
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मतगणना के लिए केंद्रीय कर्मियों की तैनाती के चुनाव आयोग (ईसी) के आदेश में दखल से सुप्रीम कोर्ट के इनकार ने चुनाव प्रक्रिया पर शक पैदा करने की कोशिशों के खिलाफ एक ‘स्पष्ट संदेश’ दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता अमित मालवीय ने शनिवार को यह बात कही।
शीर्ष कोर्ट ने शनिवार को कहा, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की उस याचिका पर किसी और आदेश की जरूरत नहीं है, जिसमें उसने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने मतगणना के लिए केंद्रीय कर्मियों की तैनाती संबंधी चुनाव आयोग के आदेश के खिलाफ उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?
■ भाजपा नेता ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक और कानूनी झटका देते हुए दखल देने से इनकार कर दिया है।
■ उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने राज्य सरकार के कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी से बाहर रखने को चुनौती दी थी। तत्काल सुनवाई की मांग की थी।
■ उन्होंने कहा कि इस याचिका पर सुनवाई से इनकार यह स्पष्ट संदेश देता है कि मतगणना प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित करने या उस पर शक करने कोशिशों को आसानी से मान्यता नहीं मिलेगी।
■ उन्होंने यह भी कहा कि यह ममता बनर्जी के लिए एक और न्यायिक झटका है।
मालवीय की टिप्पणी पर टीएमसी की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले पर क्या कहा?
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की विशेष पीठ ने कहा, चुनाव आयोग को मतगणना कर्मियों को चुनने का अधिकार है और 13 अप्रैल का उसका आदेश गलत नहीं कहा जा सकता।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने कहा कि सर्कुलर में साफ है कि केंद्रीय और राज्य सरकारी कर्मचारियों का मिश्रण होगा और तृणमूल कांग्रेस की किसी गड़बड़ी की आशंका गलत है। आयोग ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि सर्कुलर को पूरी तरह लागू किया जाएगा।
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में हुआ था। मतगणना चार मई को होगी। इससे पहले 30 अप्रैल को कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी तृणमूल कांग्रेस की याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि केंद्रीय और सरकारी कर्मचारियों को मतगणना में नियुक्त करने के चुनाव आयोग का फैसला गैरकानूनी नहीं है।



