पश्चिम एशिया में शांति बहाली के लिए बातचीत हो, फलस्तीनियों को अधिकार मिले: कांग्रेस

जेएनयू, जामिया में वाम सर्मिथत छात्र समूहों ने किया फलस्तीन का समर्थन

नयी दिल्ली. कांग्रेस इजराइल और हमास के बीच संघर्ष में आम नागरिकों के मारे जाने पर दुख जताते हुए सोमवार को कहा कि वर्तमान संघर्ष को जन्म देने वाले अपरिहार्य मुद्दों सहित सभी लंबित मुद्दों पर बातचीत शुरू करने की जरूरत है. भारत की मुख्य विपक्षी दल की कार्य समिति ने बैठक में पारित प्रस्ताव भी तत्काल संघर्ष विराम का भी आह्वान किया और कहा कि वह फलस्तीनी लोगों के जमीन, स्वशासन और आत्म-सम्मान के साथ जीने के अधिकारों के लिए अपने दीर्घकालिक समर्थन को दोहराती है.

प्रस्ताव में कहा गया है, ”कार्य समिति पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध और एक हजार से अधिक लोगों के मारे जाने पर गहरा दुख और पीड़ा व्यक्त करती है. वह फलस्तीनी लोगों के जमीन, स्वशासन, और आत्म-सम्मान एवं गरिमा के साथ जीने के अधिकारों के लिए अपने दीर्घकालिक समर्थन को दोहराती है.” कार्य समिति ने कहा कि वर्तमान संघर्ष को जन्म देने वाले अपरिहार्य मुद्दों सहित सभी लंबित मुद्दो पर बातचीत शुरू की जानी चाहिए.

इजराइल और फलस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास के बीच संघर्ष में सैकड़ों लोग मारे गए हैं. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को एक बयान में कहा था कि उनकी पार्टी का हमेशा यह मानना रहा है कि फलस्तीन के लोगों की वैध आकांक्षाएं वार्ता के माध्यम से अवश्य ही पूरी की जानी चाहिए, वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी इजराइली चिंताओं का भी समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए.

जेएनयू, जामिया में वाम सर्मिथत छात्र समूहों ने किया फलस्तीन का समर्थन

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों के एक वर्ग ने सोमवार को इजराइल को एक ”उत्पीड़क” बताया और फलस्तीन के लिए ”स्वतंत्रता” की मांग की. जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ”कब्जा करने वाले और उत्पीड़क देश (इजराइल) को ‘रक्षा के अधिकार’ के बारे में भाषण देने का कोई अधिकार नहीं है. आज कॉमरेड चे ग्वेरा को उनकी पुण्य तिथि पर याद कर रही हूं. साथ ही, उनकी कही उस बात को याद कर रही हूं, जो उन्होंने वर्षों पहले कही थी. ‘मातृभूमि या मौत.’ मैं फलस्तीन के साथ हूं.”

वाम सर्मिथत ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (आइसा) ने फलस्तीन के साथ एकजुटता व्यक्त की और क्षेत्र में शांति बहाली का आह्वान किया. भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) की जामिया इकाई ने भी फलस्तीन का समर्थन किया और क्षेत्र में इजराइल की उपस्थिति को ”आतंकवाद” बताया. इस पोस्ट को बाद में हटा दिया गया.

कांग्रेस की छात्रा शाखा के हटाए गए पोस्ट में लिखा था, ”इजराइल का फलस्तीन पर सात दशक से कब्जा आतंकवाद है. फलस्तीन को इजराइली यहूदीवादी आतंकवाद से स्वतंत्रता मिलनी चाहिए और लंबे समय से जारी इस संघर्ष का न्यायसंगत और शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए.” एनएसयूआई ने अपने हालिया ट्वीट में कहा कि केवल शांतिपूर्ण समाधान से ही न्याय मिल सकता है और उसने वैश्विक संगठनों से कूटनीतिक समाधानों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया.
एक अन्य छात्र समूह ‘दयार-ए-शौक स्टूडेंट्स चार्टर’ ने भी फलस्तीनियों का समर्थन किया.

उसने ‘एक्स’ पर लिखा, ”हम फलस्तीनी लोगों और फलस्तीनी स्वतंत्रता सेनानियों के उपनिवेशवादी इजराइल के खिलाफ संघर्ष में उनके साथ एकजुटता से खड़े हैं.” इज़राइल के दक्षिणी इलाके में हमास के हमलों में सैनिकों समेत कम से कम 700 लोगों की मौत हो गई है और 2,100 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं. मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, इज़राइल के जवाबी हमलों में गाज़ा पट्टी में करीब 500 लोगों की मौत हुई है और दो हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं.

Related Articles

Back to top button