
इंदौर. केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने रविवार को कहा कि जातिगत जनगणना की मांग का कांग्रेस को कोई चुनावी फायदा नहीं मिलेगा, क्योंकि जनता जानती है कि इस पार्टी ने देश की सत्ता में रहने पर जातियों के आधार पर नागरिकों की गिनती कभी नहीं कराई थी.
केंद्रीय मंत्री ने यह बात ऐसे वक्त कही, जब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा इन दिनों मध्य प्रदेश की चुनावी रैलियों में जातिगत जनगणना की मांग का मुद्दा लगातार उठा रहे हैं. राज्य की 230 विधानसभा सीटों पर 17 नवंबर को चुनाव होने हैं.
आठवले ने इंदौर में “पीटीआई-भाषा” से कहा, “जब कांग्रेस देश की सत्ता में थी, तब उसकी सरकारों ने जातिगत जनगणना कभी नहीं कराई, लेकिन अब राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी बार-बार जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं.” उन्होंने कहा कि इस मांग का कांग्रेस को चुनावों में कोई भी फायदा नहीं मिलेगा, क्योंकि लोगों को पता है कि यह पार्टी जब सत्ता में थी, तब उसने खुद जातिगत जनगणना नहीं कराई.
आठवले ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 17 में जातिवाद के उन्मूलन का प्रावधान है, इसलिए सरकार के सामने तकनीकी दिक्कत है कि वह जाति आधारित जनगणना कैसे कराए? उन्होंने कहा कि इस विषय में तमाम तकनीकी पहलुओं पर बाद में विचार किया जा सकता है, लेकिन मौजूदा हकीकत यही है कि पिछली सरकारों ने देश में जातिगत जनगणना कभी नहीं कराई थी. आठवले रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के प्रमुख हैं. इंदौर प्रेस क्लब में ”प्रेस से मिलिए” कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी यह बात नहीं मानती कि देश में जातिगत जनगणना कराए जाने से जातिवाद को बढ़ावा मिलेगा.
आठवले ने कहा कि उनकी पार्टी की सोच है कि देश में केवल अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की नहीं, बल्कि सभी जातियों के लोगों की गिनती होनी चाहिए, ताकि पता चल सके कि आबादी में हर जाति की कितनी हिस्सेदारी है? केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल दलित समुदाय को यह झांसा देकर भड़काने की कोशिश कर कर रहे हैं कि नरेन्द्र मोदी सरकार देश का संविधान बदलना चाहती है.
उन्होंने कहा कि दलित समुदाय को विपक्षी दलों के इस बहकावे में कतई नहीं आना चाहिए, क्योंकि सरकार का संविधान बदलने का कोई इरादा नहीं है. आठवले ने एक सवाल के जवाब में अपना रुख दोहराया कि सीमा हैदर के पाकिस्तान से भारत आने को लेकर जब तक राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) सरीखी भारतीय एजेंसियों की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उसे रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) में शामिल करने का कोई सवाल ही नहीं है.



