया.’’ गांधी ने कहा कि नोटबंदी, जीएसटी और कोविड??-19 महामारी से निपटने के लिए नीतियां नहीं, बल्कि ये ‘‘किसानों, एसएमई और गरीब श्रमिकों के खिलाफ हथियार थे, जिसका मकसद उन्हें खत्म करने और देश के 2-3 अरबपतियों के लिए रास्ता बनाना था.’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘वे (अरबपति) जो चाहें व्यवसाय कर सकते हैं. दूरसंचार, हवाई अड्डे, बंदरगाह, बुनियादी ढांचा, खेती और किराने की दुकान, वे जो चाहें कर सकते हैं. वे जो चाहें सपना देख सकते हैं. लेकिन जब देश के युवा इंजीनियर बनने के लिए सपने देखते हैं तो उन्हें पहले निजी संस्थानों में लाखों खर्च करने होंगे, महंगाई का सामना करना पड़ेगा, और अंत में मजदूर बन जाएंगे.’’

उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है क्योंकि देश ‘‘पिछले 45 वर्षों में बेरोजगारी की उच्चतम दर’’ का सामना कर रहा है. गांधी ने कहा, ‘‘अतीत में, गरीबों को सार्वजनिक क्षेत्र में नौकरी मिलती थी. आज, सभी सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण किया जा रहा है, चाहे वह रेलवे हो, भेल हो, या तेल कंपनियां हों, और उन 2-3 पूंजीपतियों को सौंपे जा रहे हैं. ये आपकी संपत्ति हैं. सरकारी नौकरियों में लाखों पद खाली हैं.’’

अपनी ‘‘भारत जोड़ो यात्रा’’ के अनुभव के बारे में गांधी ने कहा कि उन्होंने हजारों युवाओं से बात की और उन लोगों ने अपने सपनों के बारे में बात की. कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘युवाओं ने मुझसे कहा कि वे इंजीनियर और डॉक्टर बनना चाहते हैं, लेकिन शिक्षा के निजीकरण के कारण उनके सपने टूट गए.’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि किसान पूछ रहे हैं कि सरकार ने उनके बकाया ऋणों के लिए उनकी मदद क्यों नहीं की, जबकि वह 3-4 अरबपतियों के लाखों करोड़ों की गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) को माफ कर सकती है.

उन्होंने कहा, ‘‘किसानों ने पूछा कि 50,000 रुपये से एक लाख रुपये का कर्ज नहीं चुका पाने पर उन्हें ‘डिफॉल्टर’ क्यों करार दिया गया है. उन्हें अपनी बर्बाद फसल के लिए भी पैसा नहीं मिल रहा है.’’ कांग्रेस सांसद ‘‘भारत जोड़ो यात्रा’’ से विराम लेकर गुजरात दौरे पर आए. तमिलनाडु से सात सितंबर को शुरु हुई यह यात्रा वर्तमान में महाराष्ट्र से गुजर रही है.

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