नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्यसभा ने बुधवार को उच्च सदन के संचालन की जिम्मेदारी संभालने पर सभापति जगदीप धनखड़ को शुभकामनाएं दीं और उनकी किसान पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सदन का सौभाग्य है कि उसे ‘‘जमीन से जुड़ा नेतृत्व’’ मिला है.
देश का उप-राष्ट्रपति बनने के बाद धनखड़ ने संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन बुधवार को पहली बार राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन किया. उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं. इस अवसर पर धनखड़ का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि उनके मार्गदर्शन में राज्यसभा अपनी विरासत को न केवल आगे बढ़ाएगी बल्कि उसे नयी ऊंचाई भी देगी.
प्रधानमंत्री ने धनखड़ की किसान पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सदन का सौभाग्य है कि उसे उनके जैसा ‘‘जमीन से जुड़ा नेतृत्व’’ मिला है. उन्होंने कहा कि धनखड़ राज्यसभा के सभापति के रूप में ऐसे समय जिम्मेदारी संभाल रहे हैं जब भारत को जी-20 की अध्यक्षता का दायित्व मिला है और वह आजादी के 75 साल के बाद के सफर पर आगे निकला है.
उन्होंने कहा कि यह कालखंड विकसित भारत के निर्माण का साक्षी तो बनेगा ही साथ ही भारत इस दौरान विश्व के भविष्य की दिशा तय करने में भी बहुत अहम भूमिका निभाएगा. प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि इस यात्रा में भारतीय संसदीय व्यवस्था की भी एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी.
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के रूप में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोंिवद की दलित पृष्ठभूमि और वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की जनजातीय पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि धनखड किसान के बेटे हैं और आज वह उच्च सदन में देश के गांव, गरीब और किसान की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, ‘‘धनखड़ का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सफलता साधनों से ही नहीं बल्कि साधना से मिलती है… गांव, गरीब, किसान के लिए आपने जो किया वह सामाजिक जीवन में रहे हर व्यक्ति के लिए एक उदाहरण है.’’ सदन के नेता पीयूष गोयल ने सभापति धनखड़ को बधाई देते हुए उम्मीद जतायी कि उनके नेतृत्व में उच्च मानक स्थापित किए जाएंगे. गोयल ने कहा कि सभी सदस्यों के लिए यह खुशी और गर्व की बात है कि वह सदन के इस उच्च एवं गरिमापूर्ण पद पर विराजमान हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि सभापति से मिलना, बातचीत करना, विचारों का आदान-प्रदान करना हमेशा खुशी देता है.
उन्होंने उम्मीद जतायी कि धनखड़ के नेतृत्व में राज्यसभा कामकाज के उच्च मानक स्थापित करेगी और सभी सदस्य समाज के हर वर्ग के, बिना किसी भेदभाव के, उत्थान के लिए काम करेंगे. उन्होंने कहा कि देश में एक नयी परंपरा स्थापित हो रही है जिसमें सामान्य घरों से आने वाले लोग देश के शीर्ष पदों पर आ रहे हैं. उन्होंने इस सिलसिले में राष्ट्रपति द्रौपद्री मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि आज देश में यह उम्मीद जगी है कि किसी की जाति नहीं बल्कि उसकी क्षमता एवं कार्य से उसे उच्च पद मिल सकता है.
‘अमृत काल’ में विश्व के भविष्य की दिशा तय करने में भारत की अहम भूमिका: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि देश की आजादी के ‘अमृत काल’ का समय ना सिर्फ नए विकसित भारत के निर्माण का कालखंड होगा बल्कि इस दौरान यह राष्ट्र विश्व के भविष्य की दिशा तय करने पर भी बहुत अहम भूमिका निभाएगा. संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन राज्यसभा के सभापति के रूप में उच्च सदन के संचालन की जिम्मेदारी संभालने पर प्रधानमंत्री ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को शुभकामनाएं दी और कहा कि वह ऐसे समय में यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं जब देश दो महत्वपूर्ण अवसरों का साक्षी बना है.
उन्होंने कहा, ‘‘अभी कुछ ही दिन पहले दुनिया ने भारत को जी-20 समूह की मेजबानी का दायित्व सौंपा है. साथ ही, ये समय अमृतकाल के आरंभ का समय है. ये अमृतकाल एक नए विकसित भारत के निर्माण का कालखंड तो होगा ही, साथ ही भारत इस दौरान विश्व के भविष्य की दिशा तय करने पर भी बहुत अहम भूमिका निभाएगा.’’ उन्होंने कहा कि इस यात्रा में भारतीय लोकतंत्र, संसद और संसदीय व्यवस्थाओं की भी एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी. ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री ने भारत की आजादी के 75 वर्ष से 100 वर्ष के सफर को ‘‘अमृत काल’’ का नाम दिया है.
हंगामे से बहुत नुकसान, संसद सत्र को सार्थक बनाने के लिए सामूहिक प्रयास हों: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि संसद में हंगामे और व्यवधान के चलते देश का बहुत नुकसान होता है. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से शीतकालीन सत्र को अधिक से अधिक सार्थक बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास करने का आग्रह किया. संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन मीडिया को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत को जी-20 की अध्यक्षता मिलना एक बहुत बड़ा अवसर है और यह समग्र रूप से भारत के सामर्थ्य को विश्व के सामने प्रस्तुत करने का मौका भी है.
प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह बहुत ही अनुकूल माहौल में हुई. उन्होंने उम्मीद जताई कि सत्र के दौरान इसका प्रतिंिबब देखने को मिलेगा. मोदी ने कहा कि सभी दलों के सांसद, खासकर युवा सांसद अक्सर उनसे मिलते हैं तो बताते हैं कि सदन में व्यवधान के कारण उनका बहुत नुकसान होता है. उन्होंने कहा कि ये युवा सांसद चाहते हैं कि वे लोकतंत्र के इस विश्वविद्यालय से सीखें.
उन्होंने कहा, ‘‘जो विपक्ष के सांसद हैं, उनका भी यही कहना है कि उन्हें संसद में बोलने का अवसर नहीं मिलता है क्योंकि हंगामे के कारण सदन स्थगित हो जाता है. इसके कारण उनका बहुत नुकसान होता है.’’ प्रधानमंत्री ने सभी दलों के नेताओं से ऐसे सांसदों की ‘‘वेदना’’ को समझने का अनुरोध किया.
उन्होंने कहा, ‘‘देश के विकास में उनके (युवा सांसदों) सामर्थ्य को जोड़ने के लिए, उनके उत्साह व उमंग का लाभ देश को मिले… यह लोकतंत्र के लिए बहुत आवश्यक है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं बहुत ही आग्रह के साथ सभी दलों से… सभी सांसदों से सत्र को अधिक सार्थक बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास करने का आग्रह करता हूं.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सत्र ऐसे समय में आरंभ हो रहा है जब देश को जी-20 की मेजबानी का अवसर मिला है.