
नयी दिल्ली. कांग्रेस ने शुक्रवार को चीन के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तंज कसा और सवाल किया कि ‘असल में कौन विदेशी ताकतों द्वारा नियंत्रित है.” कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से 20 बार मिले तथा ‘पीएम केयर्स’ को चीनी कंपनियों से करोड़ों का अनुदान लेने की अनुमति दी. रमेश ने मोदी और शी के बीच बैठकों और साबरमती नदी के किनारे झूला झूलने का एक वीडियो भी साझा किया.
कांग्रेस नेता ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”मोदी जी ने शी से 20 बार मुलाकात की है, जिसमें उनके साथ झूले पर बैठना भी शामिल है. मोदी जी ने 19 जून, 2020 को सीमा उल्लंघन के मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से चीन को क्लीन चिट दे दी. मोदी जी ने ‘पीएम केयर्स’ फंड को चीनी कंपनियों से करोड़ों रुपये लेने की अनुमति दी.” उन्होंने सवाल किया, ”मोदी के के पास एक चीनी नागरिक है जो मनी लॉ्ड्रिरंग और धन की ‘राउंड-ट्रिपिंग’ का काम करता है. वास्तव में विदेशी शक्तियों द्वारा नियंत्रित कौन है?” चीन के साथ सीमा मुद्दे से निपटने और सीमा पर चीनी अतिक्रमण को लेकर कांग्रेस भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधती रही है.
रेपो रेट में बदलाव नहीं होने का मतलब है कि मुद्रास्फीति पर चिंताएं गंभीर हैं: कांग्रेस
कांग्रेस ने भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किए जाने के बाद शुक्रवार को दावा किया कि यह इस बात का परिचायक है कि करोड़ों परिवार कमरतोड़ महंगाई के चलते बहुत मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. रिजर्व बैंक ने केंद्रीय बैंक नीतिगत दर रेपो को 6.5 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “आरबीआई ने रेपो रेट 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखी है. इसका सीधा मतलब यह है कि मुद्रास्फीति पर चिंताएं गंभीर बनी हुई हैं. 47 महीनों से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आरबीआई के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि के लक्ष्य से काफी ऊपर बना हुआ है. अगस्त 2023 में सीपीआई 6.83 प्रतिशत थी.” उन्होंने कहा, “यह निश्चित रूप से आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बेरोकटोक वृद्धि के कारण करोड़ों परिवारों को होने वाली वास्तविक कठिनाइयों से पर्दा उठाता है.”
प्रधानमंत्री कांग्रेस को जितना चाहे बुरा-भला कहें, लेकिन गरीबों का अधिकार तो न छीनें : खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से जुड़ी से एक खबर का हवाला देते हुए शुक्रवार को दावा किया कि घटती घरेलू आमदनी और बढ.ती महंगाई की मार से बेहाल करोड़ों लोग मनरेगा में काम की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं. उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कांग्रेस के बारे में जितना बुरा-भला कहना चाहें, कह लें, लेकिन उन्हें गरीबों के अधिकार नहीं छीनना चाहिए.
खरगे ने जिस खबर का हवाला दिया उसमें कहा गया है कि ग्रामीण भारत में पिछले चार वर्षों में मनरेगा के तहत काम की मांग 30 प्रतिशत बढ. गई है. उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”ग्रामीण भारत में आर्थिक संकट इतना गहरा है कि सितंबर में मनरेगा के तहत काम की मांग 4 वर्षों में 30 प्रतिशत बढ. गई है. प्रधानमंत्री जी इस बारे में कुछ करने के बजाय अपनी विकराल विफलताओं को भाषण तले छिपाने के लिए, चुनावी राज्यों में कांग्रेस को कोस रहे हैं.”
खरगे ने दावा किया, ”बेतहाशा घटती घरेलू आमदनी और बढ.ती महँगाई की मार से बेहाल करोड़ों लोग मनरेगा में काम की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं. हालत यह है कि मनरेगा के बजट का केवल 4 प्रतिशत पैसा ही बचा है.” उन्होंने कहा, ”देश को याद है कि बजट 2023 में मोदी सरकार ने मनरेगा के बजट में 33 प्रतिशत कटौती की थी, जिसका परिणाम ग.रीब परिवार भुगत रहे हैं, विपक्ष शासित राज्यों का फंड भी बक.ाया है. कांग्रेस को जितना चाहे बुरा-भला कहिये, लेकिन ग.रीबों का अधिकार तो मत छीनिए.”
कांग्रेस ने अडाणी मामले में सेबी की जांच को लेकर सवाल खड़े किए, जेपीसी जांच की मांग फिर उठाई
कांग्रेस ने अडाणी समूह से संबंधित मामले में एक ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए शुक्रवार को भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) की जांच को लेकर सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में संस्थाओं ने लोगों को निराश किया है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि अडाणी समूह से संबंधित मामले की सच्चाई संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच से ही सामने आ सकती है.
अमेरिकी कंपनी ‘हिंडनबर्ग रिसर्च’ द्वारा अडाणी समूह के खिलाफ ‘अनियमितताओं’ और स्टॉक मूल्य में हेरफेर का आरोप लगाए जाने के बाद से कांग्रेस इस कारोबारी समूह पर निरंतर हमलावर है और आरोपों की जेपीसी से जांच कराए जाने की मांग कर रही है. अडाणी समूह ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में लगाए गए सभी आरोपों से इनकार किया था और उसका कहना था कि उसकी ओर से कोई गलत काम नहीं किया गया है.
रमेश ने एक खबर का हवाला देते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”पहली बार इस तथ्य को छिपाने का प्रयास करने के बाद कि उसने 2014 में अडाणी समूह के खिलाफ जांच शुरू की थी, ऐसा प्रतीत होता है कि बाजार नियामक सेबी उच्चतम न्यायालय को बताएगा कि उसने 2020 में इसे फिर से शुरू करने के लिए मजबूर होने से पहले 2017 में जांच क्यों रोक दी थी. कहा जा रहा है कि सेबी उच्चतम न्यायालय को बताएगा कि शुरुआती जांच में कुछ नहीं निकला.”
उन्होंने दावा किया, ”राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने 2014 में अडाणी समूह द्वारा बिजली उत्पादन उपकरणों की कीमत से अधिक भुगतान की जांच की थी, जिसमें कथित तौर पर एक अरब डॉलर का फंड निकाला गया था. इस घोटाले की आय को मॉरीशस और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित कंपनियों के माध्यम से विनोद अडाणी के दो सहयोगियों, चांग चुंग-लिंग और नासिर अली शाबान अली द्वारा नियंत्रित किया गया था.”
उन्होंने सवाल किया, ”उस व्यापक डीआरआई जांच को नज.रअंदाज. क्यों किया गया, जिसमें पहले ही महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ चुके थे? क्या अडाणी को क्लीन चिट देने के लिए सेबी पर दबाव डाला गया?क्या यह संयोग है कि यह सब उस व्यक्ति के सेबी अध्यक्ष रहने के दौरान हुआ, जो बाद में अडाणी के स्वामित्व वाले एनडीटीवी में निदेशक बने?” रमेश ने दावा किया कि मोदी सरकार के तहत भारत की संस्थाएं लोगों को निराश कर रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ‘मोदानी घोटाले’ का सच जेपीसी से ही सामने आएगा.



