न्यायालय ने केंद्र, RBI को नोटबंदी के फैसले से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने का दिया निर्देश

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 07 Dec 2022 07:07 PM
न्यायालय ने केंद्र, RBI को नोटबंदी के फैसले से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने का दिया निर्देश
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को बुधवार को निर्देश दिया कि वे सरकार के 2016 में 1000 रुपये और 500 रुपये के नोट को बंद करने के फैसले से संबंधित प्रासंगिक रिकॉर्ड पेश करें. न्यायमूर्ति एस ए नजीर की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने केंद्र के 2016 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, आरबीआई के वकील और याचिकाकर्ताओं के वकीलों की दलीलें सुनीं और अपना फैसला सुरक्षित रखा.

याचिकाकर्ताओं के वकीलों में वरिष्ठ अधिवक्ता पी चिदंबरम और श्याम दीवान शामिल थे. शीर्ष अदालत ने पक्षकारों को 10 दिसंबर तक लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया. पीठ ने कहा, ‘‘मामले में दलीलें सुनी गईं. फैसला सुरक्षित रखा जाता है. भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के वकीलों को संबंधित रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया जाता है.’’ इस पीठ में न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना, न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यन और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना भी शामिल हैं.

अटॉर्नी जनरल ने पीठ के समक्ष कहा कि वह सीलबंद लिफाफे में प्रासंगिक रिकॉर्ड जमा करेंगे. शीर्ष अदालत आठ नवंबर 2016 को केंद्र द्वारा घोषित नोटबंदी को चुनौती देने वाली 58 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. शीर्ष अदालत ने मंगलवार को कहा था कि आर्थिक नीति से जुड़े मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमित संभावनाओं का मतलब यह नहीं है कि अदालत हाथ धरकर बैठ जाएगी. न्यायालय ने कहा था कि सरकार किस तरीके से निर्णय लेती है, इसकी हमेशा समीक्षा की जा सकती है.

एक हजार और 500 रुपये के नोटों को बंद करने के फैसले को ‘गंभीर रूप से दोषपूर्ण’ बताते हुए चिदंबरम ने दलील दी थी कि केंद्र सरकार कानूनी निविदा से संबंधित किसी भी प्रस्ताव को अपने दम पर शुरू नहीं कर सकती है और यह केवल आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश पर किया जा सकता है. 2016 की नोटबंदी की कवायद पर फिर से विचार करने के सर्वोच्च न्यायालय के प्रयास का विरोध करते हुए सरकार ने कहा था कि अदालत ऐसे मामले का फैसला नहीं कर सकती है, जब ‘घड़ी की सुई को पीछे करके’ कोई ठोस राहत नहीं दी जा सकती है.

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