यात्रा प्रभाव: राहुल गांधी ने कहा- अब मैं खुद में अधिक धैर्य महसूस करता हूं

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 29 Nov 2022 06:59 PM
यात्रा प्रभाव: राहुल गांधी ने कहा- अब मैं खुद में अधिक धैर्य महसूस करता हूं
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इंदौर. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा है कि वह भारत जोड़ो यात्रा के दौरान खुद में कुछ बदलाव महसूस कर रहे हैं जिसमें खुद में अधिक धैर्य आना और दूसरों को सुनने की क्षमता शामिल है. गांधी अपने महत्वाकांक्षी पैदल मार्च के तहत 2,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने के बाद रविवार को मध्य प्रदेश के इंदौर जिले पहुंचे. यह भारत जोड़ो यात्रा एक जनसंपर्क पहल है जिसे गांधी ने सात सितंबर को तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू किया था.

यात्रा के दौरान उनके सबसे संतोषजनक क्षण के बारे में पूछे जाने पर, गांधी ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘कई हैं, लेकिन मैं उनमें से कुछ रोचक को याद करता हूं, जिसमें यह शामिल है कि यात्रा के कारण मेरा धैर्य काफी बढ़ गया है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘दूसरी बात, अब मैं आठ घंटे में भी नहीं चिढ़ता, तब भी नहीं यदि कोई मुझे धक्का दे या खींचे. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, जबकि पहले मैं दो घंटे में भी चिढ़ जाता था.’’ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गांधी ने कहा, ‘‘यदि आप यात्रा में चल रहे हैं और दर्द का अनुभव करते हैं, तो आपको इसका सामना करना होगा, आप हार नहीं मान सकते.”

उन्होंने कहा कि तीसरा, दूसरों को सुनने की उनकी क्षमता भी पहले के मुकाबले बेहतर हुई है. उन्होंने कहा, ‘‘जैसे अगर कोई मेरे पास आता है तो मैं उसे ज्यादा धैर्य से सुनता हूं. मुझे लगता है कि ये सभी चीजें मेरे लिए काफी लाभदायक हैं.’’ गांधी ने कहा कि जब उन्होंने पैदल मार्च शुरू किया, तो उन्हें एक पुरानी चोट के कारण उनके घुटनों में दर्द महसूस हुआ, जो पहले ठीक हो गई थी. उन्होंने कहा कि इसकी वजह से काफी परेशानी हो रही थी, साथ ही डर था कि ऐसी हालत में वह चल भी पाएंगे या नहीं.

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, धीरे-धीरे मैंने उस डर का सामना किया क्योंकि मुझे चलना था, इसके बारे में कोई सवाल ही नहीं था. ऐसे क्षण हमेशा अच्छे होते हैं कि कुछ चीज आपको परेशान कर रही है और आप खुद को उसके अनुसार ढाल लें.’’ दक्षिणी राज्यों में से एक में पदयात्रा के दौरान के एक अनुभव को याद करते हुए, गांधी ने कहा कि जब वह दर्द से परेशान हो गए क्योंकि लोग उन्हें धक्का दे रहे थे तो एक छोटी लड़की आयी और यात्रा में चलने लगी.

उन्होंने कहा, ‘‘वह मेरे पास आयी और मुझे एक चिट्ठी थमायी. वह शायद छह-सात साल की थी. जब वह चली गई तो मैंने वह चिट्ठी पढ़ी जिसमें लिखा था ‘मत समझो कि आप अकेले चल रहे हो, मैं आपके साथ चल रही हूं. मैं पैदल यात्रा नहीं कर पा रही क्योंकि मेरे माता-पिता मुझे ऐसा करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं, लेकिन मैं आपके साथ चल रही हूं.’’ गांधी ने लड़की के इस भाव की सराहना की. उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह से, मैं हजारों उदाहरण साझा कर सकता हूं, लेकिन यह मेरे मस्तिष्क में सबसे पहले आया.’’

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